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मां दुर्गा की छठवीं शक्ति कात्यायनी – माँ दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा

Katyayani Mata:

मां दुर्गा के छठे अवतार देवी कात्यायनी की नवरात्रि के छठे दिन पूजा की जाती है। इनकी आराधना से भक्तों को चारों फल- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति बड़ी ही आसानी से हो जाती है। देवी कात्यायनी समस्त जन्मों के पापों को नष्ट करके भक्तों के रोग, संताप भय और शोक का अंत कर देती हैं। देवी कात्यायनी मां पार्वती के रूपों में से ही एक है और इन्हें उमा, गोरी, काली, हेमावती, इस्वरी आदि नामों से भी जाना जाता है। देवी की चार भुजाएं हैं जिनमें से दाहिनी तरफ का ऊपरवाला हाथ अभयमुद्रा में तथा नीचे वाला हाथ वरमुद्रा में है। देवी ने एक भुजा में तलवार पकड़ी हुई है और चौथी भुजा में कमल पुष्प धारण किए हुए हैं देवी का वाहन सिंह है।

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नवरात्रि तारीख (Navratri 2018 date) किस दिन होगी कौन सी देवी स्वरूप की आराधना

Contents

प्रथम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता शैलपुत्री

द्वितीय नवरात्र पर नवदुर्गा – माता ब्रह्मचारिणी

तृतीय नवरात्र पर नवदुर्गा – माता चंद्रघंटा

चतुर्थी नवरात्र पर नवदुर्गा – माता कूष्मांडा

पंचम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता स्कंदमाता

षष्ठी नवरात्र पर नवदुर्गा – देवी कात्यायनी

सप्तम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता कालरात्रि

अष्टम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता महागौरी

नवम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता सिद्धिदात्री

15 अक्टूबर, 2018 को नवरात्र का छटवा दिन है और इस दिन देवी कात्यायनी की आराधना की जाती है।

देवी कात्यायनी की कथा: कात्य गोत्र में एक प्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने जन्म लिया। उनकी मनोकामना थी कि मां भगवती स्वय उनके घर में पुत्री के रूप में जन्म ले। इसके लिए उन्होंने कठिन तपस्या की। मां भगवती ने उनकी यह तपस्या को स्वीकार किया और उनके घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसीलिए उनका नाम देवी कात्यायनी पड़ा। देवी कात्यायनी भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण करके उन्हें मनचाहा फल देती हैं। भगवान श्री कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए गोपियों ने देवी के इसी रूप की पूजा की थी।

कात्यायनी माता की आरती –

जय जय अंबे जय कात्यायनी।
जय जगमाता जग की महारानी॥

बैजनाथ स्थान तुम्हारी।
वहां वरदानी नाम पुकारा॥

कई नाम है कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है॥

हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥

हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते॥

कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की॥

झूठे मोह से छुड़ानेवाली।
अपना नाम जपनेवाली॥

बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो॥

हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी॥

जो भी माँ को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥

मां कात्यायनी पूजा मंत्र –

चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। 
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥

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