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नवदुर्गा द्वितीय माता ब्रह्मचारिणी – माँ दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा

नवरात्रि का दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी (Maa Brahmacharini) को समर्पित है। जोकि देवी दुर्गा का दूसरा रूप है, इन्हें देवी तपश्चारिणी भी कहा जाता है। इनका यह नाम घोर तपस्या के कारण पड़ा था। इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं। मां दुर्गा के इस रूप की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है तथा अनंत फल मिलता है। माता के इस रूप की पूजा वैराग्य, त्याग, सदाचार, तप और संयम में वृद्धि के लिए की जाती है।

brahmcharini

नवरात्रि तारीख (Navratri 2018 date) किस दिन होगी कौन सी देवी स्वरूप की आराधना

Contents

प्रथम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता शैलपुत्री

द्वितीय नवरात्र पर नवदुर्गा – माता ब्रह्मचारिणी

तृतीय नवरात्र पर नवदुर्गा – माता चंद्रघंटा

चतुर्थी नवरात्र पर नवदुर्गा – माता कूष्मांडा

पंचम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता स्कंदमाता

षष्ठी नवरात्र पर नवदुर्गा – देवी कात्यायनी

सप्तम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता कालरात्रि

अष्टम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता महागौरी

नवम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता सिद्धिदात्री

11 अक्टूबर, 2018 को नवरात्र का दूसरा दिन है और इस दिन देवी ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है।

माता ब्रह्मचारिणी (Maa Brahmacharini) की कथा कुछ इस प्रकार से है

ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप का आचरण करने वाली। देवी भगवान शिव को पति के रूप में पाना चाहती थी, इसीलिए नारद मुनि के कहने पर देवी ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। उनकी यह तपस्या हजारों वर्षों तक चली। इस तपस्या में वह 1000 वर्ष तक जमीन पर ही रही और केवल फल-फूल खाकर अपना निर्वाह किया।

देवि का तप इतना कठिन था, कि वह धूप, वर्षा तथा सर्दी में भी खुले आकाश के नीचे रहती थी और बहुत ही कठिन उपवास करती थी। भगवान शंकर की आराधना करते हुए देवी ने 3000 वर्षों तक सिर्फ टूटे हुए सूखे बेलपत्र खाकर ही अपना निर्वाह किया। जब इन सब से भी बात ना बनी तो देवी ने निर्जल और निराहार रहने का फैसला किया। उन्होंने पत्ते खाने छोड़ दिए इसी वजह से उनका नाम अपर्णा पड़ा।

इस सब के चलते देवी का शरीर बहुत क्षीण हो गया था। देवी की कठिन भक्ति देखकर सभी देवता, ऋषि, मुनि बहुत प्रसन्न हुए और देवी की सराहना करते हुए उन्होंने देवी को यह आशीर्वाद दिया- ” कि आज तक किसी ने भी ऐसी कठोर तपस्या ना की है और ना ही कर सकेगा तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी, और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति के रूप में प्राप्त होंगे”।

देवी ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से मन विचलित नहीं होता, कठिन संघर्ष करने का बल मिलता है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मां ब्रह्मचारिणी जी की आरती –

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता । जय चतुरानन प्रिय सुख दाता । ।

ब्रह्मा जी के मन भाती हो । ज्ञान सभी को सिखलाती हो ।।

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा । जिसको जपे सकल संसारा ।।

जय गायत्री वेद की माता । जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता ।।

कमी कोई रहने न पाए । कोई भी दुख सहने न पाए ।।

उसकी विरति रहे ठिकाने । जो ​तेरी महिमा को जाने ।।

रुद्राक्ष की माला ले कर । जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर ।।

आलस छोड़ करे गुणगाना । मां तुम उसको सुख पहुंचाना।।

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम । पूर्ण करो सब मेरे काम ।।

भक्त तेरे चरणों का पुजारी । रखना लाज मेरी महतारी ।।

मां ब्रह्मचारिणी पूजा मंत्र –

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। 
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ 

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