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मां दुर्गा की तीसरी शक्ति चंद्रघटा – माँ दुर्गा के चंद्रघटा स्वरूप की पूजा

Maa Chandraghanta:

नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघटा को समर्पित है। जो देवी दुर्गा का तीसरा रूप है, इसीलिए नवरात्रि के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा का महत्व है। देवी को चंद्रघंटा नाम से इसलिए जाना जाता है क्योंकि इनके मस्तक पर घंटी के आकार में आधा चंद्र बना हुआ है। देवी के शरीर का वर्ण सोने के समान सुनहरी है। देवी के 10 हाथ हैं जिनमे वह अस्त्र-शस्त्र धारण किये हुए है। देवी चंद्रघंटा की सवारी सिंह है और यह सदैव युद्ध के लिए तैयार हैं।

नवरात्रि तारीख (Navratri 2018 date) किस दिन होगी कौन सी देवी स्वरूप की आराधना

Contents

प्रथम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता शैलपुत्री

द्वितीय नवरात्र पर नवदुर्गा – माता ब्रह्मचारिणी

तृतीय नवरात्र पर नवदुर्गा – माता चंद्रघंटा

चतुर्थी नवरात्र पर नवदुर्गा – माता कूष्मांडा

पंचम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता स्कंदमाता

षष्ठी नवरात्र पर नवदुर्गा – देवी कात्यायनी

सप्तम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता कालरात्रि

अष्टम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता महागौरी

नवम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता सिद्धिदात्री

12 अक्टूबर, 2018 को नवरात्र का तीसरा दिन है और इस दिन देवी चंद्रघंटा की आराधना की जाती है।

देवी चंद्रघंटा: मां दुर्गा धरती पर असुरों के विनाश के लिए चंद्रघंटा के रूप में अवतरित होती है। मां भयंकर देत्यो समेत उनकी सेना का विनाश कर देवताओं को उनका अधिकार दिलाती है। मां के आगमन से घंटे के समान भयानक ध्वनि समस्त संसार में गूंजने लगती है। और सभी राक्षस, दानव व असुर इससे भयभीत होकर कांपने लगते हैं। गुस्से से भरे मां के इस भयंकर रूप को देखने भर से ही महिषासुर जैसे दैत्य के प्राण निकल गए थे।

कहा जाता है कि मां के इस रूप की पूजा करने से मन को शांति मिलती है, और भक्तों के सभी प्रकार के भय खत्म हो जाते हैं। भक्त अध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त करने के लिए भी मां चंद्रघंटा की पूजा आराधना करते हैं। मां की अराधना में सावधानी करने की आवश्यकता है। भक्तों का मन, कर्म और वचन पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए।

एक और मान्यता यह भी है कि विधि पूर्वक और सच्चे मन से मां की पूजा अर्चना करने से अलौकिक ध्वनियां सुनाई देती हैं, और भक्त के सभी जन्मों के पाप और कष्ट खत्म हो जाते हैं। ऐसा करने वाले व्यक्ति को संसार मैं यश कृति व सम्मान प्राप्त होता है मां बहुत ही दयालु है और अपने भक्तों के सभी दुख या कष्ट खत्म कर देती हैं।

मां चंद्रघंटा की आरती –

जय माँ चन्द्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे काम॥

चन्द्र समाज तू शीतल दाती।
चन्द्र तेज किरणों में समाती॥

क्रोध को शांत बनाने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली॥

मन की मालक मन भाती हो।
चंद्रघंटा तुम वर दाती हो॥

सुन्दर भाव को लाने वाली।
हर संकट में बचाने वाली॥

हर बुधवार को तुझे ध्याये।
श्रद्दा सहित तो विनय सुनाए॥

मूर्ति चन्द्र आकार बनाए।
शीश झुका कहे मन की बाता॥

पूर्ण आस करो जगत दाता।
कांचीपुर स्थान तुम्हारा॥

कर्नाटिका में मान तुम्हारा।
नाम तेरा रटू महारानी॥

भक्त की रक्षा करो भवानी।

मां चंद्रघंटा पूजा मंत्र –

पिण्डज प्रवरारुढ़ा चण्डकोपास्त्र कैर्युता |

प्रसादं तनुते मह्यं चंद्र घंष्टेति विश्रुता ||

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