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मां दुर्गा की चौथी शक्ति कुष्मांडा – माँ दुर्गा के कुष्मांडा स्वरूप की पूजा

Maa Kushmanda:

देवी दुर्गा का चौथा रूप देवी कुष्मांडा है। इसीलिए नवरात्रि के चौथे दिन कुष्मांडा देवी की पूजा का महत्व है। इस देवी से ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई थी। इसलिए इनका नाम कूष्मांडा देवी पड़ा। सृष्टि की उत्पत्ति से पहले चारों तरफ अंधकार था, उस समय देवी ने अपने हास्य से ब्रह्मांड की उत्पत्ति की। यही देवी आदिशक्ति या आदिस्वरूपा के नाम से भी जानी जाती है। देवी को अष्टभुजा भी कहा जाता है क्योंकि इनकी आठ भुजाएं हैं। जिनमें क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र, गदा तथा माला है।

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नवरात्रि तारीख (Navratri 2018 date) किस दिन होगी कौन सी देवी स्वरूप की आराधना

Contents

प्रथम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता शैलपुत्री

द्वितीय नवरात्र पर नवदुर्गा – माता ब्रह्मचारिणी

तृतीय नवरात्र पर नवदुर्गा – माता चंद्रघंटा

चतुर्थी नवरात्र पर नवदुर्गा – माता कूष्मांडा

पंचम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता स्कंदमाता

षष्ठी नवरात्र पर नवदुर्गा – देवी कात्यायनी

सप्तम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता कालरात्रि

अष्टम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता महागौरी

नवम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता सिद्धिदात्री

13 अक्टूबर, 2018 को नवरात्र का चौथा दिन है और इस दिन देवी कूष्मांडा की आराधना की जाती है।

देवी कुष्मांडा: देवी सिंह की सवारी करती है, तथा इन्हें पेठा यानी कुष्मांड बहुत प्रिय है इसीलिए इनका नाम कूष्मांडा है। समस्त ब्रह्मांड में केवल कुष्मांडा देवी ही है जो सूर्यलोक में रहने की क्षमता रखती हैं। सूर्यलोक में रहने के कारण इनके शरीर की कांति और प्रभाव बहुत ही चमकदार है। जिसे देखना लगभग नामुमकिन है। ब्रह्मांड के सभी जीव जंतुओं में इन्हीं का तेज उपस्थित है।

देवी कुष्मांडा की पूजा आराधना करने से हर प्रकार के रोग नष्ट हो जाते हैं आयु में वृद्धि होती है तथा यश और बल की प्राप्ति होती है। माता को लाल रंग के पुष्प प्रिय है।

माँ कुष्मांडा जी की आरती –

कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥

पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी माँ भोली भाली॥

लाखों नाम निराले तेरे ।
भक्त कई मतवाले तेरे॥

भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥

सबकी सुनती हो जगदंबे।
सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥

तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥

माँ के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥

तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो माँ संकट मेरा॥

मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥

तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

मां कुष्मांडा पूजा मंत्र –

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे।

यह भी पढ़े: नव दुर्गा नवरात्री पर्व कथा पूजन 2018 

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