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मां दुर्गा की पांचवीं शक्ति स्कंदमाता – माँ दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा

Maa Skandmata:

मां दुर्गा के पांचवें रूप का नाम है देवी स्कंदमाता। इसलिए इनकी पूजा नवरात्रि के पाचवे दिन की जाती है। इनका यह नाम देवी स्कंदमाता भगवान स्कंद कुमार (कार्तिकेय) की माता होने के कारण पड़ा है। देवी की चार भुजाएं हैं जिसमें देवी ने एक भुजा में स्कंद को बालरूप में गोद में लिया हुआ है। दो भुजाओं में कमल-पुष्प है तथा एक भुजा से भक्तों को आशीर्वाद दे रही है। मां सिंह की सवारी करती हैं और इनका वर्ण शुभ्र है। कमल के आसन पर बैठने के कारण मां को पद्मासना भी कहा जाता है।

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नवरात्रि तारीख (Navratri 2018 date) किस दिन होगी कौन सी देवी स्वरूप की आराधना

Contents

प्रथम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता शैलपुत्री

द्वितीय नवरात्र पर नवदुर्गा – माता ब्रह्मचारिणी

तृतीय नवरात्र पर नवदुर्गा – माता चंद्रघंटा

चतुर्थी नवरात्र पर नवदुर्गा – माता कूष्मांडा

पंचम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता स्कंदमाता

षष्ठी नवरात्र पर नवदुर्गा – देवी कात्यायनी

सप्तम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता कालरात्रि

अष्टम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता महागौरी

नवम नवरात्र पर नवदुर्गा – माता सिद्धिदात्री

14 अक्टूबर, 2018 को नवरात्र का पांचवा दिन है और इस दिन देवी स्कंदमाता की आराधना की जाती है।

माता का वास पहाड़ों में है तथा यह जीवो में नवचेतना का निर्माण करती है। कहते हैं कि स्कंदमाता की पूजा करने से अज्ञानी को भी अपार ज्ञान की प्राप्ति हो जाती है। इनकी उपासना से भक्तों की सारी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। देवी सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री है अर्थार्त इन के उपासक को अलौकिक तेज की प्राप्ति होती है। यह भक्तों के सभी दुखों का निवारण कर उनके लिए मोक्ष के द्वार खोल देती हैं। मन को एकाग्र कर ज्ञान की प्राप्ति करने के लिए देवी स्कंदमाता की उपासना की जाती है। यदि कोई उपासक कुंडलिनी जागरण करने का इच्छुक है तो वह देवी स्कंदमाता की पूजा कर सकता है।

माँ स्कंदमाता जी की आरती –

जय तेरी हो स्कंद माता।
पांचवां नाम तुम्हारा आता॥

सबके मन की जानन हारी।
जग जननी सबकी महतारी॥

तेरी जोत जलाता रहू मैं।
हरदम तुझे ध्याता रहू मै॥

कई नामों से तुझे पुकारा।
मुझे एक है तेरा सहारा॥

कही पहाडो पर है डेरा।
कई शहरों में तेरा बसेरा॥

हर मंदिर में तेरे नजारे।
गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥

भक्ति अपनी मुझे दिला दो।
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥

इंद्र आदि देवता मिल सारे।
करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥

दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए।
तू ही खंडा हाथ उठाए॥

दासों को सदा बचाने आयी।
भक्त की आस पुजाने आयी॥

मां स्कंदमाता पूजा मंत्र –

सौम्या सौम्यतराशेष सौम्येभ्यस्त्वति सुन्दरी।

परापराणां परमा त्वमेव परमेश्वरी।।

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