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जानिये अक्टूबर महीने में कोन – कोन से व्रत और त्योहार आने वाले है

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वर्ष 2018 के अक्टूबर महीने में कई बड़े बड़े व्रत और त्योहार आने वाले हैं जिनका हम सब बड़े उत्साह से इंतेजार करते है। इन त्योहारों में नवरात्रि, दशहरा और करवा चौथ प्रमुख है। अक्टूबर के इस महीने में लगभग 20 छोटे और बड़े त्योहार आयेंगे। श्राधों के खत्म होने के बाद 10 अक्टूबर से नवरात्रि का त्यौहार शुरू हो जायेगा। जिसमे नौ दिनों तक देवी मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। नवरात्रि का त्यौहार 18 अक्टूबर को समाप्त हो जायेगा और 19 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। उसके बाद करवा चौथ और शरद पूर्णिमा जैसे व्रत और त्योहार आयेंगे।

अक्टूबर (October Festivals) महीने में किस दिन कौन कौन से व्रत और त्योहार आयेंगे।

Contents

2 अक्टूबर 2018 को महालक्ष्मी व्रत, गांधी जयंती और अष्टमी श्राद्ध

5 अक्टूबर 2018 को इंदिरा एकादशी और शुक्रवार व्रत

6 अक्टूबर 2018 को शनि प्रदोष व्रत

7 अक्टूबर 2018 को मासिक शिवरात्री

8 अक्टूबर 2018 को सर्वपितृ अमावस्या

10 अक्टूबर 2018 को शारदीय नवरात्रि शुरुआत (घट स्थापना) और महाराजा अग्रसेन जयंती

12 अक्टूबर 2018 को विनायक चतुर्थी व्रत

16 अक्टूबर 2018 को कालरात्रि पूजा

17 अक्टूबर 2018 को दुर्गाष्टमी पूजा

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18 अक्टूबर 2018 को दुर्गा नवमी पूजा और नवरात्रि समाप्ति

19 अक्टूबर 2018 को दशहरा और विजया दशमी

20 अक्टूबर 2018 को पापांकुशा एकादशी व्रत

22 अक्टूबर 2018 को प्रदोष व्रत

23 अक्टूबर 2018 को शरद पूर्णिमा

24 अक्टूबर 2018 को वाल्मीकि जयंती और मीरा बाई जयंती

25 अक्टूबर 2018 को कार्तिक माह आरम्भ

27 अक्टूबर 2018 को करवा चौथ व्रत

31 अक्टूबर 2018 को अहोई अष्टमी व्रत

अक्टूबर महीने में देवी देवताओं को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है इस महीने में माता महाशक्ति के 9 पवित्र दिन आते है और मन्त्रो और भगती के द्वारा उनको प्रसन्न किया जाता है। यदि आपके पास पूजन की सामग्री न हो तो केवल हल्दी, अक्षत और पुष्प से ही माता की आराधना करें। संभव हो श्रृंगार का सामान और नारियल और चुन्नी जरुर चढ़ाएं।

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माँ शक्ति ही परब्रह्म हैं, अपने भक्तिभाव और पवित्र हर्दय से आप उनको प्रसन्न कर सकते है चाहे आपके पास कोई सामग्री हो या न हों। इसलिए जो भी सामग्री आप के पास उपलब्ध हो उसी को भक्ति भाव और समर्पण के साथ माँ को अर्पित करें। धन और सामग्री के अभाव में अपने मन में दुखी न करें। सच्चे हर्दय से मन्त्रों के जाप ,पूजन और आरती से अपने व्रत को संपन्न करें।

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