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प्रकृति के पांच तत्व और उन्हें संतुलित क्यों रखना चाहिए?

prakriti ke 5 tattvas in hindi

हिंदू धर्म के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि पांच ऐसे तत्व हैं (5 tattvas) जिनसे मिलकर ही सबकुछ बनता है। हमारा शरीर भी इन्ही तत्वों के मेल से बना है: जोकि आकाश, अग्नि, जल, पृथ्वी व वायु के नाम से जाने जाते है। जीवन की समस्याओं को समझने के लिए हमें इन पांच तत्वों को समझने की जरूरत है – चाहे यह हमारे रिश्तो से सम्बंधित परेशानिया हो, शारीरिक या मानसिक परेशानिया हो या यहां तक ​​कि हमारे आध्यात्मिक जीवन के बारे में हो।

यदि किसी भी तत्व के बीच किसी प्रकार का कोई असंतुलन है, तो यह इन समस्याओं का कारण बन सकता है। और इन समस्याओं को हल करने का एकमात्र तरीका तत्वों को संतुलित करना है।

आपके जीवन के लिए पांच तत्वों (पंचमहाभूत) को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?

5 tattvas in hindi
Image: creativemarket.com

जानें कि ये तत्व क्या हैं:

अग्नि (Fire)

आग गर्मी को दर्शाती है जो चीजों को परिपक्व बनाती है, यह पिघलाने और शुद्धिकरण में सहायता करती है। अग्नि कुछ भी बदल सकता है: यह ठोस को तरल, तरल को गैस में बदल सकती है। जब शरीर में आग संतुलित रहती है, तो यह गर्भाशय के रेशे, अंडाशय के अल्सर, जोड़ों और रीढ़ की हड्डी के osteophytes को पिघला सकती है।

अगर आग में वृद्धि हुई है, तो यह छाती में जलन, क्रोध, आक्रामकता और इसके साथ मूत्र में जलन की समस्या को पैदा कर सकती है। इसके विपरीत अगर आग की कमी है तो यह भूख, मधुमेह, रचनात्मकता की कमी का कारण बन सकती है और यहां तक ​​कि रिश्तो की गर्मी में भी कमी ला सकती है।

जल (Water)

पानी शीतलता का प्रतिनिधित्व करता है। पानी बहुत ही लचीला होता है और किसी भी साचे में डालने पर कोई भी रूप ले सकता है। पानी के अधिकता से शरीर में सूजन हो सकती है। पानी अनुकूलता और लचीलेपन का भी प्रतिनिधित्व करता है, जो की रिश्तो के लिए एक महत्वपूर्ण गुण है। क्युकी रिश्तो में संबंधों को समायोजन की आवश्यकता होती है।

आकाश (Space)

अंतरिक्ष दो चीजों के बीच के अंतर को परिभाषित करता है, और यह गैर प्रतिरोध का तत्व भी है। इस प्रकार, यह इस बात के बारे में बताता है कि हमें हमारे रिश्तों, विचारों आदि के बीच कुछ जगह कैसे बनाए रखी जानी चाहिए।

उदाहरण के लिए, यदि हमारे जोड़ों के बीच किसी प्रकार की जगह यदि कम हो जाती है, तो हमें जोड़ों का दर्द महसूस होता है। इसी तरह, यदि विचारों के बीच किसी भी प्रकार का तनाव हो जाता है, तो यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। रिश्ते में भी,फ़ासलो का एक निश्चित स्तर होना चाहिए।

वायु (Wind)

वायु शरीर में ठन्डे और सूखे की अस्थिर प्रवृत्ति को दर्शाती है। इस तत्व की स्थिरता को बनाये रखने के लिए इसका जीवन में पूरी तरह से बहते रहना आवशयक है। यदि शरीर में वायु शीघ्रता से बहती है, तो यह रिश्तों में अस्थिरता, मानसिक रूप से तनाव व अक्सर मांसपेशियों में खिचाव व झटके का कारण बनती है।

यदि जीवन में वायु की मात्रा कम होती है, तो इसके परिणामस्वरूप विचारों की कमी, कोई आंत्र आंदोलन, कम रक्तचाप, आलस्य, रिश्ते में रूचि की कमी होने की सम्भावना बनी रहती है। यदि आप किसी व्यवसाय पर विचार कर रहे हैं, और जीवन में वायु की कमी है तो यह व्यवसाय में धीमी चाल का कारण बन सकती है।

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पृथ्वी (Earth)

पृथ्वी दृढ़ता का प्रतिनिधित्व करती है। पृथ्वी कठोर, भारी और स्थिर है। यह कुछ भी पकड़ कर उसे रोके रख सकती है। इस की कमी होने से आपके बाल झड़ सकते हैं, हड्डियां शक्तिहीन हो सकती हैं और दांत कमजोर हो सकते हैं।

यदि इसका स्तर गिरता है तो रक्तस्राव के बंद होने में भी कठिनाई आती है व आपसी संबंध भी अस्थिर हो सकते हैं। यदि इसकी अधिक मात्रा है, तो पाचन खराब हो सकता है, शरीर में ट्यूमर बन सकते हैं।

जीवन को शारीरिक व मानसिक दोनों रूपों से स्वस्थ बनाये रखने के लिए सभी तत्वों में परिपूर्ण संतुलन होना आवश्यक है।

इन तत्वों को संतुलित करने के लिए कई उपचार हैं – एक्यूप्रेशर, कलर थेरेपी, रेकी, वास्तु इत्यादि।

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