in , ,

मानव शरीर के 7 चक्र और उनका जीवन पर प्रभाव

7 Chakras – 7 चक्र

मानव शरीर में कुल मिलाकर 114 चक्र होते हैं। जिनमें से 7 चक्रो को मुख्य रूप से विशेष माना जाता है। यही चक्र हमारे शरीर के उर्जा प्रवाह के केंद्र होते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह चक्र निष्क्रिय अवस्था यानी कि सो रहे होते हैं, और यदि कोई व्यक्ति इन चक्रों को जागृत कर ले तो उसके जीवन की दशा ही बदल जाती है। इन चक्रों की जागृति मनुष्य को उसके सर्वोच्च रूप में बदल देती है जिसे कुंडली का जागृत होना कहा जाता है।

7-chakras-hindi

चलिए इन सातों चक्रों के बारे में विस्तार से बात करते हैं –

1. मूलाधार चक्र – Muladhara

muladhar

इस चक्र का मंत्र ‘लं’ है जिसे 4 पंखुड़ियों वाले फूल के रूप में दिखाया जाता है इस चक्र का तत्व धरा यानि धरती है और रंग लाल है।

मूलाधार चक्र या मूल चक्र मानव शरीर का प्रथम चक्र है। यह गुदा और लिंग के बीच यानी की रीड की हड्डी के आधार पर स्थित होता है। इसीलिए इसे आधार चक्र भी कहते हैं। 99% से ज्यादा लोग अपने जीवन भर इसी चक्कर में जीते रहते हैं। इस चक्कर में जीने वाले लोगों को भोग और निंद्रा अति प्रिय रहती है और उनके शरीर की सारी ऊर्जा इसी पर एकत्रित रहती है।

मूलाधार चक्र के संतुलित होने के लाभ

जब व्यक्ति का मूलाधार चक्र संतुलित हो जाता है तो व्यक्तित्व के विकास की शुरुआत होती है। इससे व्यक्ति में चेतना आती है जो मानव और जानवरों के बीच सीमा रेखा बनाती है। और व्यक्ति के भीतर वीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जागृत होता है।

अति सक्रिय:
जब किसी व्यक्ति का मूलाधार चक्र अति सक्रिय होता है तो वह बहुत ही आक्रामक स्वभाव का होता है। वह छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करता है, दूसरों की बातें मानने में उसे मुश्किल होती है और सांसारिक चीजों को अधिक महत्व देता है।

असामान्य रूप से सक्रिय:
जब किसी व्यक्ति का मूलाधार चक्र असामान्य रूप से सक्रिय होता है तो वह सदैव असुरक्षित महसूस करता है। वह खुद को बाहरी दुनिया से अलग कर लेता है व सदैव अशांत, शर्मिला और बेचैन रहता है।

चक्र को जागृत करने की विधि

लगातार ध्यान करने से यह चक्र जागृत होने लगता है। इस चक्र को जागृत करने के लिए व्यक्ति को साक्षी भाव में रहते हुए नियम का पालन करना चाहिए। जिसके लिए भोग और निंद्रा पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है। यह शरीर का मूल चक्र है जिसका संबंध सीधे-सीधे धरा से है। मूलाधार चक्र को जगाने के लिए नंगे पैर घास या रेत में चलना भी लाभकारी रहता है।

 

2. स्वाधिष्ठान चक्र – Svadhishana

Svadhishana

इस चक्र का मंत्र ‘वं’ है जिसे 6 पंखुड़ियों वाले फूल की तरह दर्शाया जाता है। इसका तत्व जल है और रंग नारंगी होता है।

स्वाधिष्ठान चक्र मानव शरीर का दूसरा चक्र होता है। इस चक्कर के जागृत होते ही मानव समझ के दूसरे चरण की शुरुआत होती है। इस चक्कर को धार्मिक चक्कर भी कहते हैं मानव शरीर में यह चक्र रीड की हड्डी के तल में नाभि केंद्र के बीच स्थित होता है। यह चक्कर व्यक्ति को नकारात्मकता से दूर करता है।

चक्र संतुलित होने के लाभ

इससे व्यक्ति की रचनात्मकता बहुत बढ़ जाती है। वह जीवन में खुशियों का पूरे दिल से स्वागत करता है और व्यक्ति में ईमानदारी तथा नैतिकता आती है।

अति सक्रिय:
अगर किसी व्यक्ति का यह चक्र अति सक्रिय होता है तो वह अत्यधिक भावुक होता है।

असामान्य रूप से सक्रिय:
ऐसे व्यक्ति की भावना अस्थिर रहती है वह खुद को सांसारिक सुख से त्याग कर एकांत में रहना पसंद करते हैं।

चक्र को जागृत करने की विधि

इस चक्र को जागृत करने के लिए शारीरिक गतिविधियां बहुत उपयोगी है। जिसमें व्यक्ति व्यायाम, प्राणायाम, दौड़ना, चलना, नाच इत्यादि प्रक्रियाओं को शामिल कर सकता है।

 

3. मणिपुर चक्र – Manipura

Manipura

मणिपुर चक्र का मंत्र रं’ है और यह 10 पंखुड़ियों वाले फूल के रूप में दर्शाया जाता है। इसका तत्व अग्नि और रंग पीला होता है

मणिपुर चक्र मानव शरीर का तीसरा चक्र होता है जिसे नाभि चक्र भी कहते हैं। यह चक्र ज्ञान बुद्धि आत्मविश्वास तथा निर्णय लेने की क्षमता को जन्म देता है। मानव शरीर में यह चक्कर पसली के हड्डियों के पिंजरे के नीचे नाभि के केंद्र में स्थित होता है।

चक्र संतुलित होने के लाभ

इस चक्कर के जागृत होने से व्यक्ति आत्मविश्वासपूर्ण और मजबूत बनता है। उसका नेतृत्व गुण बढ़ता है और वह अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी सुविधा के क्षेत्र से बाहर निकलता है।

अति सक्रिय: 
ऐसे व्यक्ति की अकरात्मक प्रवृत्ति अधिक होती है। वह बहुत ऊर्जावान होता है और सदैव काम करता रहता है साथ ही अपने कर्मचारियों से जबरदस्ती ज्यादा काम लेता है।

असामान्य रूप से सक्रिय:
ऐसे व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी होती है। वह बहुत डरपोक होते हैं अतः सदा भयभीत रहते हैं। असफल होने के डर से वह निर्णय लेने से डरते हैं।

चक्र को जागृत करने की विधि

इस चक्र को जागृत करने के लिए नाभि क्षेत्र पर ध्यान करने की आवश्यकता होती है। इस चक्कर का तत्व अग्नि है इसीलिए इस पर सूर्य की रोशनी से भी प्रभाव पड़ता है।

4. अनाहत चक्र – Anahata

Anahata

इस चक्र का मंत्र ‘यं’ है यह मानव शरीर का चौथा मुख्य चक्र है। यह 12 पंखुड़ियों वाले कमल के रूप में छाती के मध्य में स्थित होता है। इस चक्र का रंग हरा होता है।

अनाहत चक्र को हृदय चक्र भी कहा जाता है। इस चक्कर के संतुलित होते ही मनुष्य की मनोकामनाएं जल्दी से पूरी होती हैं। इस चक्कर में व्यक्ति को जीवन के सही माइनों का पता चलता है।

चक्र के जागृत होने के लाभ

इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति में निस्वार्थ प्यार करने की शक्ति का विकास होता है। वह दूसरों को बड़ी आसानी से क्षमा कर देता है। ऐसा व्यक्ति भावनात्मक रूप से संतुलित व्यक्ति बन जाता है जो कि सर्वप्रिया होता है।

अति सक्रिय:
इस चक्र के अति सक्रिय होने से व्यक्ति पर अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रहता है। वह प्यार में शर्त रखता है वह चीजों को पाने और उन पर हावी होने की इच्छा रखता है।

असामान्य रूप से सक्रिय:
ऐसा व्यक्ति प्यार और आनंद को अपने अंदर आने से रोक देता है। वह खुद से घृणा करने लगता है और खुद के प्रति अनुपयोगिता की भावनाओं को महसूस करता है।

चक्र को जागृत करने की विधि

इस चक्र को जागृत करने के लिए हृदय को संयम में रखकर ध्यान लगाने की आवश्यकता है। खासतौर पर रात को सोने से पहले ध्यान करना इस चक्कर को जागृत करने के लिए लाभकारी है।

 

5. विशुध्द चक्र – Vishuddha

Vishuddha

इस चक्र का मंत्र ‘हं’ है जो कि 16 पंखुड़ियों वाले फूल के रूप में दर्शाया जाता है। इस चक्र का रंग नीला होता है।

विशुध्द चक्र मानव शरीर का पांचवा चक्कर है जिसे कंठ चक्र भी कहा जाता है। मानव शरीर में यह चक्र कंठ में स्थित होता है। इस चक्कर का मुख्य उद्देश्य आत्मा से सत्य को व्यक्त करना है। यह रूह को मन से जोड़ने का कार्य करता है।

चक्र के जागृत होने के लाभ

इस चक्र के जागृत होते ही व्यक्ति को सोलह कलाओं का ज्ञान हो जाता है।

अति सक्रिय:
जिस व्यक्ति का यह चक्र अति सक्रिय होता है वह चिल्ला चिल्ला कर बात करता है और दूसरों की बात को कम सुनता है।

असामान्य रूप से सक्रिय:
ऐसा व्यक्ति बहुत ही डर डर कर बात करता है और साथ ही बात करते समय हकलाता भी है।

चक्र को जागृत करने की विधि

इस चक्र को जागृत करने के लिए गायन तथा अन्य कलात्मक गतिविधियों का प्रयास किया जाना चाहिए। यह चक्र कंठ में निवास करता है इसीलिए व्यक्ति को अपने अंदर की भावनाओं को पूरी शुद्धता से व्यक्त करना चाहिए।

 

6. अजना चक्र – Ajna

Ajna

इस चक्र का मंत्र ‘उ’ है जिसे दो पंखुड़ियों के रूप में दर्शाया जाता है। इस चक्र का रंग गहरा नीला होता है।

अंजना चक्र मानव शरीर का छेवा प्रमुख चक्कर है। इसे दृष्टि चक्र या आज्ञा चक्र भी कहा जाता है। यह चक्र दोनों आंखों के मध्यम भृकुटि में स्थित होता है जो आत्मा और परमात्मा के बीच की विभाजन रेखा है। इस चक्कर से अध्यात्मिक जागरूकता, आत्मचिंतन तथा स्पष्ट विचार की प्राप्ति होती है।

चक्र के जाग्रत होने के लाभ

इस चक्र के जागृत होते हैं मनुष्य के शरीर में सोई हुई सभी शक्तियां जाग पड़ती हैं और वह एक सिद्ध पुरुष बन जाता है। ऐसे व्यक्ति के ज्ञान की सीमा अपार होती है।

अति सक्रिय:
ऐसे में व्यक्ति की कल्पना शक्ति कम होती है और वह वास्तविकता से दूर रहता है।

असामान्य रूप से सक्रिय:
ऐसे व्यक्ति को समस्याओं से निकलने में परेशानी होती है। उनमें सहज ज्ञान का अभाव होने के कारण वह दूसरों के प्रति असंवेदनशील रहते हैं।

चक्र जागृत करने की विधि

इस चक्र को जागृत करने के लिए मन को शांत कर सकारात्मक विचारों के साथ ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

 

7. सहस्र चक्र – Sahaswara

Sahaswara

इस चक्र का मंत्र ‘ॐ’ है यह हजारों पंखुड़ियों वाले फूल के रूप में दर्शाया जाता है। इस चक्र का कोई विशेष रंग नहीं होता है यह एक शुद्ध प्रकाश है जिसमें बाकी के सभी रंग समा जाते हैं।

सहस्र चक्र मानव शरीर का सातवा चक्र है जोकि सिर के ऊपर शीर्ष स्थान पर मुकुट की तरह स्थित होता है। इसीलिए इसे मुकुट या शीर्ष चक्र भी कहते हैं यह चक्कर एक ब्रह्मरंध्र है जिसे भगवान का द्वार भी कहते हैं। सहस्र चक्र समस्त संसार की पूरी जागरूकता के साथ व्यक्ति की बुद्धि और परमात्मा के मिलान का प्रतिनिधित्व करता है।

चक्र के जाग्रत होने के लाभ

ऐसे व्यक्ति को आंतरिक शांति प्राप्त होती है वह ज्ञान के साथ एकजुट हो जाता है। सही मायने में यही मोक्ष की प्राप्ति है।

अति सक्रिय:
ऐसे व्यक्ति का अपने विचारों पर काबू नहीं रहता है। वह या तो अतीत में या फिर भविष्य में जीता है। ऐसा व्यक्ति अपने आवश्यक कर्तव्य को भुला देता है।

असामान्य रूप से सक्रिय:
ऐसे व्यक्ति की आंतरिक शांति भांग रहती है। उसके अंदर नकारात्मकता घर कर लेती है जिससे वह सदा निराश रहता है।

चक्र जागृत करने की विधि

इस चक्र को जागृत करने के लिए सर्वप्रथम मूलाधार चक्र को जागृत करना अनिवार्य है। क्योंकि मूलाधार से होते हुए ही सहस्र चक्र तक पहुंचा जा सकता है। ऐसा करने के लिए लगातार ध्यान करना अनिवार्य है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

saphala ekadashi

सफला एकादशी व्रत का महत्व कथा एवम पूजा विधि

saphala ekadashi

सफला एकादशी पर कैसे करें पूजन और कोन से काम इस दिन ना करें