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9 देवियों की कहानियाँ

9 DEVIYO KI KAHANIYA

हिन्दू धर्म में देवी दुर्गा की नौ रूपों में पूजा की जाती है। यह माना जाता है की श्रद्धालु अगर श्रद्धापूर्वक माता की अर्चना करते है तो उनको पापो और अधर्म से मुक्ति मिल जाती है। श्रद्धालु टोली बना कर इन तीर्थस्थानों पर जाते है और आध्यात्मिकता के समुन्दर में डुबकी लगाते है। देवी दुर्गा के नौ मुख्या स्थान है जिसमे से 7 हिमाचल प्रदेश, 1 जम्मू और 1 चंडीगढ़ में स्थित है।

1. वैष्णो देवी – Vaishno Devi :

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ये जम्मू के कटरा नामक स्थान पर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण करीबन 700 साल पहले पंडित श्रीधर द्वारा किया गया था। वह एक गरीब ब्रह्मण थे और माताके सच्चे भगत थे। उन्होंने माता वैष्णो देवी के नाम से भंडारे का आयोजन किया लेकिन उनके पास खाद्य सामग्री कम थी। अब उन्हें देवी माँ से उम्मीद थी तभी वहां वैष्णवी नाम की एक छोटी सी कन्या आयी और सबको भोजन परोसा और वह कन्या गायब हो गयी।कुछ समय पश्चात माता श्रीधर के सपने में आयी और उन्हें अपनी गुफा के बारे में बताया और चार बेटो के वरदान के साथ उसे आशीर्वाद दिया और अगले ही दिन श्रीधर माता की गुफा की खोज में निकल पड़ा। माता की गुफा मिलने के बाद श्रीधर ने अपनी पूरी ज़िन्दगी माता की सेवा में बिताने का फैसला किया और आज वो पवित्र स्थान माता वैष्णो देवी के नाम से जाना जाता है। जहा हर साल लाखो भगत माता के दर्शनों के लिए आते है।

2. मनसा देवी – Mansa Devi:

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माता मनसा देवी मंदिर हरियाणा के पंचकूला जिला में स्थित है। उस समय मुग़ल सम्राट अकबर का शासक था। वह वहां के किसानो से ऋण के नाम पर अनाज लेता था। एक वर्ष प्राकृतिक आपदा के कारण सारी फसल नष्ट हो गयी। जिससे वहां के किसान ऋण देने में असमर्थ रहे। यद्यपि बाशाह अकबर अच्छे शासक थे फिर भी उन्होंने ऋण माफ़ नहीं किया। और किसानो को जेल में डालने का हुकुम दे दिया। यह सुन कर माता के भगत गरीब दास को बहुत बुरा लगा उसने माता की पूजा अर्चना शुरू की ताकि वो उनके कष्टों को हर ले। माता ने प्रसन्न होकर उसकी इच्छा पूरी कर दी। किसानो का क़र्ज़ माफ़ हो गया तभी से देवी को मनसा देवी अर्थात इच्छा पूर्ण करने वाली के नाम से जाना जाता है।

3. ज्वाला देवी – Jwala Devi:

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सती के इक्यावन शक्ति पीठो में से एक है ज्वाला देवी। जो की हिमाचल की कांगड़ा घाटी में स्थित है। यहाँ पर माता की जीभ की पूजा ज्योति रूप की पूजा की जाती है। इसके इलावा आठ अन्य ज्योतिया भी जलती है। जिन्हे महाकाली, अन्नपूर्णा, विंध्यावासनी, माहालक्ष्मी, चंडी, सरस्वती, अम्बिका रूपों में पूजा की जाती है मंदिर का निर्माण माता के भगत भूमिचंद ने कराया था। सन 1835 में मंदिर का पुनः निर्माण राजा रणजीत सिंह और राजा संसारचंद ने करवाया था। मंदिर से थोड़ी से ऊपर गोरखनाद का मंदिर है जिन्होंर घोर तपस्या कर के माता से वरदान और आशीर्वाद प्रापत किया था। जिससे गोरख डिब्बी के नाम से जाना जाता है।

4. चिंतपूर्णी देवी – Chintpurni Devi:

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सती के 51 शक्तिपीठो में से एक है माता चिंतपूर्णी जो हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित है। मान्यता है के माता के दर्शंन मात्र से ही व्यक्ति चिंताओं से मुक्त हो जाता है। चिंतपूर्णी में माता के चरण गिरे थे इसलिए इन्हे छिन्मस्तिका देवी भी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंधो के अनुसार सभी मंदिर शिव और शक्ति से जुड़े हुए है। माता के मंदिर के चारो और शिव जी के मंदिर है।

5. चामुंडा देवी – Chamunda Devi:

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यह हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित है। दुर्गा सप्तशती में माँ चामुंडा की कथाओ को क्रमबद्ध किया गया है। एक बार चण्ड मुण्ड नाम के दो राक्षस देवी से युद्ध करने आए। देवी हिमालय पर्वत पर विराजमान थी। देवी को अस्त्रहिन् समझ आकर आक्रमण किया। देवी को क्रोध आया और उन्होंने काली का रूप धारण कर उनका वध किया। माता देवी की भृकुटि से उत्पन्न काली माता ने जब चण्ड मुण्ड के सिर देवी को उपहार स्वरुप दिए तो माता ने प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया के तुम संसार में चामुंडा के नाम से जानी जाओगी।

6. कांगड़ा देवी – Kangra Devi:

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कांगड़ा देवी जिन्हे बृजेश्वरी देवी के नाम से भी जाना जाता है। कांगड़ा शक्तिपीठ में माता के वक्ष की पूजा की जाती है। यहाँ माता सती का दाहिना वक्ष गिरा था। इस शक्तिपीठ में माँ की पांच बार आरती होती है। इस मंदिर की विशेषता tयह है की यहाँ हर धर्म का व्यक्ति शीश झुकाता। माता के मंदिर में तीन गुम्बद बने हुए है जो की तीन धर्मो का प्रतिक है। हिन्दू धर्म, मुस्लिम, और सिख।

7. त्रिलोकपुर देवी – Trilokpur Devi:

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जिन्हे माता बालासुंदरी भी कहा जाता है। बालासुंदरी माता को वैष्णो देवी का ‘बाल रूप’ भी कहाँ जाता है। माता यहाँ पर तीन रूपों में उपस्थित है। माता श्री ललिता देवी, माता श्री बालासुंदरी, और माता श्री त्रिभाविनि देवी। प्राचीन समय में लाला रामदास नाम का व्यक्ति पीपल के पेड़ की पूजा किया करता था और उसी के निचे बैठ कर नमक बेचा करता था। एक दिन उसने नमक बेच कर बहुत सारा पैसा कमाया लेकिन फिर भी नमक ख़त्म नहीं हुआ तो वो बड़ा आश्चर्यचकित हुआ। तभी उसी दिन रात्रि में माता रानी ने स्वपन में आकर नमक की बोरी में उपस्थित अपने पिंडी रूप के बारे में बताया और अपना मंदिर बनाने का आदेश दिया।

8. शाकुम्भरी देवी – Shakumbhari Devi:

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हिन्दू धर्म में शाकम्भरी देवी पार्वती का अवतार है। यह दिव्या माँ है। जिन्हे’ हरी सब्जियों’ का वाहक कहा जाता है। एक समय धरती पर बहुत सूखा पड़ा तब देवी पार्वती ने शकुम्भरी देवी का अवतार लिया और भगतो के कल्याण हेतु सभी भगतो को शाकाहारी भोजन दिया और उनकी समस्याओ का निवारण किया।

9. नैना देवी – Naina Devi :

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51 शक्तिपीठो में से एक शक्तिपीठ नैना देवी भी है जो हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है। इस स्थान पर देवी सती के नेत्र गिरे थे। मंदिर के गर्भ गृह में मुख्या तीन मुर्तिया है। दायी तरफ माता काली, मध्य में नैना देवी और बायीं और भगवान गणेश की प्रतिमा है। मंदिर के पास में ही एक गुफा है जिसे नैना देवी गुफा के नाम से जाना जाता है।

एक अन्य प्रचलित कहानी यह भी है के नैना देवी ने महिषासुर नाम के राक्षस का वध किया था। राक्षस को वरदान था के वह एक अविवाहित स्त्री से ही परास्त हो सकता ।है राक्षस का सामना करने के लिए सभी देवताओ ने एक देवी शक्ति को बनाया और उन्हें सभी अस्त्र शस्त्र प्रदान किये। महिषासुर राक्षस देवी की असीम सुंदरता से प्रसन्न हुआ और उसने शादी का प्रस्ताव रखा। देवी ने कहा अगर तुम मुझे युद्ध में हरा दोगे तो में तुमसे शादी कर लूँगी। देवी ने राक्षस को परास्त किया और उसकी दोनों आंखें निकाल ली।

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