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आदर्श जीवन जीने के क्या उद्देश्य है और कैसे जिया जाता है आदर्श जीवन

JIVAN JEENE KE UDDESHYA

मनुष्य जीवन में केवल सत्कर्म करके ही मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसके लिए मनुष्य को आदर्श जीवन जीना चाहिए। हिन्दू धर्म के अनुसार एक आदर्श जीवन जीने के लिए कुछ उद्देश्य जरुर अपनाने चाहिए। उन्ही उद्देश्यों के द्वारा मनुष्य एक सामान्य जीवन व्यतित करते हुए मोक्ष को प्राप्त कर सकता है और उसके लिए तपस्वी बनना भी आवश्यक है।

Purusharth

जीवन जीने के क्या उद्देश्य हैं?

वेदों के अनुसार, जीवन जीने के चार उद्देश्य हैं:

  1. धर्म
  2. अर्थ
  3. कर्म
  4. मोक्ष

1. धर्म: जीवन में सबसे पहले अपने धर्म के प्रति सजकता बनाये रखने की जरूरत होती है। धार्मिकता का अर्थ अपने समाज के प्रति कर्तव्य, परिवार के प्रति कर्तव्य, मानवता के प्रति कर्तव्य होता है। इसलिए, समाज के नियमों का सम्मान करते हुए और सही काम करते हुए धर्म का पालन करना चाहिए।

Dharam

2. अर्थ: जीवन में अर्थ उद्देश्य सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योकि जीवन में अर्थ मतलब केवल धन कमाने से नही होता और इसका यह मतलब भी बिल्कुल नहीं है कि केवल अपने स्वास्थ्य के प्रति अपना जीवन व्यतीत करे। एक सामान्य व्यक्ति के रूप में जीवन को खुशी से जीने के लिए, आपको धन की आवश्यकता होती है, लेकिन यह धन केवल ईमानदार तरीकों से प्राप्त किया जाना चाहिए। यदि धर्म और अर्थ के बीच टकराव होता है, तो धर्म को अर्थ से अधिक महत्व देना चाहिए।

Arth

3. कर्म: कर्म का अर्थ है खुशी, जो भी काम आप करे उसे पूरी मन से करना चाहिए। अगर आप आरामदायक जीवन जीना चाहते है तो अच्छे कर्म ही ऐसा करने में सहायक होते हैं। अच्छे कर्म का मतलब अच्छा कार्य नहीं होता, बल्कि इसका मतलब उन कार्यों से है, जो एक अच्छे संकल्प के साथ किए जाते हैं।

karm

यही वजह है कि हर जगह प्रेम के बारे में इतनी सारी बातें की गई हैं। प्रेम में आप अच्छे कर्म करेंगे। जब आप अच्छे कर्म करेंगे, तो आपका जीवन आरामदायक बन जाएगा, अच्छे कर्म बस इसीलिए उपयोगी हैं।

4. मोक्ष: मोक्ष का अर्थ है मोक्ष यानी जन्म और पुनर्जन्म के चक्र से आत्मा की मुक्ति। आज हम जो कुछ भी कर रहे हैं वह हमारे पिछले जीवन कर्म का परिणाम है और अगले जन्म में हम जो कुछ भी करेंगे वह वर्तमान जीवन में हम जो करते हैं उसका परिणाम होगा। हमारी आत्मा इस प्रकार जन्म और पुनर्जन्म के चक्र में फंस जाती है। इसलिए आत्मा को इस चक्र से मुक्त करने के लिए मोक्ष आवश्यक है। मोक्ष एक हिंदू के जीवन का अंतिम उद्देश्य है।

moksh

हिंदू धर्म के अनुसार जब एक व्यक्ति पूरी चेतनता के साथ आध्यात्मिक मार्ग पर चलता है, केवल तभी वह उन सभी बंधनों को तुरंत तोड़ कर आगे बढ़ सकता है। जीवन का अंतिम उद्देश्य मोक्ष प्राप्त करना ही होता है और मोक्ष प्राप्ति के बाद ही मनुष्य ईश्वर से जुड़ जाता है।

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