in

अध्यात्म क्या है | Adhyatam kya hai

Adhyatam kya hai 

अक्सर भगवान की पूजा पाठ करने को ही अध्यात्म मान लिया जाता है, लेकिन अध्यात्म (Adhyatam) का वास्तविक अर्थ है अपने भीतर के चेतन तत्व को जानना व मानना। इस चेतन तत्व का सीधा संबंध परमात्मा से है। गीता के अनुसार अपने स्वरूप अर्थार्थ जीवात्मा को ही अध्यात्म कहा गया है।

adhyatam
Image: fromthealphatotheomega.com

आत्मा को परमात्मा का अंश माना जाता है। आत्मा और परमात्मा के बीच के संबंध की खोज, संसार की रचना में उसकी भूमिका, मृत्यु के पश्चात् व जन्म से पहले अर्थार्थ जीवन-मरण के चक्र के बारे में जिज्ञासा, इन सभी चर्चाओं को लेकर आत्ममंथन करना ही आध्यात्मिक मार्ग है। जिसे अंग्रेजी में spirituality कहा जाता है इन सभी के आधार पर पौराणिक कथाएं, शास्त्र व सिद्धांत लिखे गए हैं

अध्यात्म की जीवन में आवश्यकता

यह तो स्पष्ट है कि आत्मा परमात्मा का अंश है। जब भी कभी हमारी आस्थाएं कमजोर पड़ने लगती हैं या हम आत्मा व परमात्मा के संबंध में अविश्वास करने लगते हैं तो धीरे-धीरे हमारा मन नकारात्मक विचारों से भरने लगता है। परिणाम स्वरुप मन में निराशा घर कर लेती है और जीवन में आनंद प्राप्ति के लिए संसारिक बंधनों पर निर्भर होना पड़ता है।

क्षणिक वस्तुओं व संबंधों को अपना मान कर हम उन पर अपना अधिकार समझने लगते हैं। जिससे हमें क्षण भर के लिए आनंद की प्राप्ति होती है। इसी के चलते मनुष्य सांसारिक वासनाओं की प्राप्ति हेतु कार्यशील हो जाता है और वह अत्याचार, भ्रष्टाचार, धोखा लूट-खसोट यहां तक की बलात्कार जैसे घिनौने अपराधों को भी अंजाम देने लगता है।

यह भी पढ़े: purushottam maas ka mahatva

 

लेकिन जब तक सत्य की अनुभूति होती है जीवन का अंतिम पड़ाव आ जाता है और सिर्फ और सिर्फ पश्चाताप ही हाथ लगता है। क्या हो यदि हमें पूरी स्थिति का ज्ञान पहले से ही हो जाए? यह कहना गलत नहीं होगा कि हम अपने जीवन में पूर्ण आनंद प्राप्ति के लिए संवय अधिकारी बन जाएंगे और जीवन सफल हो जाएगा।

nature
Image: vignette.wikia.nocookie.net

यदि हम क्षणिक वस्तुओं को छोड़कर प्रकृति की तरफ देखेंगे तो हमें इसकी सुंदरता का सही अनुभव होगा। यहां पर कितनी तरह के पशु-पक्षी पेड़-पौधे जलप्रपात के दृश्य हमारे मन को आनंद से भर देते हैं। प्रकृति ने हमें जीवन के लिए जरूरी लगभग सभी तत्व बड़ी ही सरलता से उपलब्ध कराएं हैं।

लेकिन मनुष्य इनके साथ भी खिलवाड़ कर बड़ी-बड़ी समस्याएं जैसे प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, एसिड रेन आदि को जन्म दे रहा है। बात तो अजीब है लेकिन सत्य है आधुनिक मनुष्य केवल सुख व सुविधाएं जुटाने में ही लगा है। नैतिकता व विश्व कल्याण जैसी भावनाएं सीधा संबंध आध्यात्मिकता से रखती हैं। जो कि आज के मनुष्य में कहीं नजर नहीं आती।

ऐसे में स्वयं से यह प्रश्न करना कि ‘मैं कौन हूं’ बहुत जरूरी हो जाता है। क्योंकि यहीं से अध्यात्म के मार्ग की शुरुआत होती है। जब मनुष्य जीवन में अध्यात्म के मार्ग को अपना लेता है तभी सही मायने में उसके जीवन का आरंभ होता है।

स्वस्थ जीवन के लिए अध्यात्म की आवश्यकता

Yoga and meditation

आत्मा और शारीरिक स्वास्थ्य एक दूसरे से संबंधित है। अध्यात्म के माध्यम से मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य के बीच में अच्छा संबंध स्थापित किया जा सकता है। यह हमें मन की शक्ति प्रदान करता है कहा जाता है कि जो लोग मानसिक रूप से स्वस्थ होते हैं वह बड़ी से बड़ी बीमारी पर भी विजय प्राप्त कर लेते हैं।

ध्यान लगाना या मेडिटेशन करना मनुष्य को अपने मन पर काबू करना सिखाता है। जिसके चलते मस्तिष्क नकारात्मक विचारों से दूर रहता है और तनाव व डिप्रेशन जैसी बीमारियां नहीं होती इससे जीवन आयु भी बढ़ती है।

“कुछ शब्दों में अध्यात्म की व्याख्या कर पाना संभव नहीं है समय-समय पर हम इस पर चर्चा करते रहेंगे”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shravana Putrada Ekadashi

संतान प्रप्ति वाला श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत (Shravana Putrada Ekadashi) – Adhyatam

Santoshi Mata

Shri Santoshi Mata Chalisa in Hindi | माता संतोषी चालीसा – Adhyatam