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अध्यात्म से जीवन में आनंद और शांति कैसे पाई जा सकती है

ADHYATAM SE JIVAN MEIN ANAND AUR SHANTI KAISE PAAYE

अध्यात्म ही एक मात्र ऐसा मार्ग है जिसकी सहायता से कोई भी मनुष्य अपने जीवन को प्रेम, शांति और खुशियों से भर सकता है। एक सम्पूर्ण और संतुलित जीवन जीने के लिए अध्यात्म के मार्ग को अपनाना ही जीवन जीने का एक सार्वभौमिक तरीका है। आज प्रत्येक मनुष्य केवल अपनी भौतिक जरूरतों को पूरा करने में लगा रहता है और इसकी वजह से वह जीवन के अंतरिम सुख और शांति से दूर होता जा रहा है। परन्तु भौतिक जरूरतों को पूरा करने के साथ साथ हमे अध्यात्म के क्षेत्र में भी तरक्की करने की जरूरत है। इसी की वजह से हम अपने जीवन में आनंद और शांति ला पायेंगे।

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हम सभी को इस मृतुलोक पर एक समान जीवन जीने का मोका मिलता है और हम सबके पास सामान अवसर है कि हम अपने जीवन के उद्देश्य की खोज कर सके और इसके अर्थ को समझने की कोशिश करें। इस मृतुलोक पर सदियों से साधू और संत, जीवन और मृत्यु के रहस्य की खोज करते रहे हैं और अंत में यह निष्कर्ष निकाला है कि हम इस रहस्य को आध्यात्मिक स्तर पर ही जाना जा सकता हैं।

अध्यात्मिक ज्ञान का अनुभव करने के लिए बुद्धि और मन से परे होकर आत्मा को शुद्ध करना होता हैं और यह सब हमें रहस्यमय लगता है। यही कारण है कि अध्यात्म को रहस्यवाद भी कहा जाता है। अध्यात्म हमारे जीवन में प्रेम, शांति और विवेक को शक्ति प्रदान करता है। अध्यात्म हमारे आंतरिक जीवन को समृद्ध बनाने के साथ-साथ, हमारे आपसी संबंधों को भी बेहतर बनाता है।

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मनुष्य जीवन को समझने के लिए यह कुछ मूल प्रश्न हैं

  • इस संसार में आने से पहले हमारी आत्मा कहां थी ?
  • यहां से जाने के बाद यह कहां जाएगी ?
  • इस संसार का और इस जीवन का उद्देश्य क्या है ?

इन सभी प्रश्नों का हल साधू संतों के द्वारा बताया गया है। साधू संत के अनुसार हमारे जीवन का उद्देश्य अपनी आत्मा का मिलाप परमात्मा से करना है और इस उद्देश्य को पाने के लिए और प्रभु से मिलाप के लिए प्राचीन युग में अनेक विधियां सिखाई जाती रही हैं। लेकिन आज के युग में हमें एक ऐसा तरीका चाहिए जो आधुनिक जीवन की जरूरतों के के साथ अपनाया जा सके अध्यात्म का यह रूप हमें अपने जीवन और दुनिया के अन्य लोगों के जीवन को सुधारने के बहुत से  अवसर प्रदान करता है।

आत्मा की यात्रा की शुरूआत प्रभु की दिव्य ज्योति अर्थात हमारे मन की चेतन शक्ति से है और इसी के द्वारा हम उस परमात्मा का दर्शन कर सकते है और अपने जीवन को सम्पूर्ण बना सकते है। इसका संबंध सीधे हमारी तीसरी आंख अथवा शिवनेत्र से होता है। यह शरीर में स्थित आत्मा से हमारा सीधे संबध बनाती है यदि हम अपने ध्यान को इस बिंदु पर एकाग्र करें तो हम दिव्य मंडलों में उड़ान भर सकते हैं। यह धारा अंततः हमें हमारे स्रोत, प्रभु तक वापस ले जाएगी।

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