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आदि शक्ति – जो है ब्रह्मांड की ऊर्जा

Adi Shakti – Brahmand Ki Urja

आदि शक्ति जिन्हे शक्ति के रूप में पूजा जाता है। संसार के हर प्राणी के अंदर निवास करती है अब चाहे वो पुरुष हो या स्त्री। वह परम आलोकिक दिव्य शक्ति है। प्रलेय के समय मे ये समस्त संसार आदि शक्ति मे ही समा जाता है और फिर देवी शक्ति ही नई सृष्टि की रचना करती है। देवी ब्रम्‍हा, विष्णु और रुद्र की जननी है ,भ्रमांड के अनेको सुर्यो का तेज देवी शक्ति ही है। संसार के हर मनुष्य की कुण्डलिनी शक्ति में देवी शक्ति है। इस जगत मे देवी अनेको नामो और अनेको रूपो से पूजी जाती है।

आदि पराशक्ति का अर्थ है “अनंत असीम शक्ति”

Adi-Shakti

शक्तिवाद के अनुसार, आदि पराशक्ति शुद्ध अनन्त चेतना के रूप में दिखाई देती है। जो तब खुद को प्रकृति के रूप में व्यक्त करती है। इसलिए आदि पराशक्ति परम प्रकृति है।

देवी आदि शक्ति को सगुन सरुप में त्रिपुर सुंदरी के नाम से भी जाता है। यही ललिता त्रिपुर सुंदरी देवी का सबसे वास्तविक भौतिक रूप है। जिसमें तीन गुण हैं – सत्व, रज और तम। हालांकि, देवी आदि शक्ति को सर्वोच्च आत्मा माना जाता है और इसलिए वह अन्य सभी देवी का स्रोत है। वह सर्वोच्च है और शक्तिवाद में “पूर्ण सत्य” के रूप में जानी जाती है।

आदि शक्ति की उत्पत्ति

Devi-Shakti

ऐसा कहा जाता है कि जब कुछ भी नहीं था, अचानक से एक प्रकाश उभरा और उस प्रकाश ने आदि शक्ति का रूप लिया। उसकी तीन आंखें थीं और हाथो में त्रिशूल, कवच, गदा, धनुष, तीर, चक्र, तलवार और एक हाथ अभय मुद्रा के रूप में था। उन्होंने अपने यहाँ और वहां देखा लेकिन उन्हें कुछ भी नहीं दिखा। कुछ भी नहीं देखने के बाद उन्होंने कुष्मांडा का रूप लिया। वह शेरनी पर बैठी थी। जब उन्होंने अपनी बायीं आंख खोली तो महाकाली का जन्म हुआ। जब उन्होंने अपनी दाहिनी आंख खोली तो महालक्ष्मी का जन्म हुआ। और जब उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोली तो महासरस्वती का जन्म हुआ। अपनी आंखें खोलने से पहले उन्होंने थोड़ा सा मुस्कुराया जिससे समस्त ब्रह्माण्ड की उत्पति हुई।

ऊर्जा का विज्ञान

ऊर्जा मूल इकाई है जो सभी का आधार है, क्योंकि ऊर्जा को आधार की आवश्यकता नहीं होती है। ब्रह्मांड के विनाश के बाद भी ऊर्जा मौजूद रहती है। विज्ञान में इसे dark energy का नाम दिया गया है। यह ऊर्जा विनाश के लिए जिम्मेदार होती है और Vacuum Energy ब्रह्मांड के निर्माण के लिए जिम्मेदार होती है। एक ऐसी ऊर्जा भी है जो विनाश के बाद और सृष्टि के निर्माण से पहले मौजूद रहती है उसे Zero Energy या Sacred Energy कहा जाता है। भागवत पुराण और चार वेदों जैसे शास्त्र देवी काली को dark energy के रूप में मानते हैं जो समय के साथ पूर्ण ब्रह्मांड को भंग कर देती हैं। ललिता ब्रह्मांड को पुनः जन्म देती है। और आदि शक्ति स्वयं शून्य ऊर्जा है जो ब्रह्मांड के विनाश के बाद और इसके निर्माण से पहले भी मौजूद है।

आदि शक्ति का महत्व

आदि-शक्ति: मां दुर्गा की पूजा निर्गुण और सगुण सभी रूपो में की जाती है। वह सभी को अज्ञानता, बुराई और राक्षसी आत्माओं से मुक्त देती है। वह महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, सभी कृत्यों के पीछे की जीवन शक्ति है। देवता और पुरुष उसे चेतना, बुद्धि, नींद, भूख, आश्रय, बल, प्यास, धैर्य, समुदाय, विनम्रता, संतुष्टि, सम्मान, धन, पेशे, स्मृति, दयालुता, मां, संतुष्टि इत्यादि के रूप में पूजा करते हैं। वह हर जीवित प्राणी में वास करती है।

maa-shakti

आदि-शक्ति भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव के पुरुष रूपों में उनकी सक्रिय शक्ति के रूप में प्रकट होती है। तंत्र के अनुसार, वह कारक बल है जो ब्रह्मांड से निकलता है। पुरुष और प्रकृति या शिव और शक्ति के मिलन से सृष्टि का निर्माण होता है। रचनात्मक शक्ति की जड़ में हमें आदि-शक्ति मिलती है: जोकि सार्वभौमिक मां दुर्गा देवी है। शोध विद्वान इस बात से सहमत हैं कि ऊर्जा सृजन का मूल कारक है। परमाणु को विभाजित करके, आधुनिक वैज्ञानिकों ने एक शक्ति को दो मिनट में पूरी दुनिया को नष्ट करने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली बनाया है। यदि यूरेनियम के परमाणु के भीतर ऐसी विशाल शक्ति मौजूद है, तो सोचें कि एक मनुष्य के भीतर ऊर्जा का कितना बड़ा असीमित भंडार छिपा होगा, जोकि प्रकृति की सबसे विकसित रचना। अगर हमें हमारी छिपी क्षमता को जानना है, तो हमें पहले अपने शरीर और दिमाग को शुद्ध करना होगा और फिर इस गुप्त शक्ति को सक्रिय करना होगा।

अपने आप को जानने के लिए, अपनी कुंडलिनी-शक्ति, आदि-शक्ति को प्राप्त करें। अपनी आत्मा के उद्धार के लिए अपनी ऊर्जा का समाधान करें।

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