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अक्षय तृतीया का महत्व शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

AKSHAY TRITIYA MEHTAV POOJA VIDHI OR SHUBH MUHRAT

वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि बहुत ही शुभकारी और सौभाग्यशाली मानी जाती है। वैशाख महीने की शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया या आखा तीज के नाम से जानते है। अक्षय का अर्थ है – जिसका कभी क्षय या नाश न हो। अक्षय तृतीया के दिन जो भी दान, कर्म आदि किया जाता है उन सबका फल अनन्त होता है। इसलिए इसका नाम अक्षय तृतीया रखा गया है।

तिथि दिन शुभ मुहूर्त
7 मई 2019 मंगलवार 05 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 17 मिनट तक

अक्षय तृतीया के दिन किसी भी शुभ कार्य को बिना सोचे समझे कर सकते हैं। इस वर्ष अक्षय तृतीया के दिन सूर्य, शुक्र, चंद्र और राहु ग्रहों का विशेष संयोग भी बन रहा है और यह सभी के लिए बहुत ही फायदेमंद हो सकता है। अक्षय तृतीया को भगवान परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम के साथ साथ भगवान विष्णु के नर और नारायण अवतार के भी इसी दिन होने की मान्यता है।

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अक्षय तृतीया का महत्व

अक्षय तृतीया को सबसे शुभ माना जाता है क्योकि इस दिन किसी भी शुभ कार्य को किया जा सकता है। इस दिन गंगा स्नान करने से मनुष्य सारे पापों से मुक्त हो जाता है। इस दिन किसी तीर्थ स्थान पर अपने पितरों के नाम से श्राद्ध व तर्पण करना बहुत शुभ होता है इस दिन भगवान परशुराम व हयग्रीव अवतार का जन्म भी हुआ था और त्रेतायुग का प्रांरभ भी इसी तिथि को हुआ था। सबसे विशेष बात यह भी है की इसी दिन श्री बद्रीनाथ जी के कपाट भी खुलते हैं।

Akshay tritiya

अक्षय तृतीया कथा

एक बार युधिष्ठिर जी के पूछने पर भगवान श्री कृष्ण ने उनको बताया कि अक्षय तृतीया तिथि परम पुण्यमयी तिथि है। इस दिन दोपहर से पूर्व स्नान, जप, तप, होम (यज्ञ), स्वाध्याय, पितृ-तर्पण, और दानादि करने वाला व्यक्ति अक्षय पुण्यफल का भागी होता है।

अक्षय तृतीया की कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक गरीब वैश्य रहता था जो देवताओं में श्रद्धा रखता था। वह गरीब होने के कारण बड़ा व्याकुल रहता था। उसे किसी ने अक्षय तृतीया व्रत के बारे में बताया। उसने इस पर्व के आने पर गंगा में स्नान कर विधिपूर्वक देवी-देवताओं की पूजा की व दान दिया और इसी व्रत के प्रभाव से वह वैश्य अगले जन्म में कुशावती का राजा बना और पूजा व दान के प्रभाव से वह बहुत धनी तथा प्रतापी बना।

अक्षय तृतीया व्रत व पूजन विधि

अक्षय तृतीया के दिन व्रत करने वाले मनुष्य को सुबह स्नानादि से शुद्ध होकर पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। अपने घर के मंदिर में विष्णु जी को गंगाजल से शुद्ध करके तुलसी, पीले फूलों की माला या पीले पुष्प अर्पित करें। फिर धूप, दीप आदि से पीले आसन पर बैठकर विष्णु जी का ध्यान करते हुए विष्णु सहस्त्रनाम और विष्णु चालीसा पढ़ने के बाद अंत में विष्णु जी की आरती पढ़ें। साथ ही इस दिन विष्णु जी के नाम से गरीबों को खिलाना या दान देना अत्यंत पुण्य-फलदायी होता है।

यदि किसी कारणवश पूर्ण व्रत रखना संभव न हो तो व्रत में पीला मीठा हलवा, केला या पीले मीठे चावल बनाकर खा सकते हैं।

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