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अर्जुन महाभारत का मुख्य किरदार क्यों है?

Arjun Mahabharat Ka Sabse Mukhy Kirdar Kyu Tha

अर्जुन महाभारत का मुख्य किरदार क्यों है? जबकि भीम ने अकेले ही 100 कोरवो को मार गिराया था

महानतम महाकाव्य में से एक महाभारत को विश्व साहित्य में सबसे बड़े महाकाव्य में से एक होने का सम्मान प्राप्त है। महाभारत (Mahabharat) नाम का अर्थ है “भारत की कहानी”। भरत पांडवों और कौरवों के प्रारंभिक पूर्वज थे।

हस्तीनापुर के सिंहासन के लिए राजवंश उत्तराधिकार के संघर्ष के कारण चचेरे भाई, कौरवों और पांडवों के दो समूहों के बीच संघर्ष हुआ। कुरुक्षेत्र में हुई लड़ाई में कई प्राचीन साम्राज्यों ने प्रतिद्वंद्वी समूहों के सहयोगियों के रूप में भाग लिया, यह स्थान आज हरियाणा राज्य नाम से प्रसिद्ध है।

Mahabharata
संक्षेप में, यह पांच भाइयों की कहानी है जो एक विशाल साम्राज्य पर शासन करने के लिए नियत थे। हालांकि, सभी पांच पांडव भाई कुशल थे और उन्होंने युद्ध में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भीम ने अकेले ही सभी 100 कौरवों को मार डाला था, फिर भी वह अर्जुन था जिसे मुख्य चरित्र के रूप में चित्रित किया गया है।

अर्जुन देवताओ के राजा देवराज इंद्र की कृपा से पैदा हुआ था। इंद्र देव का वर्णन महाभारत की कई महत्वपूर्ण घटनाओं के केंद्र में है। अर्जुन रचनात्मक कला का एक महानतम छात्र था, उनके गुरु, द्रोणाचार्य ने उसे वह सब कुछ सिखाया जो वह सीखा सकते थे और एक “महावीर योद्धा” बनाया।

वह तीरंदाजी में विशेष रूप से कुशल था, जिसमें उसकी अधिकांश कुशलता का कारण अंधेरे में अभ्यास करने की आदत थी। द्रोणाचार्य के सबसे अच्छे छात्र के रूप में, अर्जुन को ब्रह्मशिरा अस्त्र के उपयोग का ज्ञान प्राप्त हुआ, जो पुरे विश्व को विनाश कर सकने वाला एक बेहद शक्तिशाली हथियार था।

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अर्जुन गुरु द्रोणा का सबसे काबिल और सबसे सफल छात्र था। कोई अन्य छात्र उसकी कुशलता के करीब भी नहीं था। यहाँ तक की छात्र के रूप में द्रोणा का पुत्र अश्वत्थामा भी उनके इतना करीब नहीं था।

हमने ऐसी कई कहानियां सुनी हैं, की कैसे बाल्यावस्था में जब गुर द्रोणाचार्य ने वृक्ष पर बैठे पक्षी की आंख पर निशाना साधने को कहा, तब अन्य छात्रों के विपरीत केवल अर्जुन ही था जिसे सिर्फ और सिर्फ पक्षी की आंख नजर आ रही थी। यह दर्शाता है की कैसे अर्जुन अपने उद्देश्य के प्रति समर्पित था।

 

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जो उसे भीम या किसी अन्य पांडव से बेहतर तरीके से चित्रित करता है। जब गुरु द्रोणा ने अपने छात्रों से द्रुपद को अपने गुरु-दक्षिणा के रूप में पकड़ने के लिए कहा, अर्जुन ने खुद द्रुपद को बंदी बनाया। द्रुपद अर्जुन से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अर्जुन को अपनी बेटी से शादी करने की कामना की।

जब द्रौप्पी के स्वयंवर में मछली की आंख में कोई भी निशाना नहीं लगा सका था तो यह केवल अर्जुन था जो यह कार्य को पूरा करने में सक्षम था। इसके इलावा, अग्नि देव ने अर्जुन को अपना प्रसिद्ध धनुष “गांडीव” उपहार में दिया था, जिसके बल पर अर्जुन ने कोरवो की विशाल सेना पर विजय प्राप्त की थी।

इसके इलावा अर्जुन को चार घोड़ों वाला रथ भी प्राप्त था। जिसपर एक झंडा साक्षात संकटमोचन हनुमान जी के होने का प्रतीक था।

एक दिन गलती से, अर्जुन ने युधिष्ठिर और द्रौपदी की निजता का उल्लंघन किया। जिसके लिए अर्जुन को अपना पाप धोने के लिए तीर्थ यात्रा पर जाने की सजा दी गई थी। वहां अर्जुन ने शक्तिशाली साम्राज्यों की राजकुमारी से शादी की और इस प्रकार अप्रत्यक्ष रूप से आने वाले युद्ध के लिए पांडव सेना का विस्तार किया।

सुभद्रा के साथ अर्जुन का विवाह महाभारत का मुख्य मोड़ था। जहां यादव और पांडव आधिकारिक तौर पर एक साथ बंधे थे। इसके अलावा, वनवास के दौरान अर्जुन ने अपने पिता इंद्र से पाशुपतास्त्र और कई अलग-अलग हथियार प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की पूजा की।

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पुरे युद्ध के दौरान बहुत से महत्वपूर्ण मोड़ आए, अर्जुन उनमें से ज्यादातर के लिए जिम्मेदार था। जैसे कि भीष्म का पतन, जो युद्ध का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ था। त्रिगर्त की हत्या, जो युधिष्ठिर को पकड़ने के लिए द्रोणा की योजना में विफल रही।

जयद्रथ का वध और सबसे महत्वपूर्ण बात कर्ण की मृत्यु, अर्जुन का सबसे बड़ा सक्षम प्रतिद्वंद्वी और जीत में अंतिम बाधा था। इसके अलावा, विराट युध में जहां अर्जुन ने अकेले ही पूरे कुरु सेना को हराया ताकि शहर को घेराबंदी से बचाया जा सके।

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सबसे बड़ी बात जो अर्जुन को सबसे अलग करती है, वह भगवान कृष्ण का पुरे युद्ध में उसके साथ होना। वह एकमात्र ऐसा व्यक्ति था जिसने भगवान कृष्ण के दिव्य विराट रूप के युद्ध के मैदान में दर्शन किये थे। अर्जुन एक महान व्यक्तित का स्वामी था। उसने भगवद् गीता में भगवान कृष्ण के साथ हो रहे वार्तालाप में पूरी मानवता का परिचय दिया था।

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Image: askromapadaswami.com

जाहिर है, अर्जुन महाभारत की महत्वपूर्ण घटनाओं के केंद्र में था जिसने पूरी कहानी को आकार दिया। निश्चित रूप से, भीम एक महान योद्धा था और सबसे महत्वपूर्ण प्रतिद्वंद्वी दुर्योधन के साथ सैकड़ों कौरव भाइयों के वध के लिए जिम्मेदार था।

तो भी वह अर्जुन था, जिसने अपने समर्पण, पूर्णता और कौशल के बल पर सभी को पीछे छोड़ दिया था। फिर भी, उसका सर्वश्रेष्ठ होना स्पष्ट था, क्योंकि भगवान स्वयं ही उसके पक्ष में थे।

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