in ,

भगवद गीता पर आधारित मनुष्य के लिए दिशा-निर्देश

Bhagavad Gita Disha Nardesh

भगवद् गीता, हिंदू धर्म में एक 700 काव्य ग्रंथ है। इसके शाब्दिक अनुवाद में भगवान् का मानव को सन्देश है और हिंदू महाकाव्य महाभारत का हिस्सा है। गीता अर्जुन और उनके सारथी भगवान श्रीकृष्ण के बीच एक संवाद की कथात्मक रूपरेखा है।

krishna_arjuna_mahabharata
Image: askromapadaswami.com

गीता कुरुक्षेत्र युद्ध की शुरुआत से पहले शुरू होती है, जहां पांडव राजकुमार अर्जुन युद्ध के मैदान पर संदेह से भर जाता हैं कि उनके दुश्मन उनके अपने रिश्तेदार, प्यारे दोस्त और श्रद्धेय शिक्षक हैं। पांडवों और कौरवों के बीच धर्म युद्ध लड़ने के लिए एक योद्धा के रूप में कर्तव्य का सामना करते हुए अपने क्षत्रिय कर्तव्य को पूरा करने और धर्म की स्थापना के लिए श्रीकृष्ण द्वारा परामर्श दिया जाता है। गीता का उपदेश मोक्ष की प्राप्ति और किसी भी उम्र में जीवन में सफलता प्राप्त करने के तरीकों से संबंधित दृष्टिकोण को बदलने के बीच एक संवाद है।

हमने यहां भगवद गीता के आधार पर सफलता के लिए 10 सबसे दिलचस्प दिशानिर्देश एकत्र किए हैं

1 हमारा कर्तव्य हमारा दायित्व ही हमारा धर्म है

युद्ध के मैदान में श्रीकृष्ण अर्जुन को योद्धा के रूप में अपने कर्तव्य को पूरा करने की सलाह देते हैं और धर्म के सिद्धांतों को स्थापित करते हैं। जैसा कि श्रीकृष्ण कहते हैं, ” मैदान में खड़े रहकर स्थिति के लिए लड़ना तुम्हारा सबसे पहला कर्तव्य है। एक योद्धा को किसी भी हाल में हार मानना नहीं चाहिए और उसे आत्म-संरक्षण के लिए उन सभी आवेगो का विरोध करना चाहिए जो उसके मन को युद्ध करने से रोकते है। ”

2 सब कुछ केवल अच्छे के लिए होता है

“जो भी हुआ, अच्छे के लिए हुआ। जो भी हो रहा है, अच्छे के लिए हो रहा है। जो भी होगा, अच्छे के लिए ही होगा।” गीता का यह श्लोक हार को भी जीत में बदलने की शक्ति रखता है जब जीवन जिस तरह से हम इसे चाहते हैं, उस हिसाब से नहीं चलता है, जब दुख समाप्त नहीं होते हैं और ऐसा लगता है की भाग्य कही सो रहा है तो इसका सीधा मतलब है कि feहर असफलता पीछे, भगवान श्रीकृष्ण तुम्हारे लिए कुछ बड़ा मुकाम तैयार कर रहे है।

3 शरीर हमारी आत्मा के लिए वस्त्र के सामान है

आत्मा का कोई स्थायी अंत नहीं हो सकता, यह अमर है। भौतिक रूप की समाप्ति, मृत्यु, यह संसार की प्राकृतिक प्रक्रिया या पुनर्जन्म का सिर्फ एक और कदम है। “जैसा कि एक आदमी अपने पहने हुए कपड़ों को उतारता है और दूसरे नए कपड़े पहनता है, वैसे ही मूर्त आत्मा अपने घिसे-पिटे शरीर से बाहर निकलती है और दूसरे नए वस्त्र रूपी शरीर में प्रवेश करती है।”

4 मृत्यु एक अवसर है पूर्णता का

मृत्यु कोई बड़ी विपत्ति नहीं है। जैसा कि गीता में उल्लेख किया गया है, “निश्चित रूप से जन्म लेने वाले सभी प्राणियों की मृत्यु निश्चित है। यह एक आध्यात्मिक अवसर है, वह रास्ता है जो सर्वोच्च प्रभु के साथ परिपूर्णता की ओर जाता है। इस लिए इस मामले में किसी को भी दुखी होने की अव्सय्कता नहीं है। ”

यह भी पढ़े- रुक्मिणी की जगह राधा के साथ भगवान कृष्ण की पूजा क्यों की जाती है?

5 परिवर्तन अनिवार्य है

इस ब्रह्मांड में सब कुछ खुद को बदलने की अपेक्षा करता है, परिवर्तन ब्रह्मांड का सार्वभौमिक कानून है। हमारे जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है, गीता आपको परिवर्तन को स्वीकारने के लिए कहती है। धन और सभी भौतिक संपत्ति खत्म हो जाएंगी, रिश्ते टूट जाएंगे और आप बिखर जाएंगे, फिर भी आपको यह सब स्वीकार करना पड़ेगा। एक नई शुरुआत करनी ही होगी, यह बदलाव का नियम है।

6 जीवन में संतुलन का सार

जीवन में संतुलन अनिवार्य है। यहां तक ​​कि उत्सुकता के सबसे हर्षित क्षणों में भी यह अनिवार्य है। दुःख-सुख लाभ-हानि गुजरते समय के साथ सब धुंधले हो जाते है। आप केवल किसी से प्यार नहीं कर सकते या किसी से नफरत नहीं कर सकते हैं, दोनों साथ आते हैं, वे सिक्के के दो पहलू हैं और आपको कभी नहीं पता होता है कि कौन सा पहलु कब सामने आजाए।

7 बुरा समय हमें सर्वश्रेष्ठ बनाता है

मन और आत्मा सतत विकास की प्रक्रिया में हैं। आपका सबसे कठिन समय आपको बुरी तरह से तोड़ कर रख देगा, लेकिन यह वह समय है जो आपको अपने जीवन के सबसे मूल्यवान सबक सिखाएगा। जीवन में हर समय खुशियों की उम्मीद न करें। फिर कठिन समय भी कठिन नहीं लगेगा।

8 समर्पण

श्रीकृष्ण ने कहा है कि कर्म में विश्वास करो और अपने प्रत्येक कार्य को सर्वोच्च भगवान को समर्पित करो। जीवन की सारी उत्पत्ति स्वयं भगवान से हुई है और अंतिम लक्ष्य भी स्वयं भगवान ही हैं।

9 बिना किसी अपेक्षा के कर्म

अपनी पूरी निष्ठां के साथ कर्म करे लेकिन कभी उसके फल की चिंता न करे। अपने कर्म में विश्वास रखे। यदि आप फल की चिंता करते रहेंगे तो ईमानदारी से कर्म नहीं कर पाएंगे और नतीजन सफलता से दूर होते जायेंगे।

यह भी पढ़े – 15 प्राचीन ऐसी हिंदू भविष्यवाणियां जो सच हो चुकी हैं

10 विश्वास की शक्ति

“एक आदमी अपनी धारणा से बना है। जैसा कि वह मानता है वह वैसा बन जाता है। ”यदि आप मानते हैं कि आप जीत सकते हैं, तो आप पहले से ही इसका अधिकांश भाग जीत चुके हैं। इसी लिए इंसान को सव्य के लिए सदैव अच्छा सोचना चाहिए। मनो की आप खुश रह सकते हो, आप भी सफल हो सकते हो, आप वो सब कुछ कर सकते हो जो की आप सोच सकते हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Rudraksha Mala

रुद्राक्ष को कब धारण करना चाहिए और कोन सा रुद्राक्ष किसका स्वरूप है

shiv ratri

शिवरात्रि पर सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए ऐसे करें पूजा और व्रत