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भगवान से प्रेम पाना चाहते है तो अपने जीवन से प्रेम करें

JIVAN SE PREM KA ARTH HAI BHAGVAN SE PREM

जिसको जीवन से सच्चा प्रेम होता है। वह भगवान से उतने ही करीब होता है। प्रत्येक मनुष्य को इस जीवन रूपी सागर को प्रेम रूपी नाव के सहारे प्रसन्ता के साथ पार करना चाहिए। भगवान ने भी सभी मनुष्यों को जीवन में केवल प्रेम से जीवन जीने का मार्ग बतलाया है और दिखाया भी है। प्रेम से जीवन जीने के लिए कुछ नियमों को अपने जीवन में अपनाने की जरुरत है। वो नियम कुछ इस प्रकार है

jeevan se prem

साकारात्मक सम्रण शक्ति

मनुष्य को अपनी सम्रण शक्ति को हमेशा साकारात्मक बनाये रखना चाहिये क्योकि एक सकारात्मक सम्रण शक्ति वाला मनुष्य ही अच्छे विचारों से अपने आप को और दुसरे मनुष्यों को सही मार्ग प्रदान कर सकता है। साकारात्मक सोच से इस संसार में सब कुछ संभव हो सकता है।

साकारात्मक सम्रण शक्ति

दया भाव एवं करुणा भाव

प्रत्येक मनुष्य को अपने अंदर दया एवं करुणा के भाव को बढ़ाते रहना चाहिए क्योकि जितना व्यक्ति दयालु होगा उतने ही मनुष्यों के जुड़ने में सफल हो पायेगा और दूसरों की सहायता कर पायेगा। दयालु व्यक्ति पर भगवान भी अपनी दृष्टि सदेव बनाये रखते है और जिस प्रकार दयालु व्यक्ति दूसरों के दुःख को अपना मान कर उसकी मदद के लिए आगे आता है। उसी तरह ईश्वर भी ऐसे मनुष्यों की सहायता के लिए स्वमं मदद करते है।

दया भाव एवं करुणा भाव

प्रेम रूपी भक्ति

जीवन को सही मार्ग पर चलाये रखने के लिए प्रेम रूपी भक्ति का होना भी अति आवश्यक है। भक्ति का अर्थ यह नही के आप पुरे दिन भगवान की आराधना करते रहे बल्कि भक्ति का अर्थ होता है की अपने द्वारा किये गये बुरे कर्मों के लिए माफ़ी और आने वाले वक़्त के लिए शुभ कर्म करने के लिए सही मार्ग।

प्रेम रूपी भक्ति

भगवान अपने द्वारा बनाये गये सभी मनुष्यों को प्रेम करते है। लेकिन यदि आपको यह जानना है की भगवान आपसे प्रेम करते है या नही तो सबसे पहले आपको यही साबित करना होगा की आप भगवान के द्वारा बनाये गये मनुष्यों को प्रेम करते है या नही। जैसा व्यवहार आप उनके साथ करेंगे भगवान भी वैसा ही आपके साथ भी करेंगे तो हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए की भगवान सबके साथ होते है और वे सदेव अपने सच्चे भगतों की मदद को आते है।

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