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भगवान शिव के 19 अवतार

Shiv Ke Avatar:

हिंदू ग्रंथों में भगवान शिव के कई अवतारों का वर्णन किया गया है। लेकिन अभी भी भगवान शिव के सभी अवतारों के बारे में कम ही लोग जानते हैं। हमारे धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवा भगवान शिव के कुल मिलाकर 19 अवतार हैं। आइए जानते हैं इन अवतारों के बारे में :-

1. वीरभद्र अवतार – Virbhadra Aavtar

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जब राजा दक्ष द्वारा एक यज्ञ का आयोजन किया गया था तो वहां पर भगवान शिव को बहुत अपमानित किया गया था। जिसे शिव की पत्नी माता सती सहन नहीं कर सकी और उन्होंने अपने देह को त्याग दिया। जैसे ही भगवान शिव को इस घटना का ज्ञात हुआ। उन्होंने क्रोध में अपने सर से एक जटा उखाड़ दी और उसे एक पर्वत पर पटक दिया। जिससे महा भयंकर वीरभद्र का जन्म हुआ। वीरभद्र ने राजा दक्ष के यज्ञ का विध्वंस कर दिया और उसका सर काटकर उसे मृत्युदंड दिया।

2. नंदी अवतार – Nandi Aavtar

शिव को सभी जीवो का प्रतिनिधित्व करने वाले के नाम से भी जाना जाता है। इसके चलते ही भगवान शिव ने नंदी अवतार लिया था। नंदी कर्म का प्रतीक है जो बताता है कि कर्म ही जीवन का मूल मंत्र है। इसके पीछे की कथा कुछ इस प्रकार से है प्राचीन समय में एक शिलाद मुनि हुआ करते थे जो कि एक ब्रह्मचारी थे। अपने वंश की समाप्ति होते देख उनके पित्र चिंतित हो उठे और उन्होंने उनसे संतान उत्पन्न करने को कहा। पितरों की इच्छा को पूरा करने के लिए शिलाद मुनि भगवान शिव की तपस्या करने लगे। जिससे खुश होकर भगवान शिव ने शिलाद मुनि के यहां पुत्र के रूप में जन्म लेने का वरदान दिया। कुछ समय बाद भूमि को जोतते समय उन्हें एक बालक की प्राप्ति हुई। जिसका नाम नंदी रखा गया और भगवान शिव ने उसे अपना गणाध्यक्ष बना लिया।

3. पिप्पलाद अवतार – Piplad Aavtar

भगवान शिव के इस अवतार का मानव जीवन में बड़ा महत्व है। इनकी कृपा से शनिदेव से होने वाली पीड़ा का निवारण हो सकता है। पीपलाद के पिता दधीचि उन्हें जन्म से पूर्व ही छोड़ कर चले गए थे। देवताओं ने पीपलाद को बताया की शनिदेव की दृष्टि के कारण ही ऐसा हुआ है। यह सुनते ही उन्हें बहुत क्रोध आया और उन्होंने शनि को नक्षत्र मंडल से गिरने का श्राप दे दिया।

श्राप से प्रभावित होकर शनि देव नक्षत्र मंडल से लगातार गिरने लगे। ऐसा देख सभी देवता चिंतित हो उठे और उन्होंने पिप्पलाद से शनि देव को क्षमा करने की प्रार्थना की। पीपलाद ने शनिदेव को शमा किया और कहा कि शनि अब कभी किसी व्यक्ति को जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक कस्ट नहीं देंगे। तभी से ही पिप्पलाद की पूजा मात्र से हे शनि की पीड़ा का निवारण हो जाता है। भगवान शिव के इस अवतार का नामकरण ब्रह्मा द्वारा किया गया था।

4. भैरव अवतार – Bhairav Aavtar

भैरव को भगवान शंकर का पूर्ण अवतार माना जाता है। एक समय ब्रह्मा और भगवान विष्णु स्वयं को श्रेष्ठ समझने लगे और आपस में युद्ध कर बैठे। युद्ध को समाप्त करने के लिए भगवान शंकर उन दोनों के मध्य एक आग के खंबे के रूप में प्रस्तुत हो गए और कहा कि जो इसका अंत ढूंढ लेगा वही महान होगा। भगवान विष्णु शिव की महिमा को समझ गए और उन्होंने हार मान ली लेकिन ब्रह्मा के घमंड ने उन्हें ऐसा करने से रोका। उन्होंने सबके सामने यह झूठ कह दिया कि उन्होंने इसका अंत देख लिया है। इससे भगवान शिव को इतना क्रोध आया कि उससे भैरव का जन्म हुआ और भैरव ने ब्रह्मा के उस पांचवे सिर को काट डाला जिससे उन्होंने झूठ बोला था।

5. अश्वत्थामा – Ashwathama Aavtar

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पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा को भगवान शंकर का अंशावतार कहां जाता है। द्रोणाचार्य ने भगवान शिव को अपने पुत्र के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी। इससे खुश होकर शिव ने द्रोण के यहां पुत्र के रूप में जन्म लिया। शिव पुराण के अनुसार अश्वत्थामा अमर है और वह आज भी धरती पर गंगा किनारे निवास करते हैं।

6. शरभावतार – Sharabha Avatar

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इस अवतार में भगवान शंकर का स्वरूप आधे हिरण और आधे पक्षी के रूप में है। पुराणों के अनुसार इस जंतु के आठ पैर हैं और यह शेर से भी अधिक शक्तिशाली है। जब हिरण्यकशिपु का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लिया था तब हिरण्यकशिपु के वध के पश्चात भी नृसिंह का क्रोध शांत नहीं हुआ था। भगवान विष्णु की क्रोध अग्नि को शांत करने के लिए भगवान शंकर शरभावतार लेकर उनके समक्ष पहुंचे और उनकी स्तुति करने लगे। परंतु तब भी जब नृसिंह की क्रोध अग्नि शांत नहीं हुई तो भगवान शिव ने उन्हें अपनी पूंछ में लपेट लिया और आकाश में उड़ पड़े। तब कहीं जाकर भगवान विष्णु का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने भगवान शिव से क्षमा याचना की।

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7. गृहपति अवतार – Grihapati Avatar

नर्मदा नदी के तट पर, धर्मपुर नाम के एक नगर में विश्वानर नाम के एक मुनि और उनकी धर्मपत्नी शुचिष्मती रहा करते थे। उनके यहां कोई पुत्र नहीं था और उन्हें शिव के समान पुत्र प्राप्ति की इच्छा थी। जिसके चलते उन्होंने भगवान शिव की घोर तपस्या की तपस्या करते समय मुनी को वीरेश लिंग के मध्य एक बालक दिखाई देने लगा और उसने मुनी को शुचिष्मती के गर्भ से अवतार लेने का वरदान दिया। समय आते ही भगवान शिव ने शुचिष्मती के गर्भ से जन्म लिया।

8. ऋषि दुर्वासा – Rishi Durvasa Avatar

शिव का यह अवतार उनके प्रमुख अवतारों में से एक है। ब्रह्मा जी के निर्देशानुसार ऋषि अत्रि और उनकी पत्नी सटी अनुसूइया ने पुत्र कामना के लिए ऋक्षकुल पर्वत पर घोर तपस्या की। जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा,विष्णु और महेश तीनों ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें यह वरदान दिया कि हमारे अंश से तुम्हारे यहां 3 पुत्र होंगे। जो तुम्हारा यश बढ़ाएंगे। जिसके पश्चात विष्णु के अंश से दत्तात्रेय, ब्रह्मा के अंश से चंद्रमा और रुद्र के अंश से दुर्वासा ने जन्म लिया।

9. हनुमान – Hanuman Avatar

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भगवान शिव का सबसे श्रेष्ठ अवतार हनुमान जी को माना जाता है। इस रूप में भगवान शिव ने एक वानर रूप में अवतार लिया था। भगवान शिव सदा विष्णु की भक्ति में लीन रहते हैं। जब उन्हें भगवान विष्णु द्वारा राम अवतार में धरती पर जन्म लेने का बोध हुआ। तो भगवान विष्णु की सदैव सहायता करने के लिए शिव ने हनुमान के रूप में अवतार लेने का फैसला लिया। समय आते ही उन्होंने वानर राज केसरी की पत्नी अंजनी के गर्व से हनुमान रूप में जन्म लिया

10. वृषभ अवतार – Vrashabh Avatar

विष्णु पुत्रों का संहार करने के लिए भगवान शिव ने वृषभ अवतार लिया था। जब देत्यो को मारने के लिए भगवान विष्णु पताल लोक गए तो वहां पर उनके बहुत से पुत्रों का जन्म हुआ। विष्णु के इन पुत्रों ने पताल लोक और पृथ्वी पर बड़ा ही उपद्रव किया। धरती को उनके पापों से मुक्त करने के लिए भगवान शिव ने वृषभ अवतार लिया।

11. यतिनाथ अवतार – Yatinath Avatar

भगवान शिव का यह अवतार अतिथि के महत्व का प्रतिपादन करने के लिए था। इस अवतार के माध्यम से उन्होंने भील दंपत्ति की परीक्षा ली। जिसके चलते भील दंपत्ति को अपने प्राण गंवाने पड़े थे। जब भगवान शिव यतिनाथ का भेष धारण कर भील दंपत्ति के घर पहुंचे तो उन्होंने वहां रात व्यतीत करने की इच्छा प्रकट की। इसके चलते आहुका ने अपने पति को उनकी रक्षा करने के लिए रात बाहर बिताने के लिए कहा। प्रातकाल पता चला कि वन्य प्राणियों ने आहुक को मार डाला है। अतिथि सेवा धर्म में आहुक ने अपने प्राणों का विसर्जन कर दिया। इसके बाद आहुका अपने पति की चिता अग्नि में जगने लगी तो भगवान शिव ने उन्हें पुणे अगले जन्म में पति पत्नी के रूप में मिलने का वरदान दिया।

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12. कृष्णदर्शन अवतार – Krishna Darshan Avatar

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राजा नभग जब विद्या अध्ययन के लिए गुरुकुल गए तो वह बहुत दिनों तक घर नहीं लौटे। पीछे से उनके भाइयों ने राज्य का विभाजन आपस में ही कर लिया। इस बात का ज्ञात होते ही वह अपने पिता के पास गए। उनके पिता ने धन प्राप्त करने के लिए उन्हें यज्ञ करने के लिए कहा।
यज्ञ का समापन होते ही उन्हें धन की प्राप्ति हुई। उसी समय भगवान शंकर कृष्णदर्शन के रूप में प्रकट हुए और कहने लगे कि इस धन पर उनका अधिकार है। जिससे उन दोनों के बीच काफी देर तक विवाद चला। कृष्णदर्शन ने उन्हें अपने पिता से ही निर्णय कराने को कहा। उनके पिता ने कहा कि यह स्वयं शंकर भगवान है और इस यज्ञ में अवशिष्ट सभी वस्तु उन्हीं की है। इसके बाद नभग शिवजी की स्तुति करने लगे।

13. अवधूत अवतार – Avadhoot Avatar

भगवान शंकर ने यह रूप इंद्रदेव के अहंकार को खत्म करने के लिए लिया था। जब भगवान शंकर के दर्शन करने के लिए इंद्र समस्त देवताओं समेत कैलाश पर्वत पर पहुंचे तो भगवान शिव ने अवधूत रूप धारण कर उनका मार्ग रोका। इंद्रदेव ने बार बार उस पुरुष का परिचय पूछना चाहा, किंतु वह मोहन रहे। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने अवधूत पर अपने वज्र से प्रहार करना चाहा। परंतु उनका हाथ स्तंभित हो गया यह देख कर देवताओं ने भगवान शिव को पहचान लिया और उनकी स्तुति करने लगे। जिससे भगवान शिव ने इंद्र को शमा कर दिया।

14. भिक्षुवर्य अवतार – Bhikshu Avatar

देवों के देव भगवान शंकर समस्त संसार में जन्म लेने वाले सभी सभी जीवित प्राणियों के जीवन के रक्षक हैं। भगवान शिव का यह अवतार इसी बात का प्रतीक है। जब विदर्भ नरेश सत्यरथ को शत्रुओं ने मार डाला था। तो उसकी गर्भवती पत्नी ने छुप कर अपने प्राणों की रक्षा करी थी। कुछ समय पश्चात उसके यहां एक पुत्र का जन्म हुआ। प्यास से व्याकुल रानी जब पानी पीने के लिए सरोवर में गई। तो उसे घड़ियाल ने अपना भोजन बना लिया और पीछे से वह बालक भूख प्यास से तड़पता रहा। यह सब होता देख शिव ने भिक्षुक का रूप धारण कर एक भिखारिन को उस बालक का परिचय दिया और उसका पालन पोषण करने का निर्देश दिया। भिखारिन के पूछने पर कि आप कौन हैं भगवान शिव ने उन्हें अपने वास्तविक रूप के दर्शन दिए। बढ़ा हो कर उस बालक ने भगवान शिव की कृपा पाकर अपने शत्रुओं का नाश किया और अपना राज्य पुण: प्राप्त किया।

15. सुरेश्वर अवतार – Sureshwar Avatar

उपमन्यु नाम का एक बालक अपने मामा के घर पला करता था और वह सदा दूध के लिए व्याकुल रहता था। उसकी मां ने उसे भगवान शिव की भक्ति करने के लिए कहा। अपनी मां की आज्ञा का पालन करते हुए उपमन्यु वन में जाकर ओम नमः शिवाय का जप करने लगा। उसकी परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव ने सुरेश्वर यानी कि इंद्र का रूप धारण किया और उसके सम्मुख आकर शिवजी की निंदा करने लगे। इस पर उपमन्यु क्रोधित हो गया और इंद्र को मारने के लिए खड़ा हो गया। उपमन्यु की ऐसी निस्वार्थ भक्ति देखकर भगवान शिव ने उसे अपने वास्तविक रूप के दर्शन दिए और उन्हें शिवसागर के सामान दूध से भरा अनश्वर सागर प्रदान किया। साथ ही भगवान शिव ने उसे परम भक्ति का पद भी दिया।

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16. किरात अवतार – Kirat Avatar

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इस अवतार में भगवान शिव ने अर्जुन की वीरता की परीक्षा ली थी। जब कोरवो ने छल कपट के माध्यम से पांडवों का राज्य हड़प लिया था। तो पांडवों को वनवास जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इसके पश्चात अर्जुन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या करने लगे। तभी दुर्योधन द्वारा भेजा गया मुंड नाम का दैत्य सूअर का भेष धारण कर अर्जुन को मारने वहां आ पहुंचा।अर्जुन ने सुअर पर अपने धनुष बाण से प्रहार किया। तभी भगवान शिव ने किरात का भेष धारण कर सूअर पर अपना बाण चला दिया। यह देखकर अर्जुन यह कहने लगे की सूअर का वध उसके बाण से हुआ है और दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। अर्जुन ने किरात के रूप में भगवान शिव को युद्ध की चुनौती दे दी और उनसे युद्ध करने लगा। अर्जुन ने बड़ी वीरता के साथ भगवान शिव से युद्ध किया। जिससे वह प्रसन्न हो गए और अपने वास्तविक रूप में आकर अर्जुन को विजय का आशीर्वाद दिया।

17. सुनटनर्तक अवतार – Sunatnartak Avatar

हिमालय की पुत्री पार्वती से विवाह करने के लिए भगवान शिव ने सुनटनर्तक अवतार लिया था इस अवतार में भगवान शिव अपने हाथ में डमरू लेकर हिमाचल के घर जा पहुंचे और वहा नृत्य करने लगे। नटराज शिव का यह मनोहर नृत्य देख कर सभी प्रसन्न हो उठे और हिमालय ने उनसे मनचाही इच्छा मांगने को कहा। नटराज शिव ने इच्छा में पार्वती को मांग लिया। यह बात सुनकर हिमाचल क्रोधित हो उठे इसके बाद भगवान शिव पार्वती को अपना वास्तविक रूप दिखाकर वहां से चले गए। जिसके बाद पार्वती की मां मैना और हिमाचल को शिव के दिव्य ज्ञान का आभास हुआ और वह पार्वती और शिव के विवाह के लिए राजी हो गए।

18. ब्रह्मचारी अवतार – Brahmchari Avatar

माता सती ने जब दक्ष के यज्ञ में अपने प्राणों का त्याग कर दिया था। तो उन्होंने हिमालय के यहां पर जन्म लिया था। शिव को पुनः अपने पति के रूप में पाने के लिए उन्होंने घोर तप किया था। ऐसे में पार्वती की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव ब्रह्मचारी का भेष धारण कर उनके सम्मुख जा पहुंचे। ब्रह्मचारी पार्वती के सम्मुख शिव की निंदा करने लगे और उन्हें काल्पनिक बताने लगे। यह सुनकर पार्वती को बहुत क्रोध आ गया। पार्वती का अपने प्रति भक्ति भाव और प्रेम देखकर शिव ने उन्हें अपना वास्तविक रूप दिखाया।

19. यक्ष अवतार – Yaksha Avatar

यह अवतार भगवान शिव ने देवताओं के अनुचित और मिथ्या अभिमान को दूर करने के लिए धारण किया था। देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के दौरान एक भयंकर विष की उत्पत्ति हुई थी। जिसे भगवान शिव ने ग्रहण कर लिया था और अपने कंठ में रोक लिया था। इसी के पश्चात अमृत से भरे कलश की भी उत्पत्ति हुई। जिसे ग्रहण कर सभी देवता अमर हो गए और साथ ही खुद को बलशाली समझने लगे। देवताओं के इस अभिमान को खत्म करने के लिए भगवान शिव ने यक्ष का रूप धारण किया और देवताओं के समुख एक तिनका रखकर उसे काटने को कहा। अपनी संपूर्ण शक्ति लगा कर भी सभी देवता उस तिनके को काट न सके। भगवान शिव की यह लीला समझ कर सभी देवताओं ने उनसे क्षमा मांगी और उनकी स्तुति करने लगे।

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