in

भगवान विष्णु ने गरूड़ को ही क्यों चुना अपना वाहन

BHAGVAN VISHNU VAHAN GARUDA

गरूड़ गिद्धों की एक प्रजाति वाला पक्षी है।  गरूड़ बहुत ही बुद्धिमान और शक्तिशाली पक्षी है।  गरूड़ पक्षी को प्राचीनकाल में संदेशो को एक स्थान से दुसरे स्थान पर लेकर जाने का काम करता था। भगवान विष्णु ने स्वमं ही एक वरदान में गरूड़ को अपना वाहन बनाना स्वीकार किया था।

garuda vishnu vahan

गरुड़ो के जन्म की कहानी

गरुड़ पुराण के अनुसार दक्ष प्रजापति की विनता और कद्रू नामक दो कन्याओं का विवाह कश्यप ऋषि के साथ हुआ। विवाह के पश्चात् कद्रू ने एक हजार नाग पुत्रों का और विनता ने केवल दो तेजस्वी पुत्रों का वरदान कश्यप ऋषि से माँगा। कद्रू के अंडों के फूटने पर उसे एक हजार नाग पुत्र मिल गये। किन्तु विनता के अंडे उस समय तक नहीं फूटे।

तब विनता ने दोनों में से एक अंडे को अपने आप फोड़ डाला और उसमें से निकलने वाले बच्चा पूरी तरह विकसित नही हो पाया। बच्चे के नीचे के अंग नहीं बन पाये थे। उसका नाम अरुण पड़ा और उस बच्चे ने क्रोधित होकर अपनी माता को सौ वर्षों तक अपनी सौत की दासी बनकर रहने का शाप दिया और आकाश में उड़ गया और सूर्य के रथ का सारथी बन गया।

garuda

जब दूसरा अंडा पूरी तरह विकसित होकर अपने आप फुटा तो उसमे से एक अत्यन्त तेजस्वी बालक पैदा हुआ। जिसका नाम गरूड़ पड़ा और उसने ही अपनी माता को इस शाप से मुक्ति दिलाई। अपनी माता को मुक्त कराने के समय ही गरुड़ की भेट भगवान विष्णु से हुई और भगवान विष्णु ने गरुड़ की कर्तव्य निष्ठा को देखते हुए वरदान मांगने के लिए कहा। तब गरुड़ ने भगवान विष्णु से अमर रहते हुए उनके चरणों में स्थान देने का वरदान माँगा और भगवान ने गरुड़ को वरदान दे दिया।

वरदान लेने के बाद गरुड़ ने भी भगवान विष्णु को उससे एक वरदान मांगने के लिए कहा। तब भगवान विष्णु ने ऐसे बुद्धिमान और शक्तिशाली पक्षी को अपना वाहन बनने का वरदान लिया और तब से ही गरुड़ भगवान विष्णु का वाहन बना और सदेव के लिए उनके चरणों में आश्रित रहने लगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

shriyantr

श्री यंत्र और इसके लाभ

hanuman

क्या भगवान शिव ही है हनुमान का अवतार?