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10 गणेश मंदिर जिनके जीवन में एक बार दर्शन अवशय करने चाहिए

Bhagwaan Ganesh Ke 10 Parshidh Mandir

भगवान गणेश का नाम हिंदू धर्म की सभी प्रमुख परंपराओं में सबसे पहले लिया जाता है, वह हिंदू धर्म में सबसे प्रिय देवताओ में से एक है। उन्हें बाधाओं के विनाशक के नाम से भी जाना जाता है, वह घर में खुशी, सुरक्षा, और समृद्धि लाने के लिए जाने जाते है। भारत में गणेश जी के मंदिर भव्यता और वास्तुकला के रूप में देश भर के कुछ बेहतरीन मंदिरो में से एक हैं।

यहां 10 गणेश मंदिरों की एक सूची दी गई है, जिन्हें उनके भक्तो को अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार जाना चाहिए:

1. कनिपक्कम गणपति मंदिर, चित्तूर (Kanipakam Vinayaka Mandir, Chittoor)

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बहुधा नदी के बीच में स्थित गणेश जी का एक अनूठा कनिपक्कम विनायक मंदिर 11 वीं शताब्दी में राजा कुलोत्तुंग चोल प्रथम द्वारा बनाया गया था और यह इसकी ऐतिहासिक संरचना और आंतरिक रचना के लिए जाना जाता है। यह आंध्र प्रदेश के चित्तूर में स्थित है और इसे जादुई गणेश मंदिर भी कहा जाता है; क्योंकि भक्तों का मानना ​​है कि मंदिर के पवित्र जल में डुबकी उन्हें बुरी बालाओ और पापी कर्मों से छुटकारा पाने में मदद करती है।

जैसा कि कहानियों में कहा गया है, आवाज, दृष्टि और भाषण की भौतिक विकृतियों वाले तीन भाइयों ने गणेश की मूर्ति की खोज की, फिर उन्होंने एक दिव्य अनुभव हुआ, इसके बाद इन तीनों ने अपनी विकृतियों से छुटकारा पा लिया।

आज भी विनायक (भगवान गणेश का एक स्वयं प्रकट रूप) की मूर्ति मूल उसी तरह से कुएं के अंदर स्थापित हैं और साक्षात भगवान गणेश
के रूप से जानी जाती है।

2. सिद्धि विनायक मंदिर, मुंबई (Siddhi Vinayak Mandir, Mumbai)

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गणपति यहाँ एक लड्डू, एक कमल, एक कुल्हाड़ी और मोतियों की माला लिए उनकी पत्नियों सिद्धि और रिद्धि के साथ दर्शाये गए है। यह महाराष्ट्र में स्थित, मुंबई का सबसे प्रसिद्ध गणेश मंदिर माना जाता है, यहां तक ​​कि मंदिर के सामने बॉलीवुड सितारों की कतार लगी रहती है।

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यह मुंबई का सबसे अमीर मंदिर भी है, जो की हर साल लगभग 150 मिलियन दान प्राप्त करता हैं, इस मंदिर की शुरुआत 19वीं शताब्दी के शुरुआती वर्ष में एक मामूली ईंटो की संरचना से लक्ष्मण विथु और देबुभाई पाटिल द्वारा की गई थी। मंदिर का निर्माण बाँझ महिलाओं की इच्छाओं की पूर्ति के उद्देश्य से किया गया था। पिछले कुछ सालों में, सिद्धिविनायक मंदिर विशाल संरचनाओं से आधुनिक रूप में विस्तार कर चुका है और सभी मनोकामनाओ की पूर्ति करने के लिए प्रसिद्ध है।

3. गणपतिपुले मंदिर, रत्नागिरी (Ganpatipule mandir, Ratnagiri)

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महाराष्ट्र में रत्नागिरी जिले में स्थित, मंदिर में 400 वर्षीय गणपति मूर्ति है जिसका मुख पश्चिम की ओर है, जो कि ज्यादातर मूर्तियों के विपरीत है, जो पूर्व में दर्शाई जाती हैं। साथ ही, ऐसा माना जाता है कि मंदिर में मूर्ति स्वयं विकसित हुई है। मंदिर का निर्माण इस तरह से किया गया है कि फरवरी से नवंबर के महीने में सूर्य की रोशनी सीधे मूर्ति पर पड़ती है। यह एक पहाड़ी की चोटी के पास स्थित है; भक्त आदर के साथ पहाड़ी के चारों ओर एक ‘प्रदक्षिणा’ लेते हैं।

4. मानकुला विनायक मंदिर, पांडिचेरी (Manakula Vinayagar mandir, Pondicherry)

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लगभग तीन शताब्दियों पहले फ्रांसीसी उपनिवेश के तत्कालीन क्षेत्र में निर्मित, मानकुला विनायक मंदिर आज पांडिचेरी पर्यटन का एक महत्वपूर्ण यात्रा स्थल है। जैसा कि पौराणिक कथाओं में लिखा है, यहां गणेश मूर्ति को कई बार समुद्र में डाला गया था, लेकिन यह हर दिन एक ही स्थान पर फिर से दिखाई देता थी, जो पूजा करने वालों के लिए एक विशेष महत्व बना देता था। आज तक, मूर्ति एक ही स्थान पर स्थित है।
ब्रह्मोत्सव और गणेश चतुर्थी मंदिर के दो सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार हैं, जो पांडिचेरी के लोगों द्वारा उत्साह के साथ मनाए जाते हैं।

5. दोदा गणपति मंदिर, बैंगलोर (Dodda Ganapathi mandir, Bangalore)

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भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा के लिए व्यापक रूप से प्रसिद्ध, जो 18 फीट ऊंची और 16 फीट चौड़ी है, यह हर दिन शर्धालुओ की भीड़ को आकर्षित करता है, न केवल बंगलौर के निवासियों बल्कि दुनिया भर के भक्तों और पर्यटकों को भी। केम्पेगोड़ा प्रथम, बैंगलोर के संस्थापक के रूप में भी प्रसिद्ध है को इस मंदिर के निर्माण का श्रेय दिया जाता है।

यह मंदिर गणेश उत्सव के दौरान सबसे सुंदर दिखाई देता है, यह तब होता है जब भगवान गणेश की मूर्ति को विभिन्न तरीकों से सजाया जाता है। जहां मूर्ति को 100 किलोग्राम मक्खन के साथ लिप्त कर दिया जाता है।

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6. दग्दुशेथ हलवाई गणपति मंदिर, पुणे (Dagdusheth Halwai Ganapati mandir, Pune)

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अपनी आंतरिक रचना और सुनहरी मूर्ति के लिए प्रसिद्ध, दग्दुशेथ हलवाई गणपति मंदि का एक शताब्दी से अधिक समृद्ध इतिहास है। इसकी स्थापना 1893 में कर्नाटक के एक मिठाई निर्माता दुःखग्रस्त दगडूशेठ हलवाई ने की थी, जिन्होंने अपने बेटे को प्लेग नामक घातक बीमारी में खो दिया था, मंदिर का बहुत ऐतिहासिक महत्व भी है, क्योंकि पूरे महाराष्ट्र में गणपति उत्सव का प्रतिष्ठान इसी मंदिर के निर्माण के साथ शुरू किया गया था।

मंदिर में 7.5 फीट लंबी और 4 फीट चौड़ी स्वर्ण मूर्ति है, जिसकी सुंदरता को और बढ़ाने के लिए लगभग 8 किलोग्राम से अधिक सोने के साथ सजाया गया हैं और हीरे से जड़ी मूर्ति की सुंदरता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। पुणे में स्थित, यह मंदिर हर साल लाखों भक्तो को अपनी और आकर्षित करता है।

7. श्री महा गणपति खेत्रम, कोट्टारक्करा (Shree Maha Ganapathi Kshetram, Kottarakkara)

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कोट्टारक्करा में स्थित, कोट्टारक्करा श्री महागणपति मंदिर एक सुनहरे ध्वजस्तंबं के साथ एक महाक्षेत्र है। जोकि केरल में सबसे प्रसिद्ध गणपति मंदिर है, यहाँ भगवान शिव, देवी पार्वती, भगवान मुरुगन, भगवान अयप्पा और भगवान नागराज की भी पूजा की जाती है। हालांकि मंदिर के मुख्य देवता भगवान शिव है, फिर भी यह मंदिर गणपति मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है।

8. उच्ची पिल्लयार कोइल मंदिर, त्रिची (Ucchi Pillayar Koil Mandir, Trichy)

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7वीं शताब्दी में निर्मित, उच्ची पिल्लयार कोइल मंदिर तमिलनाडु में त्रिची में स्थित है। मंदिर एक विशाल चट्टान की नोक पर टिका हुआ है जिसमे कुछ अद्भुत पथरो के आर्किटेक्चर देखने को मिलते है। मंदिर पहुंचने के लिए चट्टान के माध्यम से 417 कदमों पर चढ़ते समय त्रिची का शानदार दृश्य देखने को मिलता है। हालांकि यह गणेश मंदिर के रूप में प्रसिद्ध, लेकिन यह शिव और भगवान गणेश दोनों को समर्पित है।

9. मोती डूंगरी गणेश मंदिर, जयपुर (Moti Dungri Ganesh Temple, Jaipur)

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मोती डूंगरी गणेश मंदिर पत्थर से बना है और संगमरमर पर अपने अद्भुत काम के लिए जाना जाता है, जो कुछ पौराणिक छवियों को दिखता है और कला-प्रेमीयो के लिए शानदार दृश्य पेश करते हैं। चाहे वह गणेश चतुर्थी हो या कोई अन्य त्यौहार, मंदिर हमेशा तैयारी के साथ रहता है।

सेठ जय राम पालीवाल द्वारा निर्मित, मोती डुंगरी गणेश मंदिर जयपुर शहर के मध्य में स्थित है। यह इस शहर में एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण बन गया है।

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10. कलामस्त्री महागणपति मंदिर, केरल (Kalamassery Mahaganapathy Temple, Kerala)

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यह मंदिर उत्तरी कलामस्त्री में स्थित है और सुब्रमण्यम, नवग्रह, शिव, पार्वती और राम समेत भगवान गणेश को समर्पित है। मंदिर 1980 में बनाया गया था इसका एक साधारण निर्माण किया गया है और यह मंदिर 5,000 वर्ग फुट के क्षेत्र को कवर किया गया है। पिछले दो दशकों से, मलयालम कैलेंडर के कार्ककिदाकोम महीने के पहले दिन अष्ट द्रव्य महा गणपति हवन और आनयूटटू सालाना आयोजित किए जाते हैं। इसी के साथ चार साल में एक बार गजपुजा भी आयोजित की जाती है।

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