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क्या भगवान शिव ही है हनुमान का अवतार?

Shiv Avtar Hanuman

हनुमान भगवान राम की भक्ति के लिए जाने जाते हैं। वह अंजनी और केसरी के पुत्र हैं और पवन के देवता वायु देव द्वारा धन्य हैं। कहा जाता है की हनुमान जी की पूजा करने से भगवान राम को अत्यंत प्रसन्नता होती है। ऐसा माना जाता है कि हनुमान भगवान शिव का ही अवतार हैं। इसी लिए कई ग्रंथ उन्हें भगवान शिव के अवतार के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

भगवान शिव का हनुमान के रूप में जन्म

रावण को हराने के लिए भगवान विष्णु द्वारा एक पुरुष के रूप में जन्म लेने के बाद, ब्रह्मा ने महसूस किया कि उन्हें मदद की आवश्यकता होगी, इसलिए उन्होंने शिव को अवतार लेने के लिए कहा। शिव ने पवन देव और अप्सरा अंजनी के पुत्र हनुमान के रूप में जन्म लेने का फैसला किया, जिन्हें एक बंदर के रूप में शाप दिया गया था।

हनुमान जी इस बात से अनजान थे कि वे भगवान शिव के अवतार थे।

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बचपन में, हनुमान बहुत शरारती थे। एक बार, पैदा होने के तुरंत बाद, हनुमान जी ने सूरज पर हमला किया, यह सोचकर कि यह एक फल है, और जब सूरज भाग गया, तो वह उसका पीछा करते रहे। एक बंदर के रूप में शरारती होने के बावजूद, हनुमान बेहद वफादार और साहसी थे।

हनुमान का सबसे अच्छा दोस्त सुग्रीव, किष्किंधा के राजा बाली का भाई था, जो बंदरों की भूमि थी। गलतफहमी के चलते बाली ने सुग्रीव को किष्किंधा से बाहर निकाल उसे निर्वासित कर दिया था। वनवास के समय में सुग्रीव के साथ केवल हनुमान ही थे। हनुमान ने उस समय सुग्रीव के प्रति उतनी ही निष्ठा दिखाई, जितनी वो राम के प्रति निष्ठा के लिए जाने जाते है।

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रूद्रावतार श्री हनुमान

एक बार भगवान शंकर भगवती सती के साथ कैलाश पर्वत पर विराजमान थे। प्रसंगवश भगवान शंकर ने सती से कहा-प्रिय! जिनके नामों को रट-रटकर मैं गदगद होता रहता हूँ, वह ही मेरे प्रभु अवतार धारण करके संसार में आ रहे हैं। सभी देवता उनके साथ अवतार ग्रहण करके उनकी सेवा का सुयोग प्राप्त करना चाहते हैं।, तब मैं ही उससे क्यों वंचित रहूं? मैं भी वहीं चलूं और उनकी सेवा करके अपनी युग-युग की लालसा पूर्ण करूं।

भगवान शंकर की यह बात सुनकर सती ने सोचकर कहा-प्रभु! भगवान का अवतार इस बार रावण को मारने के लिए हो रहा है। रावण आपका अनन्य भक्त है। यहां तक कि उसने अपने सिरों को काटकर आपको समर्पित किया है। ऐसी में आप उसको मारने के काम में कैसे सहयोग दे सकते हैं?

यह सुनकर भगवान शंकर हंसने लगे। उन्होंने कहा-देवी! जैसे रावण ने मेरी भक्ति की है वैसे ही उसने मेरे एक अंश की अवहेलना भी तो की है। तुम जानती हो कि मैं ग्यारह स्वरूपों में रहता हूं। जब उसने अपने दस सिर अर्पित कर मेरी पूजा की थी, तब उसने मेरे एक अंश को बिना पूजा किए ही छोड़ दिया था। अब मैं उसी अंश से उसके विरूद्ध युद्ध करके अपने प्रभु की सेवा कर सकता हूँ। मैंने वायु देवता के द्वारा अंजना के गर्भ से अवतार लेने का निश्चय किया है। यह सुनकर भगवती सती प्रसन्न हो गई।

इस प्रकार भगवान शंकर ही श्री हनुमान के रूप में अवतरित हुए, इस तथ्य की पुष्टि पुराणों की अख्यायिकाओं से होती है। गोस्वामी तुलसीदास जी की दोहावली (142) में भी लिखा है-

जेहि सरीर रति राम सों सोइ आदरहिं सुजान।

रूद्रदेह तजि नेहबस बानर भे हनुमान।।

सीता की खोज के दौरान जब राम हनुमान से मिले तो दोनों तुरंत गहरे मित्र बन गए। क्योंकि ऐसा होना सर्वोच्च देवताओं द्वारा पूर्व नियोजित था। सीता का पता लगाने और उन्हें यह सन्देश देने कि राम उनके लिए आ रहे है के लिए हनुमान जिम्मेदार थे। राम और रावण के बीच लड़ाई के दौरान, राम की सेना बुरी तरह घायल हो गई थी और कई लोग मारे गए थे। जिसमे लक्ष्मण भी बुरी तरह से घायल हो गए थे, यह देखते हुए हनुमान उत्तराखंड में हिमालय की द्रोणागिरी पर्वत माला में दूर पहाड़ पर स्थित “संजीवनी बूटी” नामक एक जीवन-बहाल जड़ी बूटी खोजने के लिए गए।

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जब वह जड़ी-बूटियों तक पहुंचे, तो उन्होंने महसूस किया कि सभी जड़ी-बुटिया एक जैसी दिख रही थी और उन्होंने राम व लक्ष्मण के प्रति अपनी भक्ति और निष्ठा में पूरे पहाड़ को ही उठा लिया और इसे वापस राम और उनके लोगों के पास ले गए। शिव के रूप हनुमान के बिना समय पर सीता को बचा पाना नामुमकिन होता। राम ने रावण को हराया होगा, लेकिन उनकी तरफ से हनुमान के बिना युद्ध जीत पाना बहुत कठिन होता।

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शिव के अवतार के रूप में हनुमान को हर किसी ने स्वीकार नहीं किया है, लेकिन अभी भी बहुत से लोग हैं जो इसे मानते हैं और इसका उल्लेख शिव पुराण के शतरुद्रिय संहिता में भी है। ब्रह्मा चाहते थे कि देवताओं में से कोई एक भगवान् विष्णु की सहायता करे। चूंकि रावण भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था, इसलिए उसे हराना लगभग असंभव था।

जैसा कि हम रामायण की कहानी पर गौर करते हैं, अगर हनुमान नहीं होते, तो राम को सीता को खोजने में बहुत समय लगता और भरत को खुद को मारने से रोकने के लिए समय पर वापस आ पाना नामुमकिन था और पूरी कहानी अलग होती।

भगवान हनुमान का जन्म मंगलवार के दिन चैत्र महीने की पूर्णिमा को हुआ था। इसी लिए मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की पूजा करने के लिए बहुत ही शुभ दिन माना जाता है।

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