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भगवान शिव की अज्ञात बेटियों की कहानी

bhagwaan shiv ki betiyo ki kahani 

शिव पुराण में भगवान शिव के जीवन का वर्णन एक गृहस्थ व्यक्ति के रूप में किया गया है। जिसका मतलब है की एक पिता बनना और पितृत्व के लिए ज़िम्मेदारी लेना। जैसे की हम भगवान शिव और पार्वती के पुत्रों के बारे में बहुत जानते हैं, लेकिन उनकी बेटी के अस्तित्व के बारे में शायद ही कोई जानता होगा।shiv parvati

अशोक सुंदरी (Ashoka Sundari) की कहानी गुजरात और वहां के पड़ोसी इलाकों के व्रत-कथाओं से आती है। शिव की बेटी जिनका नाम था ‘अशोक सुंदरी’ इनका विवाह राजा नहुष से हुआ था। अशोक सुंदरी का जन्म पद्म पुराण में दर्ज किया जाता है। कहा जाता है कि वह पार्वती द्वारा एक पेड़ से अकेलेपन से स्वतंत्रता पाने के लिए बनाई गई थीं। उन्हें अशोक कहा जाता था क्योंकि वह पार्वती के ‘शोक’ या दुःख से छुटकारा दिलाती थीं। और सुंदरी उनकी सुंदरता के कारण। उनके बारे में ज्यादा कुछ भी नहीं पता है। कहा जाता है कि वह उस समय उपस्थित थी जब भगवान् शिव दुबारा गणेश का सिर धड़ से अलग किया गया था और वह डर के कारण नमक की बोरी के पीछे चुप गयी थी, इस पूरी घटना कर्म से पारवती मां बहुत गुस्से में आगयी थी, और समस्त संसार का विनाश निश्चित था। जिसे बाद में उनके पिता शिव ने शांत कर दिया था। अशोक सुंदरी नमक से जुड़ी है, वह घटक जिसके बिना जीवन बेकार है।

शिव की बेटी को ज्योति के नाम से भी जाना जाता है, जो प्रकाश की देवी हैं, जो शिव के प्रभामंडल से उभरती हैं और वह उनकी कृपा का भौतिक अभिव्यक्ति है।

 

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shiv ki betiyo ki kahani in hindi 

बंगाली लोक कथाओं के अनुसार मनसा, जो की सांपो के राजा वासुकी की बहन है। सांप के काटने का इलाज करती थी। उस समय पैदा हुई थी जब शिव के वीर्य ने सांप की मां कद्रू द्वारा बनाई गई मूर्ति को छुआ। इस प्रकार वह शिव की बेटी थीं, लेकिन पार्वती की नहीं थीं। लोक कथाओ के अनुसार देवी पारवती का चंडी रूप मनसा से ईर्ष्या करता है।

चंडी को यह संदेह था की मनसा उनकी गुप्त पत्नी है। समुंद्र मंथन के दौरान उससे निकले विष को जब शिव ग्रहण कर रहे थे। तब देवी मनसा परकत हुई और खुद को शिव की पुत्री बताते हुए उन्हें विष पिने से रोकने लगी। लेकिन देवी चंडी को उनसे इतनी ईर्ष्या थी की उन्होंने मनसा को तीर मार कर एक आंख से वंचित कर दिया। आगे जाकर ग्रहक्लेश से तंग आकर शिव जी मनसा का त्याग कर देते है।

shiv daughter devi mansa

देवी मनसा (Mansa Devi) का जारतकरू से विवाह हो जाता है। तो चांडी उन्हें दुल्हन के रूप में सांपो से सिंघार कर दुल्हन कक्ष में जाने के लिए कहती है, जिससे उनका पति जारतकरू डर जाता है। और उन्हें छोड़ कर भाग जाता है। पिता और पति द्वारा छोड़ दिए जाने से दुखी मनसा एक गुस्से की देवी बन जाती है। यदि किसी को सांप के काटने से मोत का डर रहता है तो उससे मनसा देवी को मानना पढता है।

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