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ब्रह्म मुहूर्त क्या है और इसका महत्व

Brahma Muhurta Benefits In Hindi

सुबह जल्दी जागना आम तौर पर कुछ लोगों के लिए मुश्किल है। आज के समय में लोग सोशल मीडिया के इतने आदी हो गए हैं कि उनको समय पर सोने के लिए समय ही नहीं मिलता है, तो कुछ लोगो को वास्तव में रात भर जीवन-यापन के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।

जिसकी वजह से उन्हें रात भर जागना पढता हैं। 8 घंटे की नींद शरीर के लिए बहुत जरुरी होती है। लेकिन शोध हमारे प्राचीन ज्ञान के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त को मन,शरीर और आत्मा के स्वस्थ के लिए महत्वपूर्ण समय बताता है।

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ब्रह्म मुहूर्त क्या है ?

इसका शाब्दिक अर्थ “निर्माता का समय” है, यह परंपरागत रूप से रात का अंतिम चरण या मुहूर्त है और योग के सभी अभ्यासो के लिए एक शुभ समय माना जाता है। यह ध्यान, पूजा या किसी अन्य धार्मिक कार्य के लिए सबसे उपयुक्त है। प्रत्येक मुहूर्त 48 मिनट तक रहता है, और इसलिए ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से 1 घंटे और 36 मिनट पहले शुरू होता है और सूर्योदय से 48 मिनट पहले समाप्त होता है।

Brahmi muhurtam uttishthet swastho rakshartham Ayusha:
tatra sarvartha shantyartham smareccha madhusudanam
(Ref: Ashtanga Hridayam)

हिंदी अनुवाद : एक उत्तम स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए और एक लंबे जीवन काल को प्राप्त करने के लिए ब्रह्मा मुहूर्त में जाग जाना चाहिए।

सूर्य और चंद्रमा के साथ पृथ्वी के संबंध की प्रकृति ऐसी है कि इस समय मानव शरीर में कुछ शारीरिक परिवर्तन होते हैं। पर्यावरण शुद्ध और शांत और सुखदायक होता है और नींद के बाद मन ताजा होता है। इस समय ध्यान मानसिक कार्य में सुधार करता है, जो सात्विक गुणो को बढ़ाने में मदद करता है, इसलिए, मानसिक उत्तेजना या अति सक्रियता और सुस्ती कम हो जाती है।

इस समय में पूरा शरीर एक निश्चित अनुकूल वातावरण में होता है, जिससे प्राकृतिक मेलाटोनिन का उत्पादन होता है, जो पाइनल ग्रंथि का स्राव है। हमें इस समय का उपयोग इसलिए करना चाहिए क्योंकि पाइनल ग्रंथि ब्रह्म मुहूर्त के दौरान अधिकतम स्रावित होती है, जिसका अर्थ है कि आप इस समय अपने ब्रह्म ज्ञान, सर्वोच्च ज्ञान और अनन्त खुशी को प्राप्त कर इसे मजबूत बना सकते है।

ब्रह्म मुहूर्त का मतलब निर्माता का समय है। आप इसे इस तरह देख सकते हैं: यह वह समय है जब आप स्वयं को बना सकते हैं। आप सुबह में ब्राह्मण बन जाते हैं, ताकि आप स्वयं को जिस तरीके से बनना चाहते हैं उसे बना सकें।

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Macrocosm और Microcosm का सिद्धांत

Macrocosm और Microcosm के सिद्धांत के मुताबिक, विशाल बाहरी ब्रह्मांड के macrocosm में मौजूद सबकुछ, मानव शरीर के आंतरिक कास्मोस में भी पाया जाता है, microcosm कहता है, ‘मनुष्य ब्रह्मांड का प्रतीक है। मनुष्य के भीतर जितनी विविधता है, उतनी ही विविधता मनुष्य के बहार की दुनिया में भी है।’ जब व्यक्ति बाहरी ब्रह्मांड के साथ गठबंधन में बंध जाता है, तो भीतरी ब्रह्मांड और बाहरी ब्रह्मांड एक समान कार्य करना आरम्भ कर देते है।

आयुर्वेद में, शायद इस सिद्धांत का सबसे अच्छा उदाहरण elemental macro और microcosms में है। यहां पांच तत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) है और तीन दोष (वता, पित्त और कफ) है। वता संचार, पित्त परिवर्तन, और कफ संरचना का प्रतिनिधित्व करता है। वही पांच तत्व और तीन दोष ब्रह्मांड और मनुष्यों को बनाते हैं। वे दोनों में एक ही तरीके से कार्य करते हैं।

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इसी प्रकार से हमारा शरीर ब्रह्मांड के चक्रों की नकल करते हुए आगे बढ़ता रहता है। जिस प्रकार 24 घंटे में रात-दिन का चक्र पूरा होता है और 356 दिन में वर्ष का सम्पूर्ण चक्र होता है, जिसमे सर्दियों की ठंड से प्रभावित निर्जीव महीने वसंत के समय में नए विकास में बदल जाते है। उसी प्रकार जीवन का चक्र भी कार्य करता है, जहां एक व्यक्ति मृत्यु से जन्म और जन्म से फिर से मृत्यु में जाता है।

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ब्रह्म मुहूर्त और शरीर विज्ञान

ब्रह्ममुहूर्त 24 घंटे के समय चक्र का हिस्सा है। यदि हम जीवन भर के चक्र की इस 24 घंटे के चक्र से तुलना करते हैं, तो हम देखेंगे कि ब्रह्म मुहूर्त जीवन चक्र में जन्म से मृत्यु तक मेल खाता है। बचपन यानी सुबह, मध्य जीवन यानी दोपहर, बुढ़ापा या जीवन की सांझ से अंत तक यानी दोपहर के माध्यम से देर रात तक, मौत यानी रात और सुबह जीवन की फिर से नई शुरुवात होगी।

आयुर्वेद में कहा जाता है की वता, पित्त और कफ प्रत्येक व्यक्ति को दिन के कुछ समय में या जीवन के कसी समय पर प्रभाव जरूर डालते है। तीनों में से, वता सभी संधि या जोड़ों को नियंत्रित करता है, जैसे कि जन्म से मृत्यु, मृत्यु से जन्म, दिन-रात और रात का फिरसे दिन में बदलना। वता सुबह 2 बजे से 6 बजे तक या सुबह के माध्यम से कार्यशील होता है, जैसा की हम जानते हैं कि इसी समय में रात-दिन एक दूसरे से जुड़ते है और इसमें ब्रह्म मुहूर्त भी शामिल होता हैं।

वता के पांच उप-समूहों में से एक अपान, विशेष रूप से सुबह के आसपास सक्रिय हो जाती है।

वता के पांच उप-समूहों में से एक प्राण, गर्भावस्था के दौरान एक बच्चे में रहस्यमय और व्यावहारिक बुद्धि को कोशिकाओं, ऊतकों और अंगों में इकट्ठा करने के लिए जिम्मेदार होती है। यह एक शरीर सभी अंगो को इकट्ठा कर उनको कार्यो को नियंत्रित करता है। सुबह के दौरान सक्रिय अपान ही बच्चे को दुनिया में सफलतापूर्वक जन्म देने के लिए जिम्मेदार है। इससे पता चलता हैं कि एक ही बल -वता- जीवन के दोनों चक्रों के दौरान प्रभावी है।

यदि प्राण की स्वस्थ कार्यप्रणाली विकासशील व्यक्ति में ऊर्जा और भौतिक पदार्थ के संगठन को आश्वस्त करती है, और अपान पूर्ण व्यक्ति को दुनिया में पहुंचाती है, तो यह पालन करता है कि ये सिद्धांत ब्रह्ममुहूर्त के microcosm पर भी लागू होते हैं ।

उदाहरण के लिए, सुबह के शुरुआती घंटों के दौरान सक्रिय प्राण गर्भावस्था से लेकर जन्म की क्रिया की तरह हमारे शारीरिक और मानसिक स्थिति संगठित करेगा। वहीं अपान हमें हमारे दिन में आसानी से प्रवेश करने की अनुमति देगी।

हम इस तथ्य का लाभ उठा सकते हैं कि इस समय संगठनात्मक और वितरण सिद्धांत विशेष रूप से सक्रिय व उपलब्ध हैं और इस समय प्रभाव के अधीन हैं जो हमे स्वस्थ प्रभाव प्रदान कर सकते हैं। स्वस्थ प्रभाव वता को शांत करेगा और प्राण के मुक्त प्रवाह को सुविधाजनक बनाएगा।

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ब्रह्म मुहूर्त और ध्यान

योगी, परमहंस, संन्यासी और ऋषि ब्रह्म मुहूर्ता के दौरान अपना ध्यान शुरू करते हैं। इस समय किसी भी प्रयास के बिना ध्यान स्वयं ही आ जाता है। ब्रह्म मुहूर्त और शाम के दौरान, सुषुम्ना नदी आसानी से बहती है। जब सुषुम्ना नदी बहती है तो आप बिना किसी प्रयास के गहरे ध्यान और समाधि में प्रवेश कर सकते है। जब दोनों नाक के माध्यम से सांस बहती है, तो पता चलता है कि सुषुम्ना काम कर रही है। ऐसे में ध्यान के लिए बैठें और आत्मा की आंतरिक शांति का आनंद लें।

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छात्रों के लिए ब्रह्म मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त के समय, एकाग्रता का स्तर चरम पर होता है। इसलिए, छात्रों को ब्रह्म मुहूर्त के दौरान अध्ययन करने की सलाह दी जाती है।

आधुनिक विज्ञान के अनुसार, मेलाटोनिन का स्तर, जो शारीरिक और मानसिक दोनों के स्वस्थ के लिए महत्वपूर्ण है रात के समय में अपने
शिखर पर पहुँच जाता है। और सुबह के समय क्षीण हो जाता है। मेलाटोनिन मनोदशा को बनाये रखता है और समझ को बढ़ाता है।

मेलाटोनिन के स्तर में गिरावट तनाव विरोधी हार्मोन कोर्टिसोल में वृद्धि करता है। इसके स्तर में सुबह के घंटों के दौरान वृद्धि होती हैं और यह लगभग 6 बजे उच्चतम होता हैं। कोर्टिसोल के स्तर में वृद्धि से तनाव दूर होने के साथ-साथ उत्साह में भी वृद्धि होती है।

तो ब्रह्म मुहूर्त में जागे और जीवन की एक अच्छी शुरुआत करे

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