in , ,

ध्यान द्वारा चक्रो की जाग्रति के लिए मुद्रा और बीज मंत्र

DHYAAN(MEDITATION), MUDRA AND BIJ MANTR

संस्कृत में चक्र का अनुवाद “पहिया” है। इन चक्रो को भंवर के रूप में देखा जा सकता है जो ऊर्जा प्राप्त कर उनका विकीर्ण करते हैं। हमारे शरीर में कुल 72000 नादियाँ हैं और जिन क्षेत्रों में ये नाड़ियाँ मिलती हैं उन्हें चक्र कहा जाता है। इनमें से 7 प्रमुख ऊर्जा केंद्र हैं, जिन्हें मानव शरीर में चक्र के रूप में जाना जाता है। वे रीढ़ के आधार से सिर के मुकुट तक स्थित हैं। जोकि भावनाओं, शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्पष्टता को प्रभावित करता है। शरीर के विभिन्न क्षेत्रों से उत्सर्जित ऊर्जा कितनी शुद्ध है यह बात प्रत्येक चक्र द्वारा उसे शुद्ध करने पर निर्भर करती है।

Chakras

ध्वनि – DHYAAN

ध्वनि एक कंपन है। इस प्रकार जब आप एक मंत्र का जप करते हैं, तो आप अपने शरीर में कंपन महसूस कर सकते हैं जो आपके सभी सात चक्रों को सामंजस्य करता है। इससे आप ऊर्जावान, संतुलित और स्वास्थ्य की मजबूत भावना महसूस करते है। और मंत्र का जप करने से और अधिक मानसिक शक्ति और आध्यात्मिक विकास के लिए जरुरी परिवर्तन आता है।

मंत्र – MANTR

मंत्र एक शब्द या शब्दों का समूह है जो परिवर्तन लाने में सक्षम माना जाता है। परंपरागत रूप से, इसका उपयोग प्रार्थना और पुष्टि दोनों के लिए किया गया है। ओम एक पारंपरिक मंत्र है जो बिना किसी निर्णय के सभी को स्वीकार करता है। “लोका: समस्ता: सुखिनो भवन्तु”, सभी प्राणियों में शांति लाने के लिए एक प्रार्थना मंत्र है। संस्कृत शब्द ‘मंत्र’ दो शब्दो के मेल से बना है जहा मन(दिमाग) का अर्थ है – “सोचने के लिए” और तर का अर्थ है “उपकरण” इसलिए इसका शाब्दिक अनुवाद होगा “विचार का उपकरण”।

गायत्री मंत्र (gayatri mantr)

हिन्दू धरम में दस लाख से अधिक मंत्र अस्तित्व में हैं। जिनमे से कुछ एक शब्दांश के रूप में कम हैं तो अन्य कई शब्दांश लंबे हैं। वही कंपन ओम सबसे प्रसिद्ध सार्वभौमिक मंत्रों में से एक है। प्राचीन वैदिक परंपरा के अनुसार, कंपन ओम में हर वो कंपन है जो कभी भी कही भी मौजूद था और भविष्य में होगा।

बीज मंत्र – BIJ MANTR

कई तरह के मंत्रों में से मंत्र का एक सबसे शक्तिशाली और लोकप्रिय रूप है बिज मंत्र। बीज का अर्थ मूल है, इसलिए वह एक मूल मंत्र हैं और यह बीज ध्वनियां मूल ध्वनियां हैं और प्रत्येक 7 चक्रों के लिए एक मूल मंत्र है। जब आप किसी विशेष मंत्र का जप करते हैं, तो आप उस विशिष्ट चक्र के भीतर ऊर्जा भेजते हैं जो आपके अस्तित्व में गति और जीवन शक्ति को सुविधाजनक बनाता है।

मुद्रा – MUDRA

Mudra

योगियों के पास अपने शरीर को पुनर्जीवित करने के लिए अलग-अलग तरीके हैं, लेकिन अपने मन के अंदर जाकर परिवर्तन लाने के लिए मुद्राएं शक्तिशाली उपकरण हैं। मुद्रा शब्द ध्यान के दौरान हाथ के द्वारा बनाये गए इशारों के उपयोग पर लागू होता है जो आपके शरीर की ऊर्जा प्रवाह को प्रसारित करने के विशिष्ट लक्ष्यों को पूरा करता है। हिन्दू धरम में सदियों से विकसित की गई कई ज्ञात मुद्राएं हैं।

मुद्रा का संस्कृत अर्थ “बंद” होता है। हाथों के विभिन्न क्षेत्र शरीर और मस्तिष्क के क्षेत्रों से जुड़े होते हैं। इसलिए जब हम योग मुद्रा में अपने हाथ और उंगलियों से मुद्राएं बनाते हैं, तो हम मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों को उत्तेजित करते हैं जिससे शरीर में एक विशिष्ट ऊर्जा का संचार होता हैं। ऐसा करने से, हम अपने मन की एक विशिष्ट स्थिति उत्पन्न कर पाते हैं। इसलिए शरीर के प्रत्येक चक्र में विशिष्ट मुद्राएँ होती हैं।

साथ ही प्रत्येक चक्र के मंत्रों के साथ मुद्राओं का संयोजन किसी भी योगी के लिए उस पारवर्ती स्थिति तक पहुंचना आसान बनाता है। इसलिए शरीर के सभी चक्रो को ध्यान द्वारा जागृत करने के लिए मुद्रा और बीज मंत्र निचे दिए गए है –

1. मूलाधार चक्र – Muladhara

Gyan-Mudra-Chin-Mudra

मुद्रा:

ज्ञान मुद्रा या चिन मुद्रा

मंत्र:

‘लं’

2. स्वाधिष्ठान चक्र – Svadhishana

Dhyan-Mudra

मुद्रा:

ध्यान मुद्रा

मंत्र:

‘वं’

3. मणिपुर चक्र – Manipura

Matangi-Mudra

मुद्रा:

मातंगी मुद्रा

मंत्र:

रं’

4. अनाहत चक्र – Anahata

Padma-Mudra

मुद्रा:

पद्म मुद्रा

मंत्र:

‘यं’

5. विशुध्द चक्र – Vishuddha

Granthita-Mudra

मुद्रा:

ग्रन्थिता मुद्रा

मंत्र:

‘हं’

6. अजना चक्र – Ajna

Kalesvara-Mudra

मुद्रा:

कालेश्वर मुद्रा

मंत्र:

‘उ’

7. सहस्र चक्र – Sahaswara

मुद्रा:

सहस्रार चक्र मुद्रा

मंत्र:

‘ॐ’

यह भी पढ़े:

सफलता प्राप्त करने के लिए मंत्र

आसान सरस्वती मंत्र बच्चों को बनाएं पढ़ाई में तेज

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

akshaya tritiya shubh muhrat

अक्षय तृतीया का महत्व शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

9 देवियों की कहानियाँ