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दिवाली त्यौहार और पूजा विधि

साल 2018 में दीपावली का शुभ मुहूर्त – Diwali Festival 2018 Date

दीपावली 2018 नवंबर 2018
दिन बुधवार
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त का समय 5.57 से लेकर 7:53 तक

दीपावली का त्यौहार समस्त भारतवर्ष में प्रत्येक वर्ष बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। जिस प्रकार से प्रत्येक पर्व व त्योहार के पीछे एक कहानी छिपी होती है जो इसे कुछ खास बना कर इसका महत्व समझाती है। ठीक उसी प्रकार से दीपावली के पीछे की कहानी का महत्व यह है कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। दीपावली का त्यौहार हिंदू धर्म के सभी त्योहारों में से सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है। जिसके जशन की शुरुआत 1 महीने पहले से ही हो जाती है और यह त्योहार 5 दिनों तक चलता है।

Diwali-Festival

दीपावली और इसके साथ जुड़े अन्य त्यौहार

दीपावली का त्यौहार भगवान रामचंद्र के 14 वर्ष के वनवास काटकर अयोध्या वापिस लौटने की खुशी में मनाया जाता है। अयोध्या वासियों ने समस्त अयोध्या में दीपक जलाकर अमावस्या की काली रात को भी पूर्णता दिन के उजाले में बदल दिया था। तभी से यह त्यौहार पूरे 5 दिनों तक मनाया जाता है। 5 के 5 दिन मनाए जाने वाले त्योहारों का महत्व कुछ इस प्रकार से है

क्र. दिनांक वार पर्व
1 5 नवम्बर सोमवार धन तेरस
2 6 नवम्बर मंगलवार नरक चौदस
3 7 नवम्बर बुधवार दीपावली
4 8 नवम्बर गुरुवार गोवर्धन पूजा
5 9 नवम्बर शुक्रवार भाई दूज

धन तेरस:

दिवाली के त्यौहार की शुरुआत धन तेरस से की जाती है। यह दिन देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर को समर्पित किया जाता है। इस दिन घर के लिए नई वस्तुएं खरीदने का बहुत महत्व है और लोग गहने, सोने-चांदी आदि के बर्तन व अन्य घर का नया सामान खरीदते हैं।

नरक चौदस:

धनतेरस के अगले दिन नरक चौदस मनाया जाता है इस त्योहार का महत्व स्वर्ग प्राप्ति से है। इस दिन सूर्य उदय से पहले उठकर स्नान कर सूर्य देव की पूजा की जाती है।

दीपावली:

तीसरे दिन दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस दिन घर को बहुत अच्छे से सजाया जाता है। घर के मंदिर वा आंगन में रंगोली बनाई जाती है। तरह तरह के पकवान बनाए जाते हैं, रात को लक्ष्मी की पूजा कर पूरे घर को दीपको से उज्जवल किया जाता है और आतिशबाजियो के साथ जश्न मनाया जाता है।

गोवर्धन पूजा:

दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का महत्व है। इसमें गोवर्धन को छप्पन भोग चढ़ाए जाते हैं। बहुत सी जगहों पर इस दिन अन्नकूट मनाया जाता है और भंडारा दिया जाता है।

भाई दूज:

दीपावली के पांचवें और आखिरी दिन भाई दूज मनाया जाता है। जिस दिन बहन अपने भाई को तिलक लगाती है और भाई बहन को रक्षा का वचन देता है।

 

दीपावली पूजन विधि – Diwali puja vidhi

दीपावली के पर्व पर देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। जिसके लिए घर की साफ सफाई करना बहुत जरूरी है क्योंकि देवी लक्ष्मी सिर्फ साफ-सुथरे स्थानों पर ही निवास करती है।

लक्ष्मी पूजा:
लक्ष्मी पूजा के लिए जिस जिस सामग्री की आवश्यकता है वह कुछ इस प्रकार से है:- गुलाल, अबीर, कमल-फूल, सिंदूर, कलश, अक्षत, नवद्या, दीपक, पंचामृत, जल, गंगाजल, कुमकुम, गुलाब-जल इत्यादि।

लक्ष्मी मंत्र:

ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:

1. पूजा के स्थान को अच्छी तरह से साफ कर लें।
2. स्थान पर गंगाजल की कुछ छींटे मार कर उसे पवित्र कर ले व उस पर साफ सुथरा आसन बिछाये।
3. अब यहां पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की प्रतिमा को स्थापित कर दे।
4. गणपति जी की पूजा कर उनका आशीर्वाद ले।
5. महालक्ष्मी को कमल पुष्प पर आसित कर उनका आवाहन करें।
6. गंगाजल और गुलाब जल से माता लक्ष्मी को शुद्ध करते हुए उनके चरण धोए।
7. माता लक्ष्मी को वस्त्र और आभूषण चढ़ाएं।
8. इसके पश्चात माता लक्ष्मी को कुमकुम, चंदन, सिंदूर, गुलाब, इत्र, अबीर, अक्षत यानि कि चावल कमल का पुष्प अर्पित करें।
9. माता को नैवेद्य अर्पित करें और दीप प्रज्वलित करें।
10. माता लक्ष्मी की पूजा व कथा कर उनकी आरती करें।
11. माता के चरण स्पर्श कर उनसे आशीर्वाद ले।
12. माता लक्ष्मी की पूजा के बाद घर की तिजोरी व पैसे रखने वाली जगह की भी पूजा करे।
13. पूरे घर को दीपको से प्रज्वलित करें।

 

दीपावली के लाभ

– दीपावली से आपसी प्रेम बढ़ता है और बिगड़े हुए संबंध भी सुधर जाते हैं।
– यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
– घरों व आसपास की सफाई की जाती है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी है।
– इसे समाज में एकता बढ़ती है।
– लोग मिलजुलकर जश्न मनाते हैं जिससे मानसिक तनाव खत्म होता है।

 

दीपावली में सावधानियां

दीपावली में सभी को सावधानी बरतने की जरूरत है। दीपावली के दिन बहुत अधिक मात्रा में पटाखे जलाए जाते हैं। जिससे प्रदूषण फैलता है पटाखों की वजह से बड़े बड़े हादसे होने की संभावना भी अक्सर बनी रहती है। दिखावे के लिए लोग फिजूलखर्ची करते हैं और अत्यधिक लाइट्स से घर की सजावट करते हैं, जिससे विद्युत ऊर्जा का भी नुकसान होता है। इसीलिए दिवाली के पर्व को उसकी अच्छाई के लिए ही जाना जाने दें और अपना व दूसरों का नुकसान करने से बचें। दीपावली का यह पर्व सावधानी और विचार के साथ मनाएं।

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