in

जानिये दुनिया का सबसे घातक विष कोन सा है

DUNIA KA SBSE GHATAK VISH

जब भी हमसे विष के बारे में पुछा जाता है तो हमारे मन सबसे पहले उन चीजो की तरफ चला जाता है। जिनके बारे में हमने आज तक सुना हुआ होता है जैसे की विष की बात आते ही हमारा मन या तो साप के बारे में सोचने लगेगा या बिच्छू के या फिर काल कोट के बारे में क्योकि यदि इनमे से कोई भी किसी भी जीव को काट लेता है तो तुरंत ही उसकी मृत्यु हो जाती है। किन्तु इन सब के विष से भी घातक एक और विष होता है जिसके सामने इनमे से कोई भी विष टिकता नही है और उस विष का नाम है – कान में भरा जाने वाला विष

कान का कच्चा होना

जब भी कोई व्यक्ति इस तरह के विष को भरता है। वह इतने मीठे तरीके से इसको भरता है की सामने वाले पता भी नही चलता कान में भरा जाने वाला विष सुनने में तो बहुत मीठा लगता है किन्तु उसके पीछे सुनाने वाले के मन में जो कड़वाहट भरी हुई होती है। उसको दूसरा इंसान कभी देख ही नही पता और उस विष के कान में चले जाने के बाद वह व्यक्ति न तो अपना अच्छा बुरा सोच पाता है और न ही किसी और का ऐसा व्यक्ति किसी योग्य नही रहता इसीलिए इस विष को दुनिया का सबसे घातक विष कहा जाता है।

यह भी पढ़े: MATA SATI KE 51 SHAKTIPEETH

इस संसार में न जाने कितने ही लोग अपने जीवन में आ रही कठिनाइयों से भाग कर आत्महत्या कर लेते है या विष पीकर ईश्वर के द्वारा दिए गये इस अनमोल जीवन को समाप्त कर देते है। ऐसे लोग कायर होते है जो केवल कुछ कठिनाइयों को सामने देख कर घबरा कर ऐसा कर देते है। किन्तु ऐसे लोगो के ऐसा करने से केवल उनका ही जीवन समाप्त होता है। इससे किसी और के जीवन पर कोई प्रभाव नही पड़ता किन्तु जो विष कान में भरा जाता है उससे न जाने कितने ही परिवार न जाने कितने संबंध टूट कर बिखर जाते है। इस तरह के विष के जाते ही व्यक्ति अपने सभी सम्बन्धों का नाश कर लेता है सबसे उसका बैर होता चला जाता है।

kaan ke kacche log

इस विष के कैसे बचा जा सकता है

इस विष से बचने का केवल एक ही मार्ग है यदि कोई आपके कान में ऐसा विष भरता है तो केवल अपने आप पर विश्वास करे। जब तक की खुद आपको उस चीज के बारे स्वम नही पता चला जाता। किसी भी निर्णय पर अपनी राय नही बनाये क्योकि यहाँ पर दोष उस व्यक्ति का नही है। जिसने आपके कान में ये विष भरा होता है या पर दोष आपका खुद का होता है। जिसने बिना सोच विचार के किसी की भी कही बात पर विश्वास कर लिया।

समझने की बात यह है की आज की इस मतलब की दुनिया में सभी लोग केवल अपने ही बारे में सोचते है। केवल अपने आप को ही सुखी देखना चाहते है दूसरों की ख़ुशी को ख़त्म करने के प्रयास में लगे रहते है। ऐसे लोग न तो स्वम खुश रह पाते है और न ही दूसरों को ख़ुशी दे पाते है।

happiness

कुछ लोगो को आपने यह भी कहते हुए सुना होगा की वह व्यक्ति तो कान का कच्चा है। उनके कहने का भी यही अर्थ होता है की वह व्यक्ति किसी की भी बात पर बहुत जल्दी विश्वास कर लेता है और इसी बात का बहुत से लोग फायदा उठाते है और उस व्यक्ति के मन में दूसरों के प्रति विष भर देते है ताकि वो सब से अलग हो जाए और उसकी उन्नति वही पर रुक जाए।

इस कान में भरे जाने वाले विष को काटने का सबसे उत्तम मार्ग प्रेम है। प्रेम के माध्यम से हम किसी भी प्रकार के विष को आसानी से काट सकते है केवल बस आपको इतना करना है की सबके साथ प्रेम से बोलना है और प्रेम के साथ रहना है। ऐसा करने से आप स्वमं के साथ साथ उन सबको भी ख़ुशी दे पाएंगे। जिनको आपसे बहुत उम्मीदें होती है और उन लोगो को एक सबक भी मिलेगा जो ऐसा विष दूसरों के मन में भरते है। वे आपका कभी कुछ नही बिगाड़ पाएंगे उल्टा वे आप लोगो से दूर भागने लगेंगे क्योकि जहाँ प्रेम होता है वहां घृणा, द्वेष, बैर आदि कुछ भी नही होता होता है तो केवल प्रेम।

यह भी पढ़े: कोन है खाटू श्याम बाबा और किनकी करते है सहायता

प्रेम के द्वारा बड़ी से बड़ी परेशानी दूर की जा सकती है यदि आप किसी परेशानी में हों तो सच्चे मन से भगवान को याद करना चाहिये। भगवान या तो स्वम आपकी मदद के लिए आयेंगे या किसी को आपकी मदद के लिए भेज देंगे जो भी व्यक्ति दूसरों की मदद के लिए सदेव आगे आता है उसकी मदद स्वमं भगवान आकर करते है। उनका रूप कोई भी हो सकता है इसलिए सच्चे दिल से अपना काम करते हुए जितना हो सके दूसरों की मदद करते चलना ही असली जीवन है।

आज कल प्रेम को एक व्यवसाय समझा जाने लगा है परन्तु प्रेम कोई व्यवसाय नही है और न ही कोई लेन देन की वस्तु है प्रेम तो समर्पण है, जिसके माध्यम से दो व्यक्ति एक दुसरे में खो जाते है और एक दुसरे का साथ पुरे जीवन भर देते है वहीं अहंकार से भरा हुआ व्यक्ति सबसे दूरी बनाए रखने में विश्वास रखता है, अहंकार मन को क्षुद्र कर देता है अर्थात सिकोड़ देता है, बहुत छोटा बना देता है।

यह भी पढ़े: 9 देवियों की कहानियाँ

जहाँ अहंकार होता है वहां प्रेम नही हो सकता, क्योंकि अहंकार में केवल एक ही व्यक्ति रह सकता है उसको अपने अलावा कोई और नजर नही आता और न ही वह अपने अलावा किसी और की मानता है। अहंकार में व्यक्ति सबसे केवल दूरी बढाता जाता है जहाँ ईर्ष्या और अहंकार है, वहां प्रेम संभव नहीं है। जहां प्रेम है, वहां ईर्ष्या संभव नहीं है।

जिसने भी इस संसार में निस्वार्थ प्रेम बांटा है उसको केवल खुशियाँ ही खुशियाँ और आनंद ही आनंद मिला है। सही मायने में सच्चे प्रेम का मतलब लेना नहीं बल्कि देना होता है। निस्वार्थ प्यार मीरा ने किया, कबीर ने किया,  नानक ने किया, रसखान ने किया। निस्वार्थ प्रेम करने की वजह से ही आज भी इन सबको याद किया जाता है और इतिहास के पन्नो में इसका नाम हमेशा के लिए अमर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

sati

माता सती और उनके 51 शक्तिपीठों की कथा

sbse badi kala

जानिये संसार की सबसे बड़ी कला कोन सी है