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जाने गणेश चतुर्थी के दिन क्या करें और क्या ना करें ताकि गणेश भगवान कभी रुष्ट ना हों

GANESH CHATURTHI PAR KYA KREN KYA NAA KREN

GANESHA

गणेश चतुर्थी का त्यौहार भाद्रपद मास की चतुर्थी से लेकर चतर्दर्शी तक यानी दस दिनों तक चलता है। इस साल गणेश चतुर्थी का त्यौहार 13 सितंबर से शुरु हो रहा है। भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता माना जाता है और इनकी पूजा सबसे पहले की जाती है। इनकी पूजा के प्रसाद में मोदक का भोग लगाया जाता है। क्योकि मोदक गणपति जी को बहुत प्रिय लगते है।

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गणेश जी को मोदक का भोग चढाये

MODAK

शास्त्रों के अनुसार मोदक का अर्थ होता हैं मोद यानी आनन्द देने वाला। जिस भी चीज से मन और तन को आनन्द मिले वही सर्वश्रेष्ठ होती है और तन का आहार हो या मन के विचार उस वस्तु का सात्विक और शुद्ध होना भी जरुरी है, तभी आप जीवन का वास्तविक आनंद पा सकते हैं। भगवान गणेश को मोदक बहुत प्रिय है क्योकि मोदक ज्ञान का प्रतीक होता हैं। यह भी कहते है की जो जातक हजार मोदको से गणेशजी को भोग लगाता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।

गणेश जी को कहा स्थापित करें

गणेश भगवान शुभ कार्यों को संपन्न करने वाले और दुखों को हरने वाले है, क्‍योंकि जहाँ गणेश भगवान रहते है वहाँ से परेशानियां कोसों दूर रहती हैं।

सुख, समृद्धि व प्रगति पाने के लिए यहाँ लगायें

यदि घर के मुख्य द्वार पर गणेश जी की प्रतिमा लगाई हुई हो तो उसके दूसरी तरफ ठीक उसी जगह पर गणेशजी की एक और प्रतिमा इस प्रकार लगाएं कि दोनों गणेशजी की पीठ मिलती रहे। इस प्रकार से चित्र लगाने से वास्तु दोषों का शमन होता है। यदि घर के किसी भाग में वास्तु दोष हो, उस स्‍थान पर घी मिश्रित सिन्दूर से स्वास्तिक दीवार पर बनाने से वास्तु दोष का प्रभाव कम होता है।

GANESH WITH MUSHAK

गणेश जी मुख किस दिशा में नही होना चाहिए

घर या कार्यस्थल के किसी भी भाग में वक्रतुंड की प्रतिमा अथवा चित्र लगाए जा सकते हैं, किंतु प्रतिमा लगाते समय यह ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि किसी भी स्थिति में इनका मुंह दक्षिण दिशा या नैऋत्य कोण में नहीं हो। इसका विपरीत प्रभाव होता है।

किस स्थान पर कैसे गणपति लगाएं

घर के अंदर बैठे हुए गणेशजी और जहा पर काम करते हों या ऑफिस बना रखा हों वहा पर खड़े गणेशजी लगाने चाहिए। घर के केंद्र में, ईशान कोण एवं पूर्व दिशा में भगवान गणेश जी की मूर्ति लगाना शुभ रहता है। घर में सुख, शांति, समृद्धि बनाये रखने के लिए सफेद रंग के गणपति जी की मूर्ति और चित्र लगाना चाहिए।

WHITE GANESH

जब भी कभी कोई मंगल काम करना होता है तो उसके लिए सिंदूरी रंग के गणपति जी की आराधना करना बहुत लाभकारी होता है। विघ्नहर्ता गणेश जी की मूर्ति में उनके बाएं हाथ की ओर सूंड घुमी हुई होनी चाहिए। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि दाएं हाथ की ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी हठी होते हैं तथा उनकी साधना-आराधना करना बहुत कठिन होता है।

यह भी पढ़े: क्यों पूजा जाता है गणेश जी को सर्वप्रथम

गणपति भगवान को मोदक और उनका वाहन मूषक अतिप्रिय है अत: घर में गणपति जी की चित्र या मूर्ति लगते समय ध्यान रखें कि चित्र या मूर्ति में मोदक और चूहा अवश्य होना चाहिए। इस तरह आप गणपति जी का पूजन करके सभी वास्तुदोषों को दूर कर सकते हैं।

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