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जानिए गणेश चतुर्थी की पूजा और मुहूर्त का समय जिससे गणपति करेंगे सभी संकट दूर

ganesh ji

गणेश चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है और इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है इस दिन भगवान गणेश जी की विधि-विधान से पूजन करने पर सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सभी विघ्न बाधाएँ दूर हो जाते हैं श्री गणेश जी की कृपा प्राप्ति से जीवन के सभी असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। इसीलिए भगवान श्रीगणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, विघ्नहर्ता यानी आपके सभी दु:खों को हरने वाले

पुरे देश में गणेश चतुर्थी बड़े धूम धाम से मनाई जाएगी । गणेश भगवान जो की बुद्धि, ज्ञान और विघ्नविनाशक के रूप में पूजे जाते है उनके स्वागत के लिए इस समय उनके भक्तगण सभी तरह से तैयार हो जाते है। ऐसा माना जाता है कि गणपति जी का जन्म मध्यकाल में हुआ था इसलिए उनकी स्थापना इसी काल में होनी चाहिए।

व्रत विधि:-

गणपति के भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और चंद्र दर्शन के बाद उपवास तोड़ते हैं व्रत रखने वाले जातक फलों का सेवन कर सकते हैं. साबूदाना की खिचड़ी, मूंगफली और आलू भी खा सकते हैं

पूजन विधि

गणेश चतुर्थी के दिन सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ और धुले हुए वस्त्र पहनने चाहिए और पूजा के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा को ईशानकोण में चौकी पर स्थापित करना चाहिए उसके बाद भगवान गणेश के सामने हाथ जोड़कर पूजा और व्रत का संकल्प लेना चाहिए और फिर उन्हें जल, अक्षत, दूर्वा घास, लड्डू, पान, धूप आदि अर्पित करने चाहिए और अपनी मनोकामना मांगनी चाहिए, उसके बाद ओम गं गणपतये नम: मंत्र बोलते हुए गणेश जी की आराधना करनी चाहिए

श्री गणेश को बूंदी के 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्‍डुओं का ब्राह्मण को दान दें तथा 5 लड्‍डू श्री गणेश के चरणों में रखकर बाकी को प्रसाद स्वरूप बांट दें। पूजन के समय श्री गणेश स्तोत्र, अथर्वशीर्ष, संकटनाशक गणेश स्त्रोत का पाठ करें। ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा दें। अपनी शक्ति हो तो उपवास करें अथवा शाम के समय खुद भोजन ग्रहण करें।

शाम के समय गणेश चतुर्थी कथा, श्रद्धानुसार गणेश स्तुति, श्री गणेश सहस्रनामावली, गणेश चालीसा, गणेश पुराण आदि का स्तवन करें। संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करके श्री गणेश की आरती करें चंद्र दर्शन मुहूर्त: रात 9:16 बजे पर होगा चंद्रोदय, इसी समय पर अर्घ्य दे सकते हैं. इसके बाद उपवास तोड़ सकते हैं.

भौतिक सुखों की प्राप्ति हेतु गणेश जी पर बेल फल चढाने चाहिए और पारिवारिक विपदा से मुक्ति के लिए गणेश जी पर चढ़े गोलोचन से घर के मेन गेट पर तिलक करें और रुके मांगलिक कार्य संपन्न करने के लिए शक्कर मिली दही में छाया देखकर गणपति पर चढ़ाएं

गणेश चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त

वर्ष 2018 में गणेश चतुर्थी 13 सितंबर 2018, गुरुवार को है और 23 सितंबर 2018, रविवार को अनंत चतुर्दशी है जिस दिन भगवान गणेश जी का विसर्जन होगा। मध्याह्न काल में गणेश पूजन का समय 11 बजकर 03 मिनट  से दोपहर 01 बजकर 30 मिनट तक है । 12 सितंबर 2018, बुधवार को चांद नहीं देखने का समय सायं 04 बजकर 07 मिनट से रात्री 08 बजकर 33 मिनट तक रहेगा और 13 सितंबर 2018, वीरवार को चांद नहीं देखने का समय रात्री 09 बजकर 31 मिनट से रात्री 09 बजकर 12 मिनट तक होगा

चतुर्थी तिथि आरंभ = 12 सितंबर 2018, बुधवार 16:07 बजे।

चतुर्थी तिथि समाप्त = 13 सितंबर 2018, गुरुवार 14:51 बजे।

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