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गायत्री जयंती (GAYATRI JAYANTI) पर जरुर करे गायत्री मंत्र का जाप और चालीसा

GAYATRI Devi

देवी गायत्री को सभी देवताओं की माता माना जाता है और देवी गायत्री को वेद माता के नाम से भी जाना जाता है गायत्री जयंती (GAYATRI JAYANTI) पर माता गायत्री जो सभी वेदों की माता और विश्व माता है उनकी पूजा की जाती है देवी गायत्री को त्रिदेवो अर्थात भगवान ब्रम्हा, विष्णु, और महेश के समान माना जाता है देवी गायत्री को माता सरस्वती और माता लक्ष्मी का अवतार भी माना जाता है

पुराणों के अनुसार माता गायत्री के 5 सिर और 10 हाथ है जिनमे से 4 सिर चारो वेदों को दर्शाते है और पांचवा सिर महाशक्ति के सवरूप को दर्शाता है देवी गायत्री के 10 हाथ भगवान विष्णु के प्रतीक है देवी गायत्री की पूजा करने वाले मनुष्य कभी भी संकट में नही पड़ते और यदि संकट उनकी तरफ आता है तो देवी गायत्री स्वम उनकी रक्षा के लिए आ जाती है

इस वर्ष गायत्री जयंती कब है

गायत्री जयंती वर्ष 2018 में 26 अगस्त दिन रविवार को है गायत्री देवी को इस दिन देवी आदि शक्ति का सवरूप मान कर पूजा की जाती है देवी गायत्री को ज्ञान की देवी भी कहते है क्योकि देवी गायत्री अज्ञानता को हटा कर सब जगह ज्ञान का प्रकाश उजागर करती है देवी गायत्री के ज्ञान के महत्व को ऋषि विश्वामित्र ने पूरी दुनिया में फैलाया

गायत्री जयंती (GAYATRI JAYANTI) क्यों मनाई जाती है

पुराणों के अनुसार ऋषि विश्वामित्र ने पहली बार गायत्री मंत्र को ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की ग्यारस को बोला था तभी से इस दिन को गायत्री जयंती के रुप में मनाया जाता है महागुरु विश्वामित्र ने इस दिन से ही सारे विश्व में ज्ञान के प्रकाश को उजागर किया था गायत्री जयंती का त्यौहार गंगा दशहरे के  दूसरे दिन मनाया जाता है  इसलिए कुछ लोग इसे श्रवण पूर्णिमा के समय में भी मानते है

गायत्री मंत्र का महत्व

देवी गायत्री की पूजा करते समय गायत्री मंत्र के जाप का बहुत महत्व है गायत्री जयंती पर अपने समस्त परिवार के साथ मिलकर माता गायत्री जी भजन कीर्तन और आराधना करनी चाहिए और ऐसा भी माना जाता है गायत्री मंत्र का जप करने के समय और किसी भी मन्त्र को बोलने की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि यह मंत्र सबसे शक्तिशाली और पवित्र मंत्र माना गया है

गायत्री मन्त्र और उसका हिंदी में अनुवाद

यदि कोई मनुष्य दिन में 3 बार गायत्री मन्त्र का जाप करता है तो उसकी सब परेशानियाँ अपने आप दूर हो जाती है माता गायत्री की उन पर कृपा होती है

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात

ॐ का अर्थ है प्रणव (ॐ के उच्चारणमें ही तीनो महा शक्तियों का समावेश होता है)
भूर का अर्थ है मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाला
भुवः का अर्थ है दुख़ों का नाश करने वाला
स्वः का अर्थ है सुख़ प्रदाण करने वाला
तत का अर्थ है वह
सवितुर का अर्थ है सूर्य की भांति उज्जवल
वरेणयं का अर्थ है सबसे उत्तम
भर्गो- का अर्थ है कर्मों का उद्धार करने वाला
देवस्य: का अर्थ है प्रभु
धीमहि- का अर्थ है आत्म चिंतन के योग्य (ध्यान)
धियो का अर्थ है बुद्धि
यो का अर्थ है जो
नः का अर्थ है हमारी
प्रचो- दयात् का अर्थ है हमें शक्ति दें (प्रार्थना)

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