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शुक्र, शनि, राहु और केतु की सम्पूर्ण जानकारी और हमारी कुंडली में प्रभाव और दुष्प्रभाव

GRAH KUNDLI PARBHAV

शुक्र:

शुक्र ग्रह प्रेम, रोमांस, सेक्स, सौंदर्य, संगीत, नृत्य और मनोरंजन स्रोतों के लिए जाना जाता है। इसे मॉर्निंग स्टार के रूप shukrgrahमें भी जाना जाता है और सुबह जल्दी उठ कर उत्तर दिशा में देखे जाने पर इसे आसानी से पहचाना जा सकता है। यह आकाश का सबसे चमकीला ग्रह है। यह आकर्षण, प्रेम, धन, ज्ञान और समृद्धि का ग्रह है।

 

ज्योतिष में वैभव, ऐश्वर्य और सुख के लिए मुख्य रूप से शुक्र जिम्मेदार होता है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में बिना शुक्र के, न तो अच्छा वैवाहिक जीवन मिल सकता है, न ही किसी तरह का सुख मिल सकता है। अन्य ग्रह सुविधा और साधन तो दे सकते हैं, पर सुख नहीं दे सकते हैं।

कुंडली में शुक्र की स्थिति से विवाहित जीवन सुख और विलासिता का भी अनुमान लगाया जाता है।
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र ग्रह अच्छी स्थिति में नहीं होता तो वह शारीरिक अपील, सौहार्दपूर्ण व्यवहार और प्रेम या विवाहित जीवन में विफलता की प्रवृत्ति से ग्रस्त है।
आंख, नाक, ठोड़ी, गले, यौन अंग, गुर्दे, मूत्राशय आदि पर शुक्र के नियम बुरी तरह से रखे गए। शुक्र को एक लाभकारी, स्त्री और सौम्य ग्रह माना जाता है।

कारक:

शुक्र ग्रह वैवाहिक संबंधो, पत्नी, इन्द्रिय भोग विलास, सभी प्रकार की सुख सम्पति, आभूषणों सुंदरता, सुगन्धित वस्तुओ, पुष्पों, सजावट का समान, डिज़ाइनर वस्तुओ, सुन्दर शरीर, आंखें देखने में आकर्षित, गाना बजाना, नशीले पर्दार्थो, आँखें, आंते, अपेंडिक्स, मधुमेह आदि का कारक है।

शक्तिशाली शुक्र के प्रभाव:

व्यक्ति बहुत आकर्षक होता है, दिखने में कैसा भी हो पर व्यवहार और स्वभाव अदभुत होता है। ऐसे लोग बहुत ज्यादा नाम-यश अर्जित करते हैं और मीडिया,फिल्म अथवा कला के क्षेत्र में होते हैं। ऐसे लोगों को स्त्रियों से बहुत सम्मान मिलता है और दाम्पत्य जीवन सुखद होता है।ऐसे लोगों को नींद बहुत अच्छी आती है , सोने में तेज होते हैं । सुख और सुविधा बड़ी आसानी से मिल जाती है।

 

कमजोर शुक्र के प्रभाव:

व्यक्ति बिलकुल आकर्षक नहीं होता, न तो रूप रंग से और न ही परिधान से । व्यक्ति बहुत साफ़ सुथरा और अच्छे तरीके से नहीं रहता। सुविधा कितनी भी जुटा ले पर सुख नहीं पा सकता। अगर पुरुष का शुक्र कमजोर है तो उसे स्त्री सुख कभी नहीं मिल सकता। साथ ही दाम्पत्य जीवन में सुख आ ही नहीं सकता। ऐसे व्यक्ति ज्यादातर कम भाव और प्रदर्शन में ही लिप्त रहते हैं।

 

 

शुक्र अच्छा होने पर व्यवसाय:

वस्त्र उद्योग, रेडीमेड वस्त्र, भोजन, रेस्तरां, होटल, टूर एंड ट्रैवल्स, संगीत, थिएटर, कविता, साहित्य, सिनेमा, सेक्स उद्योग, फिल्म उद्योग, अभिनेता, अभिनेत्री, ब्यूटी पार्लर, आभूषण व्यवसाय, कॉस्मेटिक की दुकानें शामिल हैं। वेशभूषा, ज्योतिष, पेंटिंग, फोटोग्राफी और अन्य रचनात्मक कार्य आदि।

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शनि:

हिंदू ज्योतिष में, शनि का अर्थ है जो धीरे-धीरे चलता है- शनैः शनैः। ग्रह शनि को भी उनके स्वभाव के नाम पर रखा गया है। वह बहुत धीरे चलता है। राशि चक्र को पार करने में उन्हें लगभग ढाई साल लगते हैं। दरअसल, शनि एक बहुत बड़ा ग्रह है और इसे पृथ्वी से काफी दूरी पर रखा गया है। इस दूरी के कारण, हम उसे धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए पाते हैं।

 

पौराणिक रूप से, शनि भगवान सूर्य और उनकी पत्नी छाया (छाया) के पुत्र हैं। शनि ने अपने पिता के साथ संबंधों में तनाव डाला है। शनि को शुष्क और शीतल ग्रह माना जाता है। वह पुराने लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। ज्योतिष में शनि को एक पुरुष ग्रह माना जाता है। अनुकूल स्थिति में हो, तो वह एक व्यक्ति को बहुत धन और प्रसिद्धि देता है। प्रतिकूल स्थिति में यह ग्रह जीवन में हानि, दुःख, दरिद्रता, दुःख, दुर्घटनाएँ और बाधाएँ देता है।

शनि व्यक्ति की उम्र और लंबी उम्र से जुड़ा होता है। वह लंबे जीवन देता है यदि कुंडली में अनुकूल रूप से रखा गया हो।

शनि को वास्तव में एक शिक्षक माना जाता है। वह एक शिक्षक की तरह व्यवहार करता है, जो छात्रों के गलत करने पर उन्हें दंडित करता है और उनके अच्छे कामों के लिए उन्हें पुरस्कृत करता है।

शनि न्याय का ग्रह भी है। वह न्यायाधीश की तरह व्यवहार करता है और व्यक्ति के कर्मों के आधार पर उसे न्याय देता है। जो व्यक्ति पाप और बुरे कर्म करता है, उसे उसी के अनुसार फल मिलता है।

पैरों के शरीर में सभी बड़ी हड्डियां शनि द्वारा शासित होती हैं। शनि, अपने स्वभाव के अनुसार, लंबी अवधि के रोग देता है। इस तरह की बीमारियों को दीर्घकालिक और मुश्किल से इलाज योग्य माना जाता है। एक व्यक्ति को लंबी बीमारी के साथ सहन करना पड़ता है।

शनि के प्रभाव में रहने वाले व्यक्ति को जीवन में कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। शनि मजदूर वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है जो थोड़ी आजीविका कमाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। भूमि और पृथ्वी के नीचे के सभी उत्पाद शनि द्वारा शासित हैं। जैसे, सभी खनन वस्तुओं पर उसका शासन है। लोहा उसकी धातु है और उसका रंग काला / नीला है।

शनि अनुशासन और सख्ती में विश्वास करता है। हिंदू ज्योतिष में, शनि का बहुत महत्व है। उसकी सख्ती और अनुशासन के कारण लोग इस ग्रह से डरते हैं।

जब शनि की साढ़े साती और ढैया चलती है तो उस व्यक्ति को जीवन में कई कठिनाइयों और समस्याओं का सामना करना पड़ता है और किसी भी चक्र से कोई राहत नहीं मिलती है। ज्योतिषीय रूप से, बोलना, तो वह समय है जब व्यक्ति कठिन समय से गुजरते हुए आत्मज्ञान का अनुभव करता है। एक व्यक्ति कष्ट सहकर, अपने पापों को संतुलित करता है। यहाँ हम मंगल और शनि के स्वभाव में अंतर को समझ सकते हैं।

मंगल के प्रभाव में किसी व्यक्ति के सामने आने वाली कठिनाई उसे डकैत या चोर बना सकती है। लेकिन, शनि के साथ ऐसा नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में, शनि एक व्यक्ति को आध्यात्मिकता की ओर मोड़ देगा और उसे यह सोचने के लिए मजबूर करेगा कि उसके दुख का कारण क्या है अर्थात् बुरे कर्म उसकी वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। धीरे-धीरे वह पवित्र हो जाता है।

कारक:

शनि ग्रह जीवन, आयु, मृत्यु, दुःख, दरिद्रता, अनादर, निर्धनता, चापलूसी, बिमारी, अनुचित व्यवहार, प्राकृतिक आपदाओं, मृत्यु, बुढ़ापे, रोग, पाप, भय, कारावास, नौकरी, विज्ञान, तेल-खनिज, कृषि, त्याग, उचाई से गिरना, अपमान, ऋण, कठोर परिश्रम, लकड़ी, कार्यो में देरी लाना, सेवा विभाग, तेल, विदेशी भाषा, लोभ, लालच, अहंकार, उदासी, थकान इत्यादि कारक है।

शक्तिशाली शनि के प्रभाव:

गहरा विचार करना, कम बोलना, अति व्यवस्थित बर्ताव, परिश्रम बहुत करना, किसी भी विषय पर गंभीरता से बोलना, लेनदेन में खुले दिल से व्यवहार, सुखमयी जीवन, अभ्यासशील वृति, के विशेष गुण होते है। सब तरह से व्यवस्थित स्वभाव होता है। घर बहुत सुन्दर होता है।

ऐसे व्यक्ति लोककल्याण के लिए प्रयतनशील रहते है। अभिमान नहीं होता। ज्ञान, प्रेम, पवित्रता ये भावनाये विकसित होती है। किसी भी शास्त्र की तह तक खोज करने वाले अधिकार की इच्छा न करते हुए भी अधिकार मिलने वाले, स्वाभिमानी, मित्र काम होते है, हठी, मेहनत से काम करने वाले, अपने विचार गुप्त रखने वाले, राष्ट्रिय कार्य में भाग लेने वाले, कानून का अभ्यास, मधुर बोलने की प्रवृति ये गुण होते है।

 

कमजोर शनि के प्रभाव:

 

लोगो से शत्रुत्व करना, किसी पर विशवास नहीं करते, डरपोक होना, हमेशा किसी संकट में होने वाला बर्ताव, कंजूस, अपना सच्चा स्वरूप छुपाना, आलसी प्रवृत्ति, स्वार्थी, स्त्रियों की इज्जत न करने वाला, झूठ बोलना, असंतोष, हमेशा रोनी सूरत रहना, ऐसे व्यक्ति के विशेष गुण है। ऐसे व्यक्ति अपने कार्य दुष्टता से करते है हम ही ठीक है ऐसे समझते है, दुष्टता और प्रतिशोध की भावना से काम करते है।

अधर्मी प्रवृति के होते है, गाली गलौज खुल कर करते है, बहुत खाने वाले, लोभी, झगड़ालू और ठग होते है। थोड़ी थोड़ी बचत करते है लेकिन बड़े खर्चे रोक नहीं सकते। व्यवसाय में चिकित्सक, सचझूठ में भेद न करने वाले, लोगो की तरक्की से जलने वाले, कठोर बोलने वाले यह इस व्यक्ति का स्वरुप है।

विचित्र मनोवृति, स्त्रियों की अभिलाषा, पाप पुण्य की परवाह न करने वाले, बुरा व्यवहार, अच्छे कामो में विघ्न डालना, अपने सुख और फायदे के बारे में सोचना, दुसरो की गलतियां ढूंढते रहना, दुसरो के धन पर लालसा रखना, सत्ता मिलते ही जुल्म और दुराचार करना, उपाधियों की प्राप्ति के लिए झूठ का सहारा लेना, गरीब होना आदि गुणधर्म पाए जाते है।

शनि अच्छा होने पर व्यवसाय:

बैंक, ब्याज का धंधा, मिल, कारखाने, प्रिंटिंग प्रेस, कोयले का व्यापार, इस्टेट ब्रोकर, बीमा व्यवसाय, लोहे की चीज़े, कृषि विद्यालय, न्यायधीश, जिला परिषद्, विधान सभा आदि के सदस्य, जमींदार, खनिज पदार्थ, आदि से जुड़े व्यापार कर सकते

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राहु और केतु:

राहु पुरुष प्रवृति का ग्रह है। गुरु था शुक्र के मिश्रण जैसा स्वभाव है। यह भाग्यदायी है। यह शुभ ग्रह के साथ हो तो उनके शुभ फल अधिक मिलते है अशुभ ग्रह के साथ हो तो अशुभ फल कम मिलते है किन्तु केतु अशुभ ग्रह के साथ हो तो उस ग्रह की अशुभता को और बढ़ा देता है। शुभ ग्रहो से प्राप्त होने वाले फलो में केतु की युति से आकस्मिक विघ्न आते है बना-बनाया काम बिगड़ जाता है। शुभ ग्रह केंद्र में या बहुत अच्छे योग में हो तभी केतु का यह दोष दूर हो सकता है।

 

rahuketugrahसभी ग्रहों, जिनकी मैंने ऊपर चर्चा की है, का भौतिक और दृश्य अस्तित्व है। लेकिन राहु और केतु का कोई भौतिक आकार नहीं है। ये आकाश में काल्पनिक बिंदु हैं। लेकिन फिर भी, राहु को सबसे शक्तिशाली माना जाता है और हमारे ऋषियों और द्रष्टाओं द्वारा इसे ग्रह का दर्जा दिया गया है। अधिकतर, राहु पुरुषोचित प्रभाव देता है।

 

राहु को एक गंदा ग्रह माना जाता है जो आलस्य, गन्दगी, देरी और बाधा का संकेत देता है। किन्तु ऐसे बिलकुल भी नहीं है राहु शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के फल देता है देखा जाता है के राहु किस राशि में बैठा है कौन से घर में बैठा है ये सब स्थान देखे जाते है तब पता लगता है के राहु अशुभ है या शुभ। राहु एक राशि चक्र में 18 महीने तक रहता है।

हिंदू पौराणिक कथाओं में एक दिलचस्प कथा है जो बताती है कि राहु और केतु कैसे अस्तित्व में आए। एक बार दोनों, देवताओं और राक्षसों ने अमृत पैदा करने के लिए एक गठबंधन बनाने पर सहमति व्यक्त की जो उन्हें अमरता प्रदान कर सके। समुद्र मंथन करके अमृत प्राप्त किया जाना था। जब देवताओं को अमृत परोसा जा रहा था, एक दानव, एक भगवान के रूप में प्रच्छन्न कर सूर्य और चंद्रमा के बीच बैठकर अमृत प्राप्त करने के प्रयास में लगा हुआ था। और दानव ने अमृत ग्रहण कर लिया था। दानव को सूर्य और चंद्रमा द्वारा मान्यता प्राप्त थी।

सूर्य और चन्द्रमा ने भगवान विष्णु से दानव की शिकायत की। भगवान विष्णु ने तुरंत अपने चक्र से उसका सिर काट दिया। लेकिन दानव ने पहले से ही पर्याप्त अमृत का सेवन कर लिया था। राक्षस का सिर, जिसे राहु के नाम से जाना जाता है, अमर हो गया। और दानव के शेष बचे हुए भाग को केतु के रूप में जाना जाता था। तभी से राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा के प्रबल शत्रु बन गए। सूर्य और चंद्रमा ग्रहण राहु और केतु के कारण होते हैं जो सूर्य और चंद्रमा को निगलते हैं जब वे उनके पास आते हैं। इस तरह राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा से अपना बदला लेते हैं।

राहु एक शक्तिशाली और पुरुष ग्रह है। यह राजनेताओं का अनुकूल ग्रह है। वह उन्हें निष्पक्ष या अनुचित किसी भी माध्यम से राजनीति में उठने का महान अवसर और शक्ति देता है। वह चोरों, जेलों, जादूगरों, सांपों, जहर और अलग-थलग स्थानों आदि पर भी शासन करता है। राहु के पास अचानक धन प्रदान करने की शक्ति भी होती है।

राहु के कारकत्व:

राहु ग्रह पिता, दादा, विदेश यात्रा, समाज व् जाती से अलग लोग, सांप का काटना, खुजली, हड्डियां, विदेश में जीवन, तीर्थ यात्राओं, अकाल, त्वचा पर दाग, चर्म रोग, सांप और सांप का जहर, अनैतिक महिला से सम्बन्ध, व्यर्थ के तर्क, दर्द और सूजन, पीठ पीछे बुराई करने वाले, बुरी आदतों का आदि, पथरी, आत्मसम्मान, शराब, झगड़ा आदि का कारक ग्रह है।

शक्तिशाली राहु के प्रभाव:

यह व्यक्ति सहनशील होते है। काम करने से पहले बोलना पसंद नहीं करते,परख कर काम करते है। मान-सम्मान की इच्छा रखने वाले। तीव्र बुद्धि का, अपनी इच्छाओ की पूर्ति के लिए बहुत मेहनत करने वाले। यह दूसरे के कामो में दखल नहीं देते और न ही अपने काम में दुसरो की दखलअंदाजी बर्दाश्त करते है। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते है। सामजिक व् राजनीति सुधार की कोशिश करते है। अपने काम में मगन, वादविवाद में कुशल, दुसरो से काम करवाने में कुशल, दुसरो की बातों में न आने वाले, जीवन में सफल, नम्रता से बर्ताव, परिवार के बारे में सोचने वाले, धैर्यवान, बुद्धिमान, पैसे के लेन-देन में कुशल।

कमजोर राहु के प्रभाव:

कुंडली में राहु अशुभ योग में हो तो व्यक्ति बुद्धिहीन, दुष्ट, अपने बारे में सोचने वाले, अभिमानी, अविश्वसनीय, झूठे आचरण से परिपूर्ण, अपनी ही बात को ऊपर रख कर दुसरो को ताने देने वाला, दुसरो का अहित करने की इच्छा करने वाला, अति अभिमानी होता है। यदि किसी कुंडली में नकारात्मक रखा गया है, तो वह भ्रम, अवसाद और भावनात्मक असंतुलन पैदा कर सकता है।

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केतु:

कुंडली में केतु हमेशा राहु से सप्तम स्थान में होता है। इनके अलग अलग फल देखे तो एक दूसरे से बिलकुल अलग आते है। अत: केतु के स्वतंत्र फल नहीं होते केतु के फल राहु के ही फलानुसार समझना चाहिए।

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