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गुरु पूर्णिमा (GURU PURNIMA) क्यों मानते है और इसका क्या महत्व है

GURU PURNIMA KYU MANATE HAI | GURU PURNIMA IN HINDI

GURU PURNIMA

दोहा

गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा ।।
गुरु साक्षात् परम ब्रह्मा, तस्मै श्री गुरवे नमः ।।

इसका अर्थ यह है की – गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है गुरु ही साक्षात परब्रह्म है । ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं ।

गुरु का महत्व जीवन में सबसे अधिक होता है क्योकि बिना गुरु ज्ञान के इस संसार रूपी सागर को कोई भी पार नही कर सकता । गुरु ही एक मात्र माध्यम है जिसके द्वारा हम अपने जीवन में सफल हो पाते है । गुरु पूर्णिमा (GURU PURNIMA) को पूरे भारत देश में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है और इसके द्वारा यह सिखाया जाता है की अपने गुरु का हमेशा आदर करना चाहिये क्योकि माँ से बड़ा स्थान गुरु को दिया जाता है । माँ के पालन पोषण करने के बाद बच्चे के सम्पूर्ण जीवन का दायित्व गुरु का होता है । उसे जैसी शिक्षा मिलेगी वह वैसा ही बन जायेगा

गुरु पूर्णिमा (GURU PURNIMA) 2018

GURU PURNIMA 2018

महर्षि वेदव्यास भारतवर्ष के प्रथम विद्वान और हिन्दू गुरु थे । जिन्होंने हिंदू धर्म के चारों वेदों की रचना की थी । सिख धर्म में भी लोग अपने 10 गुरुओं की वाणी को ही जीवन का वास्तविक सत्य मानते हैं । कहा जाता है कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु वेदव्यास का जन्म हुआ था । उनके सम्मान में ही आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है और वर्ष 2018 में गुरु पूर्णिमा (GURU PURNIMA) 27 जुलाई को है

क्या किया जाता है गुरु पूर्णिमा (GURU PURNIMA) के दिन

गुरु पूर्णिमा पर सभी लोग अपने गुरु की पूजा करते हैं । गुरु कोई भी हो सकता है जैसे उन्हें शिक्षा देने वाले अध्यापक, माता-पिता और भाई-बहन। गुरु पूर्णिमा पर सबसे पहले अपने माता पिता और बड़ो का आशीर्वाद लेना चाहिये और उसके बाद अपने गुरु को कुछ उपहार आदि दे कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। क्योकि जिस प्रकार सूर्य की गर्मी से तपती हुई भूमि को बारिश के पानी से शीतलता प्रदान होती है । उसी प्रकार गुरु के भी जीवन में आने से शिष्य का जीवन अंधेरे से उजाले की ओर चला जाता है ।

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गुरु पूर्णिमा (GURU PURNIMA) का महत्व

आषाढ़ पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा (GURU PURNIMA) कहा जाता है । गुरु पूर्णिमा  के चंद्रमा की तरह होते हैं । जो हमेशा प्रकाश मान रहते हैं और अपने शिष्यों को जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाते रहते हैं । जिस प्रकार आषाढ़ मास में चंद्रमा बादलों से घिरा रहता है । उसी प्रकार गुरु भी बादल रूपी शिष्यों से घिरे रहते हैं ।

शिष्य बहुत तरह के हो सकते हैं जैसे कुछ शिष्य अपने गुरु को अपना आदर्श मानते है और कुछ उनका निरादर करते है । परंतु एक अच्छा गुरु अपने सभी शिष्यों को अंधेरे से उजाले में लेकर आता है और उनके भविष्य में चंद्रमा की चमक ला सकता है । इसीलिए गुरु को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है और आषाढ़ पूर्णिमा का भी महत्व इसीलिए अधिक है । इसमें गुरु की तरफ इशारा किया गया है और गुरु के महत्व को बताया गया है ।

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