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हरतालिका तीज का महत्व और जाने क्यों खास होती है इसकी पूजा

HARTALIKA TEEJ VRAT 2018

hartalika teej

हरतालिका तीज का व्रत अखंड सौभाग्य के लिए किया जाता है इस वर्ष हरतालिका तीज 12 सितंबर को है। भाद्र मास की शुक्ल तृतीया बुधा के चित्रा नक्षत्र को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है जो की गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले होता है, जिसमें सभी महिलाएं अपने अपने पतियों की लम्बी आयु, सुख- सौभाग्य और निरोग्यता के लिए माता गौरी की पूजा करती हैं।

इस बार हरतालिका तीज की पूजा सुबह से ही की जा सकती है और यह पूजा शाम के 6 बजकर 46 मिनट तक की जा सकेगी। इस बार यह पूजा इसलिए भी खास है क्योकि इसी दिन चतुर्थी चंद्र पूजन (चौरचन) भी है। इसी वजह से इस पूजा का बहुत महत्व है। इसके बाद 13 सितंबर से भगवान गणेश जी की पूजा की शुरुआत हो जाएगी और जो 23 सितंबर तक चलेगी।

हरियाली तीज का पर्व नई दुल्हनों और शादीशुदा औरतों के लिए होता है कुछ और पर्व भी इसी पर्व से मेल खाते है जैसे कजरी तीज और करवा चौथ आदि पर भी सुहागने अपने पति के लिए व्रत रखती है और पति की लंबी आयु के लिए भगवान से प्रार्थना करती है। ऐसी भी बताया गया है कि भगवान शंकर को पाने के लिए माता पार्वती ने भी यह व्रत किये थे  जिसमें उन्होंने अन्न और जल तक ग्रहण नहीं किया था।

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इसलिए इस व्रत में महिलाओं को अन्न, जल और अन्य कुछ भी ग्रहण नही करना होता। यह व्रत निर्जला किया जाता है इसमें महिलाएं भगवान शिव, माता पर्वती और गणेश जी की पूजा करती है। बिहार और उसके आस पास के क्षेत्रों में इस व्रत का काफी महत्व है और इन क्षेत्रों में महिलाएं गीली, काली मिट्टी या बालू रेत से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की मूर्ति बनाकर पूजा करती हैं। इस व्रत को पुरे नियम के साथ किया जाना चाहिए क्योकि इस व्रत का यह नियम है कि इसे एक बार प्रारंभ करने पर हर साल वैसे ही पूरे नियम से किया जाता है।

हरतालिका तीज के पूजन के लिए सामग्री

गीली काली मिट्टी या बालू रेत भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश भगवान की प्रतिमा बनाने के लिए और बेलपत्र और शमी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल एवं फूल, तुलसी का पत्ता, मंजरी, जनैव, नाडा, वस्त्र, और फूल पत्ते आदि भगवान को अर्पण करने के लिए।

सुहाग सामग्री में चूड़ी, मेहंदी, सिंदूर, काजल, बिंदी, बिछिया, कंघी, माहौर आदि का पर्योग किया जाता है।

पंचामृत बनाने के लिए घी, दही, शक्कर, दूध, शहद आदि का पर्योग किया जाता है।

इस पर्व पर सभी महिलाएं एकत्रित होकर हरतालिका व्रत की कथा पढ़ती है और सुनती है और भजन कीर्तन के साथ अपने व्रत को सम्पूर्ण करती है और रात्री में रतजगा भी किया जाता है।

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