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जीवन में सही निर्णय कैसे लें जाने श्री भगवद गीता के माध्यम से

Decision Making Lessons from Shri Bhagvad Gita By Lord Krishna

LIFE LESSONS

जय श्री कृष्णा | कभी-कभी हम अपने जीवन में ऐसे दोराहे पर खड़े हो जाते है या ऐसी परिस्थिति  में होते है जहा से सिर्फ एक सही डिसीजन ही हमे सत्य के मार्ग पर चलते रहने में मदद कर सकता है | आप में से कुछ लोग श्री भगवत गीता को केवल एक धार्मिक पुस्तक मानते हैं | पर सच यह है श्री भगवत गीता एक ऐसी किताब है | जो आपके जीवन को सही दिशा दे सकती है | बहुत से लोग श्री भगवत गीता को एक साधारण सी बुक मानते है | लेकिन भगवत गीता एक सर्वश्रेष्ठ किताब है |

जीवन में सही निर्णय लेने के कुछ तरीके श्री भगवत गीता में श्री कृष्णा ने बताये है | श्री भगवत गीता कैसे हमें डिसीजन लेने में मदद कर सकती है | सबसे पहले हमे यह जानना होगा की अगर आपको कोई चीज अच्छा फील करा रही है और दूसरी चीज आपको बुरा फील कर आ रही है तो आप किसका साथ दोगे | मैं दावे के साथ कह सकता हूं ज्यादातर लोगों का जवाब होगा जो चीज अच्छा फिर आ रही है उसी को चुनेंगे |

अब जानते है कुछ ऐसे तरीकों के बारे में जिनसे सही निर्णय लिया जा सकता है |

1. परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेना

mahabharat

महाभारत में अर्जुन युद्ध नहीं लड़ना चाहते थे क्योंकि उनको अपने गुरु, भाईयों और मित्रो को युद्ध में खोने का डर था | मगर श्री कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध लड़ने का मार्ग दिखाया | हमें कभी भी कोई भी निर्णय भावनाओ में बह कर नहीं लेना चाहिये क्योंकि भावनाए तो टेंप्रेरी होती है | श्री भगवत गीता के छठे चैप्टर में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि हमें अपने माइंड को बैलेंस करके चलना चाहिए | इसलिए आप कोई भी निर्णय मत ले जब आप बहुत ज्यादा खुश है यह बहुत ज्यादा दुखी है ज्यादा खुश और ज्यादा दुखी होने की स्थिति में लिया गया निर्णय गलत ही साबित होगा |

आपने अक्सर देखा होगा लोग जब बहुत ज्यादा खुश होते हैं आप उनसे कुछ भी मांग लो वह दे देते हैं और जब लोग बहुत ही ज्यादा दुखी होते हैं तब वह ठीक से बात भी नही करते अगर आप उनका हाल भी पूछ लो तो लोग उसका भी बुरा मान लेते हैं | ज्यादा खुश और ज्यादा दुखी होने पर हमारा मन कुछ नॉर्मल से थोडा अलग होता है और इसी कारण से ज्यादा ख़ुशी और ज्यादा दुखी वाले टाइम पर लिया गया डिसीजन पर हमें पछताना पड़ सकता है |

2. क्रोध या बंधन की वजह से कभी निर्णय मत लेना

निर्णय लेते वक्त अपने आपसे पूछो कहीं यह निर्णय किसी क्रोध या किसी बंधन में होने की वजह से तो नहीं ले रहा हूँ | श्री भगवत गीता में तो यह 5000 साल पहले ही लिख दिया गया था की निर्णय लेते वक्त जरा सोचिए की कही इस निर्णय की वजह से आपको पछताना तो नही पड़ेगा और क्रोध में लिए गए निर्णय के कारण लोग आज कल मर्डर तक कर देते हैं |

निष्काम कर्म

3. कर्म करिए फल की चिंता मत करिये

श्री भागवत गीता में एक शब्द बार बार दोहराया गया है वह है निष्काम कर्म मतलब कर्म करिए फल की चिंता मत करिए | यही है असली कर्म योगी होने की निशानी | अब सोचिए आप ने कितने अच्छे काम करने छोड़ दिए जब आपको रिजल्ट नहीं मिला | कुछ दिन तो मॉर्निंग वॉक पर गए पर जब वेट कम नहीं हुआ फिर आपने जाना छोड़ दिया | तो निर्णय लेते वक्त याद रहे की आपने अपना कर्म करना है अच्छे से रिजल्ट या फल की चिंता नहीं करनी | आप तो बस लगे रहो फल आपके हाथ में नहीं है कर्म आपके हाथ में है |

4. बदलाव एक कटु सत्य है

बदलाव तो आना ही है श्री भगवत गीता में पहले ही लिखा गया था बदलाव से मत डरे | अगर आपके निर्णय लेने से बदलाव आ रहा है तो इससे घबराने की जरूरत नहीं है | आपको जरूरत है इस कंफर्ट जोन से बाहर आकर सोचने की | युद्ध लड़ना अर्जुन के लिए नई चीज है और वह इसके लिए तैयार नहीं है लेकिन बदलाव तो आना ही है और इसकी जरूरत भी है | अर्जुन को यह डर है कि वह युद्ध करके अपनों को खो देंगे | इसी से बाहर निकलने में श्री कृष्ण अर्जुन की मदद करते हैं

5. अपने निर्णय पर विश्वास रखे

कोई भी निर्णय लेने से पहले यह सोचना बहुत जरूरी है कि आपको यह सही लग रहा है या नही क्योकि आपके बिना आपका निर्णय कुछ नही है और अगर आपको अपने निर्णय पर विश्वास नही होगा तो थोड़ी देर बाद ही उस निर्णय पर कायम ही नहीं रह पाओगे | इसलिए खुद पर और भगवान पर विश्वास रखें

KRISHNA THOUGHTS

जरा सोचिए हम श्री कृष्ण को भगवान क्यों मानते हैं क्योंकि उनके कर्म और एक इंसान के कर्म में बहुत फर्क है | क्योकि श्री कृष्ण ने हमेशा अपने निर्णयों को सबसे उपर रखा है | जिसकी वजह से आज सारी दुनिया उनको पूजती है | भगवान श्री कृष्ण यह भी बताते हैं जो भी चीज समाज के सभी लोगों के लिए अच्छी नहीं है वह आपके लिए अच्छी हो ही नहीं सकती |

अगर आपको लगता है एक काम करने से आप का तो भला होगा परन्तु व्ही काम करने से दूसरों का नुकसान होगा वह काम करने का निर्णय मत लीजिये | आप भी अपनी प्रॉब्लम को अपने मन में मत रखिए अगर आपकी लाइफ में कोई भी व्यक्ति है जो समझदार है आप उससे अपनी परेशानियों को किसी के साथ साँझा कीजिए | एक स्टूडेंट के लिए यह व्यक्ति टीचर, फ्रेंड या माता पिता कोई भी हो सकता है | श्री भगवत गीता को पढ़ने से भी कई बार आपको अपनी परेशानियों का हल भी मिल जाता है और सही डिसीजन लेने में मदद भी होती है |

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