in

कालसर्प दोष के लक्षण, कारण और उपचार

kaal sarp yog ke lakhan, karan aur upay 

हिन्दू धर्म के अनुसार हमारी कुंडली में बहुत से दोष हैं। जिनमें से कालसर्प दोष किसी कुंडली में सबसे गंभीर ग्रहों की स्थिति में से एक है। जिससे पीड़ित व्यक्ति के जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

इस योग दोष के समय चुनौतियों और पीड़ाओं से भरे जीवन में एक व्यक्ति बहुत मुश्किल समय से गुज़रता है। जब सभी सात ग्रह राहु और केतु के मार्ग में आते हैं तो कालसर्प दोष का गठन होता है।

 

कालसर्प दोष (kaal sarp dosh) के लक्षण

कालसर्प दोष के संकेत जो इस योग को कुंडली में दर्शाते हैं:

  • इसमें व्यक्ति अक्सर अपने सपने में मृत लोगों की छवियों को देखता है यदि किसी की कुंडली में कालसर्प दोष का योग है, तो वह अपने मृत पूर्वजों या हाल ही में परिवार को छोड़ कर गए सदस्यों को अपने सपनो में देखेगा।
  • ऐसा कहा जाता है कि जो लोग कालसर्प दोष के प्रभाव में होते है, वह अपने परिवार और समाज के प्रति समर्पित हैं। वे सामाजिक और निःस्वार्थ स्वभाव के होते हैं। वे लालची या आत्म केंद्रित नहीं होते।
  • कुंडली में मौजूद इस योग के कारण उन्हें जीवन में संघर्ष करना पड़ता है और उनको किसी की ज़रूरत के समय अकेला महसूस होता है।
  • ऐसा माना जाता है कि अपनी कुंडली में इस योग से पीड़ित लोगों को बच्चों से संबंधित समस्याएं होंगी। कुछ लोगों को बच्चों को पैदा करने में मुश्किल होगी, तो किसी के पास बुरे बच्चे होंगे जो लगातार समस्याएं पैदा करेंगे।
  • काल सरप योग के प्रभाव में सांप के काटने का बहुत बड़ा डर बना रहता हैं। वे अक्सर सांपों द्वारा खुद को जकड़े जाने के सपने देखते हैं। वे aero acrophobia से भी पीड़ित हो सकते हैं – ऐसे में व्यक्ति को ऊँचे या अकेले स्थानों से डर लगता है।
  • व्यक्ति को महसूस होता है की कोई उसे परेशान कर रहा है।
  • वे अपने घर और जल निकायों जैसे तलाब, झरने, झील का भी सपना देख सकते हैं।

 

कारण

कुंडली में कालसर्प दोष का योग क्यों बनता है?

ऐसा कहा जाता है कि “हम जो बोते हैं वो काटते हैं”, यानी हमें अपने कर्मों के अनुसार परिणाम प्राप्त होता है। यह काल सरप योग के लिए भी बहुत सच है। अगर किसी व्यक्ति ने अपने जीवनकाल के दौरान एक निर्दोष जानवर या सांप की हत्या की है, तो उसके अगले जन्म में उसकी कुंडली में कालसर्प योग होगा।

यह भी कहा जाता है कि कुंडली में कालसर्प योग वाले लोगों को अपनी अपूर्ण इच्छाओं को पूरा करने के लिए पुनर्जन्म लेना पड़ता है।

 

यह भी पढ़े: छात्रों के लिए शक्तिशाली सरस्वती मंत्र

काल सरप दोष के लिए उपचार

कई भारतीय ज्योतिषी काल्पसर्प योग के दुष्प्रभावों को कम करने के उपाय सुझाते हैं।

  • अश्लेषा नक्षत्र, रविवार और पंचमी के दिवस पर नागराज और अन्य सांप देवताओं की प्रार्थना करना फायदेमंद होता हैं। नाग पंचमी पर उपवास और इस दिन नाग देवता की पूजा करना या भगवान कृष्ण से प्रार्थना करना और शनिवार या पंचमी पर नदी में 11 नारियल प्रवाहित करना प्रभावी होता है।
  • भोजन का दान करना, जानवरों को खिलाना, पेड़ और उपवनो की रक्षा करना कालसर्प योग से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद करता है।
  • पंचक्षेत्र मंत्र का जप, यानी ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जप रोजाना कम से कम 108 बार कुंडली में इस योग को दूर करने का एक प्रभावी तरीका है।
  • हाथ में मंत्र माला लिए राहु के बीज मंत्र का 108 बार जप करना भी प्रभावशाली होता है।
  • प्रत्येक शनिवार को एक पीपल पेड़ को पानी देना बहुत प्रभावी माना जाता है।
  • नदी पर धातु से बने नाग और नागिन के 108 जोड़े अर्पित करते हुए सोमवार को रुद्र अभिषेक करना एक प्रभावी उपाय है। इसके साथ कालसर्प गायत्री मंत्र का जप करना भी महत्वपूर्ण है।
  • सांपों और अन्य सरीसृपों को कभी नुकसान न दें। षष्ठी तिथि को नागो के राजा के नामों का जप करें। अमावस्या के दिन, एक स्वतंत्र जीवन का आनंद लेने के लिए जंगल में सांप छोड़ दे।
  • महामृत्युंजय मंत्र का जप दिन में 108 बार करे। यह आपके मन को सकारात्मक विचारों और आत्मविश्वास से भर देगा।gaytri mantar in hindi
  • सुबह नहाने के पश्चात् सूर्ये को नमन करते हुए गायत्री मंत्र 21 या 108 बार बोले। गायत्री मंत्र को सभी मंत्रों की मां कहा गया है और यह उन लोगों की रक्षा करता है जो इसका जप ईमानदारी से करते हैं।

यह भी पढ़े: shiv ki betiyo ki kahani

हम आपको मंत्रों का जप करने का सुझाव देते हैं क्योंकि मंत्रों का जप करने से तंत्रिका तंत्र को पुनर्जीवित और सुदृढ़ करने में मदद मिल सकती है।

कालसर्प दोष के बारे में आप क्या सोचते हैं? कृपया टिप्पणियों में हमें बताएं।

2 Comments

Leave a Reply
  1. यदि राहु और केतु के बीच 6 ग्रह हो और कोई एक ग्रह बाहर हो तो क्या तब भी काल सर्प योग बनेगा।कृपया उचित मार्गदर्शन करें।मेरे बेटे की जन्म तारीख -12जोलाई1998,समय 2बजकर 41 मिनट सुबह,जन्म स्थान मुज़फ्फरनगर।

    • इस विषय में कृपया किसी अच्छे अनुभवी ज्योतिष से विचार विमर्श करे। हमारी शुभकामनाये आपके साथ है। धन्यवाद!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

5 tattvas in hindi

प्रकृति के पांच तत्व और उन्हें संतुलित क्यों रखना चाहिए?

GURU POOJA

गुरु पूर्णिमा (GURU PURNIMA) – जानिये आखिर क्यों की जाती है इस दिन गुरु की पूजा