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KAMIKA EKADASHI VRAT KATHA (कामिका एकादशी) 2018

कामिका एकादशी 2018 (KAMIKA EKADASHI)

KAMIKA EKADASHI 2018

वर्ष 2018 में कामिका एकादशी 7 अगस्त (दिन  मंगलवार) को आ रही है । कामिका एकादशी (KAMIKA EKADASHI) का शुभ  मुहूर्त  8 अगस्त 2018 में दोपहर के 01:45 से सायं के 04:24 तक है । कामिका एकादशी 7 अगस्त 2018 को सुबह 07:52 बजे से प्रारंभ होकर 8 अगस्त 2018 को सायं 05:15 बजे समाप्त होगी ।

KAMIKA EKADASHI VRAT KATHA

धर्मराज युधिष्ठिर ने एक बार भगवान श्रीकृष्ण से श्रावण मास की कृष्ण एकादशी के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की । तब भगवान भगवान कहने लगे कि हे युधिष्ठिर! श्रावण मास की कृष्ण एकादशी की कथा को एक समय स्वयं ब्रह्मा जी ने देवर्षि नारद से कही थी, वही मैं तुमसे कहता हूँ। नारद जी ने ब्रह्मा जी से पूछा था कि हे पितामह! श्रावण मासके कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की मेरी इच्छा है, उसका क्या नाम है? क्या विधि है और उसका क्या महत्व है,  कृपा करके मुझे बतलाये ।

यह सब सुनकर ब्रह्मा जी ने कहा- श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम कामिका है। इसकी कथा सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ के फल की प्राप्ति हो जाती है। इस दिन भगवान विष्णु का पूजन होता है, जो शंख, चक्र, गदा आदि को धारण करते है और जिनको अलग अलग नामो से जाना जाते है जैसे –  हरि, विष्णु, श्रीधर, माधव, मधुसूदन हैं। उनकी पूजा करने से जिस फल की प्राप्ति होती है अब उसको सुनो।

जो फल गंगा, काशी और सरस्वती  नदियों के पवित्र जल में स्नानकरने से मिलता है,  वही फल विष्णु भगवान के पूजन से मिलता है। जो फल सूर्य व चंद्र ग्रहण पर कुरुक्षेत्र और काशी के पवित्र जल में स्नान करने से मिलता है वही भगवान श्री हरी विष्णु के पूजन से मिलता है।

जो भी मनुष्य श्रावण मास में भगवान विष्णु का पूजन करते हैं,  उनसे सभी देवी – देवता प्रसन्न हो जाते हैं। अत: जो मनुष्य अपने पूर्व जन्मों के पापों की वजह से डरते है उनको कामिका एकादशी (KAMIKA EKADASHI) का व्रत और विष्णु भगवान का पूजन अवश्य करना चाहिए। पाप रूपी कीचड़ में फँसे हुए और संसार रूपी समुद्र में डूबे मनुष्यों के लिए इस एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु का पूजन अत्यंत आवश्यक है।

KAMIKA EKADASHI KA MEHTAV

हे नारद! स्वयं भगवान हरी विष्णु ने यही कहा है कि कामिका एकादशी का व्रत करने से जीव कुयोनि को प्राप्त नहीं होता। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन भक्तिपूर्वक पूजन करते है तथा तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पण करते हैं, वे इस संसार के समस्त पापों से मुक्त हो जाते हैं। विष्णु भगवान को सभी रत्न, मोती, मणि तथा आभूषण आदि से अधिक प्रिय तुलसी दल है और इनको अर्पण करने से भगवान विष्णु जल्दी प्रसन्न हो जाते है।

हे नारद! मैं स्वयं भगवान की अतिप्रिय तुलसी को सदैव नमस्कार करता हूँ। तुलसी के पौधे को सींचने से मनुष्य की सब और दरिद्रता नस्ट हो जाती हैं। दर्शन मात्र से मन शांत हो जाता हैं और स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है। जो मनुष्य कामिका एकादशी की रात्रि को भगवान के मंदिर में दीपक जलाते हैं उनके पितर स्वर्गलोक में सुख भोगते है तथा वे स्वंम सूर्य लोक को जाते हैं।

कामिका एकादशी (KAMIKA EKADASHI)के व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ करना चाहिये और इसकी कथा पढ़ने वाले और सुनने वाले मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को जाता है।

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