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70 साल बाद करवा चौथ पर बन रहा है महामंगल संयोग

करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास की चतुर्थी को आता है। इस व्रत में माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। करवा चौथ (Karva Chauth) व्रत दीपावली (Diwali) से नौ दिन पहले मनाया जाता है।

करवा चौथ (Karva Chauth) के दिन महिलाएं दिन भर भूखी-प्‍यासी रहकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत करती हैं। मान्‍यता है कि करवा चौथ का व्रत रखने से अखंड सौभाग्‍य का वरदान मिलता है। इस बार करवा चौथ पर पूरे 70 साल बाद मंगल योग बन रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से मार्कण्डेय और सत्याभामा योग इस करवा चौथ पर बन रहा है। पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए ये व्रत बहुत अच्छा है।

करवा चौथ की तिथि और शुभ मुहूर्त

करवा चौथ व्रत
17 अक्‍टूबर 2019 सुबह 06 बजकर 27 मिनट से रात 08 बजकर 16 मिनट तक
पूजा का शुभ मुहूर्त
17 अक्‍टूबर 2019 शाम 05 बजकर 46 मिनट से शाम 07 बजकर 02 मिनट तक

करवाचौथ व्रत की पूजा विधि

करवाचौथ व्रत रखने वाली महिलाओं को सुबह सूर्योदय से पहले उठाना चाहिए और सरगी के रूप में मिला हुआ भोजन करके पानी पीना चाहिए और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लेना चाहिए।

शाम के समय चांद को देखने के बाद ही दर्शन करके व्रत खोलना चाहिए और पूरे दिन जल-अन्न कुछ भी ग्रहण नहीं करना चाहिए।

पूजा के लिए शाम के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना कर इसमें करवे को रख कर एक थाली में धूप, दीप, चन्दन, रोली, सिन्दूर रखें और घी का दीपक जलाएं।

पूजन के समय आस पास में जिन भी महिलाओं ने व्रत रखा हो उनके साथ करवा चौथ की कथा जरूर सुनें या सुनाएं और जब शाम जब चाँद निकल जाए तब चांद को छलनी से देखने के बाद अर्घ्य देकर पूजा करनी चाहिए।

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चांद को देखने के बाद पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलना चाहिए और अपने पति और घर के बड़ो का आशीर्वाद लेकर व्रत को सम्पूर्ण करना चाहिए।

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करवा चौथ व्रत कथा

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