in

कृष्ण जन्माष्टमी पर सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए करें ये उपाय

KRISHAN JANMASHTAMI

भगवान श्री कृष्‍ण के जन्मोस्त्व के दिन जन्माष्टमी को पुरे भारत वर्ष में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। भारत के विभिन्न राज्यों में दही हांडी का त्यौहार मनाया जाता है और जिसमे सभी धर्म के लोग मिलझूल कर शामिल होते है। इस दिन भगवान श्री कृष्‍ण अपने सभी भक्तों को किसी न किसी रूप में स्वंय दर्शन देने आते है। इस भगवान कृष्‍ण का श्रृंगार देखने के लिए मंदिरों एवं तीर्थ स्थलों में लोगो की भीड़ लगी रहती है।

भगवान श्री कृष्‍ण के श्रृंगार में मोरपंख और बांसुरी के अलावा कुछ अन्य उपायों को करने से विशेष लाभ मिलता है और भगवान प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

यह भी पढ़े: निधिवन के अनसुलझे रहस्य

जिन उपायों को करने से भगवान श्री कृष्‍ण प्रसन्न होते है वे है

पीले रंग के वस्‍त्र : जन्माष्टमी के दिन सबसे पहले स्वम स्वच्छ वस्त्र पहनने के बाद भगवान के बाल रूप को पंचामृत से स्नान किया जाता है उसके बाद उन्हें नए वस्‍त्र पहनाएं जाते हैं। वस्त्रों का रंग पीला होना चाहिए। भगवान को स्नान करने के बाद नए पीले कपड़े ही पहनाएं।

चांदी की बांसुरी : भगवान श्री कृष्ण को चांदी की बांसुरी को चढ़ाएं। बाद में पूजन संपन्न होने के बाद इसे अपने पर्स में रख ले।

मोरपंख : मोर पंख जो भगवान श्री कृष्‍ण के माथे पर हैं वह राधा रानी के प्रेम की निशानी है। शास्‍त्रों में कहा गया है कि भगवान श्री कृष्‍ण जब देवी राधा से मिलने जाते थे और देवी राधा भगवान श्री कृष्‍ण की बांसुरी की धुन सुन कर नाच उठती थीं और उनके महल में कई सारे मोर भी थे जो उनके साथ नाचते थे। तभी नाचते हुए एक दिन किसी मोर का पंख जमीन पर गिर गया जिसे भगवान कृष्‍ण ने उठाकर अपने माथे पर लगा लिया। ऐसा माना गया है कि जो यही वजह है कि जन्माष्टमी पर श्री कृष्‍ण के श्रृगांर में मोर पंख का इस्तेमाल किया जाता है।

भगवान श्री कृष्‍ण के मुकुट पर मोर का पंख लगाने से कालसर्प योग का दोष कम रहता है। मोर मुकुट भगवान कृष्‍ण को पहनाने से कालसर्प दोष का बहुत हद तक निवारण भी होता है।

माखन-मिश्री : जन्माष्टमी के दिन माखन और मिश्री का भोग बनाकर छोटे बच्चों को जो स्वम भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप होते है उनको खिलाना चाहिए इससे भगवान श्री कृष्ण प्रसन्न होते हैं और आपको भोग को स्वीकार भी करते है।

यह भी पढ़े: भगवद गीता पर आधारित मनुष्य के लिए दिशा-निर्देश

झूला : जन्माष्टमी पर बालगोपाल को झूले में झुलाने की परंपरा बहुत पुरानी है। उसी तरह से बालगोपाल को झूलाया जाता है जैसे बच्चे को उनके  जन्म के बाद झुलाया जाता है इस दिन सुंदर सुसज्जित झूला लाकर उसमें कान्हा जी को बिठाएं ऐसा करने से लाभ मिलता हैं ।

तुलसी : कान्हा पूजन में तुलसी का प्रयोग जरूर करें।

शंख : जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण के नंदलाल स्वरूप का शंख में दूध डालकर अभिषेक करें।

फल व अनाज : कृष्ण जन्माष्टमी के दिन धार्मिक स्थल पर जाकर फल और अनाज दान करें।

गाय-बछड़ा : इस दिन गाय-बछड़े की प्रतिमा लाने से भी धन और संतान संबंधी चिंताएं दूर होती हैं।

पारिजात : हारसिंगार, पारिजात या शैफाली के फूल श्रीकृष्ण को बहुत पसंद है। पूजन में इनका प्रयोग अवश्य करना चाहिए।

गीता की पोथी : भगवान श्री कृष्‍ण ने अर्जुन को महाभारत के युद्ध में गीता का उपदेश दिया था। मोह से निकलकर गीता संसार को देखने का मार्ग अच्छे से दिखाती है। गीता को श्री कृष्‍ण की वाणी के रूप में भी जाना जाता है। गीता मनुष्य को मुक्ति का मार्ग और कर्म पथ पर चलने का ज्ञान देती है। इसलिए भगवान श्री कृष्‍ण की पूजा में गीता की पोथी को जरूर रखें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

वर्ष 2019 में जन्माष्टमी (Janmashtami ) कब है?

navgraha

ग्रहो की विस्तृत व्याख्या और उनके हमारी कुंडली में प्रभाव और दुष्प्रभाव