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क्यों पूजा जाता है भगवान गणेश को सर्वप्रथम

भगवान गणेश जी से ही सभी विद्याओं, सभी ज्ञानों का उद्भव हुआ है भगवान गणेश जी सभी प्रकार की विद्याओं को प्रदान करने वाले हैं और ज्ञान का प्रकाश भी उन्ही से मिलता है भगवान गणेश जी ऐसे देवता है जो ब्रह्मा के सगुण और निर्गुण स्वरूप को दिखा सकते हैं भगवान गणेश की ही सभी विघ्न बाधाओं को दूर करने वाले एक मात्र देवता हैं इसलिए उनको “विघ्न सागर शोषक” के नाम से भी जाना जाता है

‘ॐ गं गणपतये नमः’

इस मन्त्र का जप करने से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है।

भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता का अधिकार कैसे मिला

भगवान गणेश को ही प्रथम पूज्य देवता का अधिकार प्राप्त है अर्थात सर्वप्रथम भगवान गणेश की ही पूजा की जाएगी बाद में अन्य किसी और देवता की पूजा की जाती है सबसे पहले उन्हीं को ही पूजा जाता है हिंदू ग्रंथों में 33 करोड़ देवी देवताओं के बारे में बताया गया है परंतु फिर भी सभी देवताओं को छोड़कर भगवान गणेश जी को प्रथम पूज्य माना जाता है

GANESH MANTR

सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी, पालनकर्ता भगवान नारायण और संहारकर्ता भगवान शिव में से किसी को भी प्रथम पूज्य देव का अधिकार प्राप्त नही है जबकि त्रिदेवों को सबसे बड़े देवता माना जाता है किसी भी स्थान को प्राप्त करने के लिए उस स्थान के अनुकूल योग्यता होनी चाहिए तभी वह उपलब्धि आपको मिल सकती है संसार में अनेकों देवी देवता पूजे जाते हैं और जिसका भी जो इष्ट देव होता है वह उसी की पूजा पहले करता है परन्तु संसार में सर्वप्रथम कोण पूजा जाए इस पर सभी देवताओं में विवाद शुरु हो गया

इस समस्या का हल लेने करने के लिए सभी देवता एक साथ मिलकर भगवान शिव के पास पहुंचे भगवान शिव से पूछने लगे कि हम सब में से प्रथम पूज्य कौन सा देव है भगवान शिव ने कुछ देर सोच विचार करने के बाद इस विवाद को समाप्त करने के लिए एक प्रतियोगिता की संरचना की और उस प्रतियोगिता का नाम था “विश्व की परिक्रमा करने की प्रतियोगिता”

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भगवान शिव ने सभी देवताओं को कहां कि जो भी देव समस्त संसार के चारों ओर चक्कर लगा कर सबसे पहले यहाँ वापिस आएगा व्ही प्रथम पूजनीय देव कहलायेगा तब सभी देवता अपने-अपने वाहन पर चढ़कर एक के बाद एक विश्व के चारों ओर चक्कर लगाने के लिए निकल पड़े तभी वहां भगवान गणेश जी आए भगवान गणेश जी का वाहन मूषक है जिसे हम सब चूहे के नाम से भी जानते हैं

गणेश जी के वाहन मूषक के चलने की गति बहुत धीमी होती है इसी वजह से भगवान गणेश जी ने प्रतियोगिता में भाग लेने के बारे में नहीं सोचा और भगवान शिव और माता पार्वती के समीप ही बैठ गए कुछ देर विचार करने के बाद उनके मन में एक सुझाव आया क्योंकि भगवान शिवजी स्वयं ही संहारकर्ता है और सारा संसार उन्हीं का प्रतिबिंब है तब भगवान गणेश ने अपने वाहन मूषक पर चढ़कर भगवान शिव की परिक्रमा कर दी

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कुछ देर बाद सभी देवता एक एक करके संसार की परिक्रमा करके लोटना शुरू हो गए थे उन्होंने भगवान गणेश जी को वहीं बैठे देखा फिर पूछा कि क्या आप ने विश्व की परिक्रमा नहीं की है तो गणेश जी ने बोला कि मैंने तो की विश्व की परिक्रमा कर ली तब गणेश जी ने उत्तर दिया की समस्त संसार भगवान शिव में विद्यमान है तो मैंने इन्हीं की परिक्रमा कर ली है जिससे पूरे संसार की परिक्रमा पूरी हो गई यह सब सुनते ही सभी देवताओं ने भगवान गणेश की जय जय कार की और उनको सर्वप्रथम पूजे जाने वाले देव के रूप में स्वीकार किया

इस प्रकार गणेश जी ने अपनी बुद्धि के बल पर प्रथम पूज्य होने का अधिकार प्राप्त कर लिया और उसी दिन से सबसे पहले भगवान गणेश जी की पूजा होनी आरंभ हो गई

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