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लक्ष्मण से जुड़े 10 दिलचस्प तथ्य आप भी जाने

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हिंदू महाकाव्यों में से रामायण का एक अलग ही स्थान है। यहां भगवान राम को मुख्य किरदार माना जाता है, इसी के साथ लक्ष्मण भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरित्र है। वह भगवान राम के भक्त और अविभाज्य भाई है।

लक्ष्मण (Lakshman)की निष्ठा, ईमानदारी व उनके गुस्से के बारे में सभी जानते है और उनका भगवान् श्री राम के पास ना होना शरीर के किसी एक अंग के ना होने के सामान होता।

इस प्रकार, उनके बिना, रामायण का युद्ध जीता नहीं जा सकता था। वह महान गुणो वाले महान चरित्र के स्वामी थे लेकिन फिर भी उनकी कम ही बात की जाती है। चलिए जानते है लक्ष्मण से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में।

 

1. लक्ष्मण ने बलराम के रूप में पुनर्जन्म लिया

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लक्ष्मण ने एक बार कहा था कि क्युकी वह राम से छोटे हैं, इसलिए उनके बड़े भाई के प्रत्येक आदेश का पालन करना उनके लिए अनिवार्य है। यही कारण है कि बड़े भाई बनने की उनकी इच्छा अगले अवतार में पूरी हुई थी। तब भगवान विष्णु छोटे भाई भगवान कृष्ण बन कर आए थे, और शेषनाग बड़े भाई बलराम बने थे।

लक्ष्मण शेषनाग का अवतार थे और शेषनाग विष्णु से अविभाज्य नहीं थे, इसलिए जब विष्णु पृथ्वी पर राम के रूप में उतरे, तो शेषनाग लक्ष्मण के रूप में अवतारित हो गए और जब विष्णु बाद में कृष्णा के रूप में अवतारित हुए, तो शेषनाग उनके साथ उनके बड़े भाई बलराम के रूप में आए।

 

2. लक्ष्मण को ‘गुडाकेश’ भी कहा जाता है

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Image: ritsin.com

राम के वनवास के दौरान लक्ष्मण ने 14 साल तक जागने का फैसला किया। उन्होंने नींद की देवी निद्रा से अनुरोध किया कि उन्हें 14 साल तक नींद न दें, ताकि वह जाग कर राम और सीता की रक्षा कर सके। निद्रा देवी उनके समर्पण से प्रभावित हुई और उन्हें वरदान दिया।

यही कारण है कि लक्ष्मण को गुडाकेश भी कहा जाता है। यह एक बहुत ही मजबूत स्थिति होती है। जिसने उन्हें मेघनाद को मारने में सक्षम बनाया। मेघनाद को वरदान प्राप्त था कि वह केवल एक गुडाकेश द्वारा ही मारा जा सकता है, जिसने नींद को हरा दिया हो।

 

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3. लक्ष्मण को राम से कभी अविभाज्य नहीं किया जा सकता।

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वनवास से पहले, राम सीता को समझाने की कोशिश करते है कि अगर वह चाहती है तो वह अपने राज्य में ही रह सकती है। उनका राम के साथ वनवास को जाना अनिवार्य नहीं है।

दूसरी तरफ राम लक्ष्मण को रुकने के लिए मनाने की चर्चा भी नहीं करते है क्योंकि राम जानते है कि लक्ष्मण चाहे कुछ हो जाये राम के साथ वनवास जाकर ही रहेंगे। लक्ष्मण को राम से अलग करना असंभव है।

4. शेषनाग का अवतार

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Image: detechter.com

लक्ष्मण शेषनाग का एक अवतार थे, वह सांप जिस पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में रहते है, जो कि दूध का सागर है। शेषनाग सभी नागो के राजा है। वह ब्रह्मांड के सभी ग्रहों को अपने फन पर रखते है। शेषनाग और भगवान विष्णु अविभाज्य हैं।

भगवान विष्णु को अक्सर शेषनाग पर आराम के रूप में चित्रित किया जाता है, जब भगवान विष्णु राम के अवतार में धरती पर उतरे थे, तब शेषनाग उनके साथ लक्ष्मण के रूप में थे।

यही कारण है कि लक्ष्मण को देखने के बाद ‘ताटिक’ (रावण द्वारा मिथिला को नष्ट करने के लिए भेजा गया एक सांप) वह से भाग गया था।

 

5. लक्ष्मण ने 14 साल तक किसी भी महिला का चेहरा कभी नहीं देखा

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Image: istorybooks.co

लक्ष्मण का चरित्र एक सज्जन व्यक्ति का था। वनवास के दौरान लक्ष्मण अपने भाई राम और भाभी सीता के साथ रहे, लेकिन उन्होंने कभी उनके चेहरे की तरफ नहीं देखा।

वह केवल उनके चरणों को ही दखते थे। जब सुग्रीव ने उन्हें सीता द्वारा फेंके गए गहने दिखाए, जब रावण उन्हें लंका ले जा रहा था, लक्ष्मण केवल सीता की पायल को ही पहचान सके थे।

उन्होंने कहा कि जब वह अपना सिर माता के चरणों में प्राथना के लिए झुकाते थे तब इसे देखा था। इसके इलावा वह किसी भी अन्य गहने को पहचानने में सक्षम नहीं थे।

6. इंद्रजीत को मारना लगभग असंभव था

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Image: i.pinimg.com

युद्ध के बाद ऋषि अगस्त्य अयोध्या आए। ऋषि ने कहा, मेघनाद एक साधारण राक्षस नहीं था, वह इंद्रलोक का विजेता था। उसके पास त्रिमुर्ती के तीनो विनाशक हथियार ब्रह्मस्त्र, नारायणस्त्र, और पाशुपतास्त्र भी थे।

उसे केवल उस व्यक्ति द्वारा मारा जा सकता था जिसने 14 साल तक किसी महिला के चेहरे को ना देखा हो, ना ही सोया हो और ना ही कुछ खाया हो। लक्ष्मण इन शर्तों पर पूरा उतरे थे। यह आश्चर्य का विषय था।

इसके पश्चात लक्ष्मण ने सबको समझाया की अपनी माँ को दिए गए वचन जोकि सोते समय राम और सीता की रक्षा करने का था, को निभाते हुए वह 14 साल से सोये नहीं थे।

उन्होंने 14 साल तक कुछ नहीं खाया क्योंकि राम ने उन्हें खाना दिया लेकिन कभी उसे खाने के लिए नहीं कहा। लक्ष्मण अपनी निष्ठा में विश्वास करते थे कि उनका जन्म भगवान राम की सेवा के लिए हुआ था और इसलिए उन्होंने कभी भी उनकी आज्ञा के बिना कुछ नहीं किया।

7. उनकी मृत्यु का कारण

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जब राम को एहसास हुआ कि उन्होंने धरती पर अपने कर्तव्यों को पूरा कर लिया है, तो उनके लिए वैकुंठ लौटने का समय था। राम ने यम को आमंत्रित किया, लेकिन यम ने एक शर्त राखी कि उनकी बातचीत गोपनीय होनी चाहिए और कमरे में प्रवेश करने वाले किसी भी व्यक्ति को मौत की सजा से दंडित किया जाना चाहिए।

इसलिए, राम ने लक्ष्मण को कमरे की रक्षा करने के लिए कहा ताकि कोई भी प्रवेश न कर सके।

इस बीच, ऋषि दुर्वासा आ पहुंचे और राम से मिलने की अपनी इच्छा व्यक्त की। सबसे पहले, लक्ष्मण ने विनम्रता से इंकार कर दिया लेकिन ऋषि ने जोर दिया और अयोध्या को शाप देने की धमकी दी।

अयोध्या को बचाने के लिए लक्ष्मण ने बैठक को रोकने का फैसला किया। राम के वचन को पूरा ना कर पाने के कारण, वह सरयू नदी के तट पर गए और अपना जीवन त्याग दिया।

हालांकि, लक्ष्मण का धरती को छोड़ना राम के धरती को छोड़ने से पहले जरूरी था क्योंकि वह शेषनाग का अवतार थे और उनका विष्णु के वापस वैकुंठ लौटने से पहले लौटना अनिवार्य था।

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8. भगवान राम को भी लक्ष्मण बहुत प्रिय थे

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लक्ष्मण राम को बहुत प्रिय थे। जब युद्धक्षेत्र पर लक्ष्मण घायल हो गए और उनकी मृत्यु लगभग तय थी, तब राम जीवन में पहली बार रोए थे और कबूल किया कि वह अयोध्या में धन के बिना जी सकते है, वह उनकी पत्नी सीता के बिना जी सकते है लेकिन वह भाई लक्ष्मण के बिना नहीं जी सकते।

9. लक्ष्मण राम के सलाहकार भी थे

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Image: devdutt.com

सीता के लापता होने से राम बहुत निराश रहने लगे थे। ऐसे में लक्ष्मण लगातार राम से बात करते थे। वाल्मीकि रामायण में वनवास के दौरान कई मौकों पर उद्धरण देते हैं।

जब राम लगातार किसी पागल आदमी की तरह भटकते रहते थे, सीता के ठिकाने के बारे में जंगल में पेड़ों, फूलों, पौधों और जानवरों से पूछते थे, और अक्सर जमीन पर उदास और परेशान हो गिर जाते थे, तब लक्ष्मण ने देखभाल करने वाले और परामर्शदाता की एक अहम भूमिका निभाई थी।

लक्ष्मण ने राम को प्रेरणा भरे शब्दों से उत्साहित कर दिया था।

 

10. लक्ष्मण के गुरु

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Image: tamilandvedas

राम लक्ष्मण के लिए सिर्फ एक भाई नहीं बल्कि एक पिता और गुरु भी थे। विश्वामित्र ने राम को कई अस्त्रो और शशत्रों का ज्ञान दिया और राम के गुरु बन गए। राम ने यह ज्ञान लक्ष्मण को दिया और लक्ष्मण के शिक्षक बने।

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