in , ,

महामृत्युंजय मंत्र – अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

 

महामृत्युंजय मंत्र संहार के देवता भगवान शिव की तपस्या और ध्यान के लिए सर्वशक्तिशाली मंत्र है। यह सबसे प्रचलित और शक्तिशाली शिव मंत्रों में से एक है। अकाल मृत्यु पर काबू पाने के लिए महा मृतांजय मंत्र का जप किया जाता है।

इसकी साधना प्राकृतिक मौत की बजाय आकस्मिक मौत से बचने के लिए की जाती है। यह मंत्र भगवान शिव से साधक को ध्यान रूपी पहाड़ पर ले जाने का अनुरोध है, जो वास्तव में भगवान शिव का निवास है।

महामृत्युंजय मंत्र (Maha Mrityunjaya Mantra)

ॐ त्रियम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनं|
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मोक्षिय मामृतात्||

OM triyambakam yajāmahe sugandhim pushTivardhanam,
urvārukamiva bandhanān mrrityormokshiya māmrritāt.

कहा जाता है कि ऋषि मार्कण्डेय की नियती में 16 वर्ष की आयु में ही मृत्यु लिखी थी। उन्होंने भगवान् शिव का ध्यान कर महामृत्युंजय मंत्र का जप किया।

इससे प्रसन होकर भगवान् शिव उन के सामने उपस्थित हुए और सोलह वर्ष की ओर जाने से कुछ दिन पहले उनकी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोक दिया। इस प्रकार, मौत ऋषि मार्कण्डेय का बाल भी बांका न कर सकी!

इसलिए, शास्त्रीय हिंदू अध्ययनों में इस मंत्र को मार्कंडेय मंत्र भी कहा जाता है। मंत्र को आदर्श रूप से सुबह और शाम को 108 बार दो बार दोहराया जाना चाहिए। यह ध्यान और योग अभ्यास के लिए भी विशेष रूप से उपयोगी है।

Mahamrityunjay Mantra in hindi

महामृत्युंजय मंत्र का संक्षिप्त अर्थ (Meaning Of Maha Mrityunjaya Mantra In Hindi)

हे तीन नेत्र वाले कर्मकारक (त्रियम्बकं) भगवान जिसे हम पूजते है (यजामहे) जो सुगंधित है (सुगन्धिं) और सभी प्राणियों का पोषण कर (पुष्टि) विकास (वर्धनं) करता है। जिस प्रकार एक ककड़ी पक जाने के पश्चात (उर्वारुकमिव) बेल रूपी संसार के बंधनो से मुक्त हो (बन्धनान्) जाती है; उसी प्रकार हमें भी मृत्यु (मृत्यो) के बंधन से सवतंत्रता या मोक्ष दे (र्मोक्षिय) अमरता का (मामृतात्) वरदान दे।

हम भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं जिनकी आंखें सूर्य, चंद्रमा और अग्नि हैं। जो हमें सभी बीमारियों, गरीबी और भय से बचा सकता है और हमें समृद्धि, दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य के साथ आशीर्वाद दे सकता है।

यह भी पढ़े: bhagwan shiv ke 108 naam

 

महामृत्युंजय मंत्र का आध्यात्मिक महत्व (Maha Mrityunjaya Mantr Ka Adhyatamic Mahatav)

भगवान शिव को तीन नेत्रों वाले ‘त्रियम्बकं’ के रूप में जाना जाता है जिनकी तीसरी आंख तपस्या और ध्यान की शक्तियों द्वारा उत्पन्न हुई है। कहा जाता है की तीसरी आंख भौंहो के बीच की जगह में स्थित होती है और जब कोई आध्यात्मिक जागरूकता अनुभव करता है तो वह खुल जाती है।

इसलिए, जब हम भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं, हम संक्षेप में आध्यात्मिक ज्ञान की हमारी तीसरी आंख खोलने में उनका आशीर्वाद और सहायता मांगते हैं।

इस जागृति का प्राकृतिक परिणाम यह है कि हम आध्यात्मिक मुक्ति या मोक्ष की ओर अग्रसर होंगे, और मृत्यु व पुनर्जन्म के चक्रों से स्वतंत्रता प्राप्त करेंगे। इस मंत्र का जप करने का लक्ष्य आध्यात्मिक रूप से परिपक्व होना है, ताकि भगवान शिव हमें उन सभी भौतिक चीज़ों से मुक्त कर सकें जो हमें बांधते हैं।

 

महा मृतांजय मंत्र के जप की विधि (Mahamrityunjaya Mantr Ki Vidhi)

– इस मंत्र का जप करने का सबसे अच्छा समय सुबह 4-6 के बीच है। लेकिन, स्नान करने और सभी कार्य खत्म करने के बाद आप सुबह इस मंत्र का जप कर सकते हैं।

– अपने घर या शिव मंदिर में कुश आसन पर उत्तर-पूर्व का सामना करते हुए इस मन्त्र का जप करना चाहिए।

– पंचमहाभूत पूजा और शिव पूजा करें।

– 21 दिनों के भीतर 125000 बार मन्त्र का जप करे यदि आप घर पर इस मन्त्र का जप कर रहे है तो आप रुद्राक्ष माला का उपयोग कर सकते है। एक रुद्राक्ष माला में 108 मनके होते हैं अर्थात जब आप प्रत्येक मनके पर एक बार मंत्र का जप कर माला का पूर्ण घूर्णन कर लेते है, तो यह 108 बार मंत्र का पाठ है।

– यदि आप शिव मंदिर में अभ्यास कर रहे हैं तो रोज़ 31 बार माला का जप करे (108 x 31 = 3348 41 दिनों के लिए)।

– रोजाना जाप के बाद, इसे मंगल आरती और मंत्र पुषांजली के साथ समाप्त करें।

– साधना के अंतिम दिन मंत्र सिद्धी पूर्ण होने के पश्चात साधक को हवन करना होगा।

यह भी पढ़े: Shivling ki pooja vidhi

 

महामृत्युंजय मंत्र के लाभ (Benefits Of Mahamrityunjaya Mantra In Hindi)

– यह मृत्यु से जुड़े डर, चिंता और अन्य नकारात्मक भावनाओं को दूर करने में भी मदद करता है।

– महामृत्युंजय मंत्र का जप करना हमारे मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। यह खुशी को बढ़ावा देता है और जीवन में समृद्धि लाता है।

– इसे “जीवन रक्षा मंत्र” के रूप में भी जाना जाता है; यह मौत पर विजय प्राप्त करता है और अमरत्व प्रदान करता है। यह असामयिक मौत से रक्षा के लिए भगवान शिव को समर्पित किया गया है।

– महा मृतांजय को मोक्ष मंत्र के रूप में भी जाना जाता है जो मनुष्यों को अपनी आंतरिक दिव्यता से जोड़ता है। यह मंत्र मनुष्यों के भीतर शिव को जन्म देता है और मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त करता है।

– इस मंत्र में अद्भुत उपचार शक्तियां हैं। इस मंत्र का जप करते हुए सकारात्मक और दैवीय कंपन पैदा होते हैं जो उपचार में मदद करते हैं।

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

rakhi

राखी (Rakhi) भाई बहनों का एक पवित्र त्यौहार

maa gayatri

माँ गायत्री चालीसा | Shri Gayatri Chalisa – Adhyatam