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मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुह्रत

Margashirsha Amavasya

मार्गशीर्ष अमावस्या (Margashirsha Amavasya ) शुभ मुहूर्त

तिथि 6 दिसंबर 2018
दिन शुक्रवार
समय 6 दिसंबर को 12:12 मिनट से 7 दिसंबर 2018 को 12:50 मिनट तक

मार्गशीर्ष मास में आने वाली अमावस्या को मार्गशीर्ष अमावस्या कहा जाता है। मार्गशीर्ष अमावस्या को पितृ अमावस्या और श्राद्धादि अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इसी महीने में भगवान श्री कृष्ण ने गीता का दिव्य ज्ञान दिया था इसी कारण मार्गशीर्ष अमावस्या का विशेष महत्व होता है और यह भी कहा जाता है की इस दिन व्रत व पूजन करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष दूर होता है।

मार्गशीर्ष अमावस्या (Margashirsha Amavasya) पूजन विधि

मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन सुबह-सुबह किसी पवित्र नदी के जल में स्नान करें। यदि संभव हो सके तो गंगा या यमुना नदी में स्नान करें ऐसा करने से उत्तम लाभ होगा। अगर संभव न हो तो घर में ही मन कर्म वचन से शुद्ध होकर स्नान कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हुए अपने पूर्वजों को याद करना चाहिए।

इसके बाद भगवान श्री सत्यनारायण की पूजा करनी चाहिए और अपने द्वारा किये गये सभी पापों के लिए उनसे क्षमा मांगनी चाहिए और कथा और आरती करनी चाहिए। अपने सामर्थ्य के अनुसार दान दक्षिणा देनी चाहिए। शाम को घर में दीपक जलाएं और भगवान सत्यनारायण की पूजा करें।

मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व:

मार्गशीर्ष अमावस्या को श्राद्धादि अमावस्या भी कहा जाता है क्योंकि इसे सर्वपितृ अमावस्या की तरह ही मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधिवत पूजन और व्रत से पितर प्रसन्न होते हैं। मार्गशीर्ष अमावस्या करने से कुंडली के दोष भी समाप्त होते हैं, जैसे कि राहू नीच हो तो मार्गशीर्ष अमावस्या करना लाभकारी होता है।

ऐसी मान्यता है कि जो लोग संतान सुख से बंचित हैं, उन्हें यह अमावस्या व्रत जरूर करना चाहिए। उन्हें मनवांछित फल प्राप्त होता है। रुके हुए काम हो जाते हैं और कार्य की कठिनाइयां खत्म हो जाती हैं।

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