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नाग पंचमी (NAAG PANCHAMI) 2018 : पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त

NAAG PANCHAMI DATE | NAAG PANCHAMI KAB KI HAI

NAAG PANCHAMI

नाग पंचमी (NAAG PANCHAMI) का त्यौहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। हिन्दू धर्म के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग होते हैं। इसलिए इस दिन नागों की पूजा  की जाती है और पूजा में नागो का दूध से स्नान करने का खास महत्व होता है।

नाग पंचमी मुहूर्त 2018 (NAAG PANCHAMI MUHRAT)

वर्ष 2018 में श्रावण मास की नाग पंचमी 15th अगस्त 2018, बुधवार को मनाई जाएगी। नाग पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त 05 बजकर 54 मिनट से प्रारंभ होकर 08 बजकर 30 मिनट तक है  नाग पंचमी 16 अगस्त 2018, वीरवार सुबह 01 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी ।

नाग पंचमी (NAAG PANCHAMI) का महत्व

नाग पंचमी का पर्व हरियाली तीज के दो दिन बाद आता है। जो हर साल जुलाई और अगस्त के महीनों में पड़ती है। नाग पंचमी के पर्व पर विशेष रूप से महिलाएं नाग देवता की पूजा करती है और अपने परिवार के सभी सदस्यों की रक्षा के लिए प्रार्थना करती है। इस दिन पुरे भारत में नाग देवताओं की सभी प्रजातियों की अलग-अलग तरीको से और पारंपरिक रूप से पूजा की जाती है।

यह भी माना जाता है की नाग पंचमी के दिन नाग देवता का पूजन करने से व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है। नाग देवता को तो वैसे भी भगवान शिव जी के गले का आभूषण माना जाता है। ऐसे में सावन महीने में आने वाली नाग पंचमी का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इस दिन नागो के 12 स्वरूपों की पूजा की जाती है जिनमे से कुछ यह है – अनंता, वासुकी, शेष, कालिया, तक्षक, पिंगल, धृतराष्ट्र, कार्कोटक, पद्मनाभा, कंबाल, अश्वतारा और शंखपाल।

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नाग पंचमी व्रत (NAAG PANCHAMI VRAT) और पूजन विधि

नाग पंचमी की पूजा में चतुर्थी के दिन यानी की पंचमी से एक दिन पहले केवल एक ही बार भोजन करना चाहिए, उसके पश्चात पंचमी को पूरे दिन व्रत रखना चाहिए । नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा के लिए नाग देवता का चित्र, या फिर मिट्टी से बनी उनकी प्रतिमा का प्रयोग किया जा सकता है ।

पूजा के लिए सबसे पहले लकड़ी की चौकी पर नाग देवता की मूर्ति या चित्र को स्थापित कर लें। उसके बाद नाग देवता को फल, फूल, कुमकुम और आरती दिये से अर्पित करने चाहिए और अंत में नाग पंचमी की कथा सुननी चाहिए । इस दिन सपेरे को दान दक्षिणा देनी चाहिए और  साथ ही सापों को दूध पिलाने से भी इनका भय खत्म हो जाता है।

नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा के साथ – साथ मंत्रो का जाप नही करना बहुत लाभकारी होता है

ॐ नमः शिवाय

महामृत्युंजय मंत्र :

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।।

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