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चैत्र नवरात्रि की अष्टमी व नवमी तिथियों का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

NAVRATRI KI ASHTAMI AND NAVMI TITHIYON MEIN KIS SAMAY KRE POOJA

तिथि दिन शुभ मुहूर्त
13 अप्रैल 2019 (अष्टमी) शनिवार सुबह 8  बजकर 19  मिनट तक
14 अप्रैल 2019 (नवमी) रविवार सुबह 6  बजकर 04  मिनट तक

चैत्र नवरात्रि में नों दिनों तक देवी के भिन्न भिन्न रूपों की पूजा करते हुए सभी भक्त अपने  व्रत एवम उपवास को अष्टमी और नवमी तिथियों में समाप्त करते है। इन तिथियों बहुत ही खास माना जाता है क्योकि इन दिनों में सभी भक्त अपने अपने घरों में देवी के नों रूपी कन्याओं को बुला कर उनका पुरे मन और भक्ति भाव से स्वागत करते है तथा घर में बनाये गये पूरी और छोले का भोग लगाते है। कुछ भक्त अष्टमी तो कुछ भक्त नवमी को नवरात्रि का समापन कर देते हैं नवमी को रामनवमी के नाम से भी जाना जाता है।

DEVI DURGA KE NO ROOP

पुरे भारत में दुर्गा मां के नौ रुप की पूजा बड़ी ही धुमधाम से की जाती है। रामनवमी पर भगवान राम और हनुमान जी की पूजा भी की जाती है। इस साल की रामनवमी पर पुष्म नक्षत्र के योग बन रहा है। यह योग 27 नक्षत्रों में सबसे अच्छा माना जाता है क्योकि इसी योग में भगवान राम का जन्म भी हुआ था।

रामनवमी के दिन को नवरात्रि का अंतिम दिन माना जाता है और इस दिन कन्या पूजन करके देवी मां को विदा किया जाता हैं। इस दिन बहुत से तीर्थ स्थलों पर भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। इस दिन सभी भक्तों को देवी के दर्शनों होने के साथ साथ उनकी मनोकामनाओ की भी पूर्ति होती है। कुछ लोग अष्ठमी के दिन माता महागौरी कन्या पूजन का पाठ भी करते हैं और इस दिन वही मां को विदा करने का काम करते हैं और नौंवे दिन रामनवमी को पुरे धूमधाम से मनाते हैं।

RAM NAVMI

नवरात्रि के अंतिम दिन कुछ लोग अपने घरों में हवन आदि भी करवाते है। जिससे उनके सभी कस्ट दूर होते है और देवी मां अपना आशीर्वाद सभी पर बनाये रखती है। ऐसा भक्त जन का विश्ववास होता है। इसी विश्ववास के साथ भक्त जन इन व्रतों के आखिरी में पुजा पाठ करते हैं और दान करते हैं।

दुर्गा अष्टमी एवम नवमी पूजा विधि

  • महा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
  • फिर देवी दुर्गा की प्रतिमा को अच्छे से साफ़ करते हुए नये वस्त्र या चुनरी ओढ़ाये।
  • फिर उनकी प्रतिमा के सामने पुष्प अर्पित करते हुए धूप, दीप प्रज्वलित कर के आरती के साथ माता दुर्गा की पूजा करें।
  • दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और दुर्गा के मंत्रोच्चार करें।
  • मां को घर में बना भोग अर्पित कर उनके नामों का उच्चारण करें।
  • दुर्गा जी को पंचामृत अर्पित करें। इसके साथ उन्‍हें पांच फल, किशमिश, सुपारी, पान, लौंग, इलायची आदि अर्पित करें।
  • अंत में घी के दिये से मां की आरती करें।

KANYA POOJA

घर में नौ कन्‍याओं को पूरी और हलवे के प्रसाद का भोग लगाएं। और फिर उनका पैर छू कर आशीर्वाद लें।

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