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वृंदावन के निधिवन का हैरान कर देने वाला अनसुलझा रहस्य

Nidhivan Ke Rahasya

वृंदावन वह भूमि है जहा भगवान कृष्ण ने अपना बाल जीवन बिताया था। इसे प्रेम की भूमि भी कहा जाता है क्योंकि यहा भगवान कृष्ण और राधा के बीच के पवित्र प्रेम के किस्सों से भरी कई गाथाएँ है। वृंदावन में पवित्र स्थानों में से एक निधिवन है जो कुछ रहस्यमय घटनाओं के कारण चर्चा का विषय है। आईये जानते है निधिवन के रहस्यो के बारे में।

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वृंदावन में निधिवन चर्चा का विषय क्यों है ?

भक्तों और स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि निधिवन में रात होते ही सभी तरह के पक्षी और जानवर यहाँ तक की चीटिया भी, वहा से चले जाते है। ऐसा कहा जाता है की आज भी भगवान कृष्ण राधा और गोपियों के साथ रात के समय में रासलीला करने के लिए निधिवन में आते हैं।

इस तथ्य से जुड़े साबुत

रंग महल

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निधिवन के बगीचे में एक छोटा सा कमरा है जिसमें दैनिक रूप से भगवान कृष्ण के लिए चंदन का बिस्तर तैयार किया जाता है। और पान के पत्तों के साथ पानी का एक चांदी का गिलास बिस्तर के बगल में रखा जाता है।

जैसे ही सुबह के समय रंग महल के दरवाजे खोले जाते हैं, पुजारी को पानी के खाली गिलास मिलते है, पान के पत्ते खाये हुए होते है और बिस्तर की दशा ऐसी होती हैं जैसे कि कोई इसमें से सो कर गया हो। क्या यह आपको विचित्र नहीं लगता? खैर, आगे पढ़ें!

तुलसी के पेड़ो की विचित्रता

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निधिवन में तुलसी के पेड़ो का अकार इन्हे असामान्य बनाता है। स्वाभाविक रूप से पेड़ की शाखाएं ऊपर की ओर बढ़ती हैं लेकिन यहां वे नीचे की ओर बढ़ रही हैं। इसके अलावा, तुलसी यहां जोड़े में बढ़ती है। ऐसा माना जाता है कि ये पौधे रात को गोपीयो में बदल जाते हैं और श्री कृष्ण की रासलीला में शामिल हो जाते हैं।

निधिवन को शाम के निश्चियत समय पर क्यों खली करवा दिया जाता है?

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शाम शाम के बाद, भक्तों को जगह खाली करने के लिए कहा जाता है। ऐसा पौराणिक मान्यता है की यदि कोई व्यक्ति निधिवन बंद होने के बाद भी यहाँ छूप कर रासलीला देखने की कोशिश करता है तो वह पागल हो जाता है। ऐसे ही जयपुर से आये एक भक्त ने रासलीला को छूप कर देखने की कोशिश की थी सुबह के समय जब निधिवन को खोला गया तो उसका मानसिक संतुलन बिगड़ा हुआ था। ऐसे और भी बोहोत से किस्से है।

बंद रहती है घरो की खिड़किया

आस-पास रहने वाले लोगों ने ईंटों द्वारा अपनी खिड़कियों को स्थायी रूप से बंद कर दिया है, या फिर श्याम के समय ठीक 7 बजे मंदिर की घंटी बजते ही वह अपनी खिड़कियों को बंद कर लेते है। स्थानिय लोगो के मुताबिक रात के समय कोई भी निधिवन की तरफ नहीं देखता, भले ही वे इसे देखना चाहते हैं। क्योकि भगवान् की रासलीला देखने वाला या तो अँधा हो जाता है या फिर पागल हो जाता है।

 

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