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जानिये नवम्बर महीने में कोन – कोन से व्रत और त्योहार आने वाले है

वर्ष 2018 के नवम्बर महीने में भी अक्टूबर महीने की तरह कई बड़े – बड़े व्रत और त्योहार आने वाले हैं। इन त्योहारों में धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और संकष्टी चतुर्थी प्रमुख है। दिवाली का त्यौहार केवल भारत देश में ही नही अपितु विदेशों में भी बड़े धूम धाम से मनाया जाता है। भारत वर्ष में यह त्यौहार भगवान श्री राम के 14 वर्ष के वनवास समाप्त करके वापिस अयोध्या नगरी में आने की खुशी में मनाया जाता है।

november festivals 2018

वर्ष 2018 के नवंबर महीने में आने वाले त्यौहार (November Festivals 2018)

3 नवंबर 2018 दिन शनिवार को रमा एकादशी

5 नवंबर 2018 दिन सोमवार को मासिक शिवरात्रि, धनतेरस और प्रदोष व्रत (कृष्ण)

6 नवंबर 2018 दिन मंगलवार को नरक चतुर्दशी

7 नवंबर 2018 दिन बुधवार को दिवाली और अश्विन अमावस्या

8 नवंबर 2018 दिन गुरुवार को गोवर्धन पूजा

9 नवंबर 2018 दिन शुक्रवार को भाई दूज

16 नवंबर 2018 दिन शुक्रवार को वृश्चिक संक्रांति

19 नवंबर 2018 दिन सोमवार को देवुत्थान एकादशी

20 नवंबर 2018 दिन मंगलवार को प्रदोष व्रत (शुक्ल)

23 नवंबर 2018 दिन शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा व्रत

26 नवंबर 2018 दिन सोमवार को संकष्टी चतुर्थी

धनतेरस का त्यौहार (Dhanteras Festival)

धनतेरस के त्यौहार को दीपावली के त्यौहार का आरम्भ माना जाता है। इस दिन को धन और आरोग्य के रूप में देखा जाता है। इसी वजह से इस दिन भगवान धनवंतरि और भगवान कुबेर देवता की पूजा और अर्चना की जाती है। ताकि हर घर में समृद्धि और आरोग्य बना रहे।

इस त्योहार को मनाए जाने के पीछे मान्यता है की श्री सूक्त में लक्ष्मी के स्वरूपों का विवरण कुछ इस प्रकार मिलता है। धनमग्नि, धनम वायु, धनम सूर्यो धनम वसु: अर्थात् प्रकृति ही लक्ष्मी है और प्रकृति की रक्षा करके मनुष्य स्वयं के लिए ही नहीं, अपितु नि:स्वार्थ होकर पूरे समाज के लिए लक्ष्मी का सृजन कर सकता है और यह भी लिखा गया है- न क्रोधो न मात्सर्यम न लोभो ना अशुभा मति इसका अर्थ है कि जहां क्रोध और किसी के प्रति द्वेष की भावना होगी, वहां मन की शुभता में कमी आएगी, जिससे वास्तविक लक्ष्मी की प्राप्ति में बाधा उत्पन्न होगी। यानी किसी भी प्रकार की मानसिक विकृतियां लक्ष्मी की प्राप्ति में बाधक हैं।

दिवाली का त्यौहार (Diwali Festival)

दिवाली के दिन देवी विशेष रूप से देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। दिवाली पर सबसे पहले सुबह उठ कर अपनी हथेलियों के दर्शन करते हुए मन ही मन मां लक्ष्मी की कृपा मांगनी चाहिए और “कराग्रे वस्ते लक्ष्मी, कर मध्ये सरस्वती, कर मूले तू गोविंदम् प्रभाते कर दर्शनम” इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।

दिवाली के दिन एक खड़ी हल्दी की गांठ भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के चरणों से स्पर्श करा कर अपने कार्यक्षेत्र या वर्क टेबल पर पीले कपड़े में बांधकर रखें। इससे तेजी से तरक्की होगी। शत्रु परास्त होंगे। दीपावली पर घर में देसी घी का दीपक जलाना और पूजा के स्थान पर थोड़ा-सा देसी घी खुले पात्र में रखना मां लक्ष्मी जी को आकर्षित करता है।

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दीवाली पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने का कारण और उनके मन्त्र

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दिवाली त्यौहार और पूजा विधि