in ,

पढाई करने वाले छात्रों के लिए देवी सरस्वती के शक्तिशाली मन्त्र

saraswati-mantr

पढाई करने वाले छात्रों को देवी सरस्वती की पूजा अवश्य करनी चाहिए क्योकि देवी सरस्वती विद्या देने वाली और जीवन में सफलता देने वाली देवी है। देवी सरस्वती अपने हाथों में वीणा, वेद ग्रन्थ और रक्षा करने के लिए अस्त्र धारण करती है। देवी सरस्वती जी को वाग्देवी के नाम से भी जाना जाता है। देवी सरस्वती जी को सफेद पुष्प, वस्त्र और वस्तुएं अर्पित की जाती है।

प्रत्येक विद्यार्थी को अपने दिन की शुरुआत माता सरस्वती की आराधना से करनी चाहिए। सुबह सबसे पहले स्नान आदि करने के बाद और सारे काम से निवृत होकर मां सरस्वती की प्रतिमा के आगे या श्री सरस्वती यंत्र को सामने रखकर सफेद पुष्प, चावल, चंदन और धूप इत्यादि से पूजा करनी चाहिए।

देवी सरस्वती जी के मंत्र (Saraswati Mantr in Hindi)

shaktishali mantr

देवी सरस्वती का मूल मंत्र

ॐ ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः

देवी सरस्वती का गायत्री मंत्र

 ॐ सरस्वत्यै विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्।

संपूर्ण सरस्वती मंत्र

 ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।

परीक्षा में भय को दूर करने का मंत्र (Saraswati Mantra for Exams)

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वीणा पुस्तक धारिणीम् मम् भय निवारय निवारय अभयम् देहि देहि स्वाहा।

mantr

याददाश्त और स्मरण शक्ति बढाने के लिए मंत्र

ऐं नमः भगवति वद वद वाग्देवि स्वाहा।

उच्च शिक्षा और बुद्धिमत्ता के लिए सरस्वती देवी के इन मंत्रों का जाप करना चाहिए:

शारदा शारदाभौम्वदना। वदनाम्बुजे। सर्वदा सर्वदास्माकमं सन्निधिमं सन्निधिमं क्रिया तू।

कला और साहित्य के क्षेत्र में सफलता के लिए इस मंत्र का जाप करना चाहिए:

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमां आद्यां जगद्व्यापिनीं। वीणा पुस्तक धारिणीं अभयदां जाड्यान्धकारापाहां।

हस्ते स्फाटिक मालीकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां। वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धि प्रदां शारदां।।

सभी बाधाओं को दूर करने के लिए देवी सरस्वती के इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

ऐं ह्रीं श्रीं अंतरिक्ष सरस्वती परम रक्षिणी। मम सर्व विघ्न बाधा निवारय निवारय स्वाहा।

इन मंत्रों के जाप से माता सरस्वती को प्रसन्न किया जा सकता है और जीवन की सभी परीक्षाओं में सफलता पाई जा सकती है। पढ़ने वाले छात्रों के लिए जीवन में सफलता पाना बहुत जरूरी होता है और यदि देवी सरस्वती की कृपा हो जाए तो विद्यार्थी को जीवन में सब कुछ जल्दी से प्राप्त हो जाता है। विद्या के बिना संसार में मनुष्य एक पशु की भांति जीवन व्यतीत करता है। जिस प्रकार पशु को किसी भी ज्ञान का बोध नहीं होता और वह जीवन में कुछ भी ज्ञान अर्जित नहीं कर पाता उसी प्रकार जो मनुष्य विद्या प्राप्त नहीं कर पाता उसका जीवन भी निरर्थक ही होता है।

विद्या को प्राप्त करने के लिए सबसे पहले तो विद्यार्थी को अपने मन की शुद्धि करनी होती है क्योंकि यदि मन शुद्ध होगा तो विचार भी शुद्ध होंगे और पढ़ाई में मन भी लगेगा और जिस विद्यार्थी का मन शुद्ध नहीं होता उसको कभी भी पढ़ाई में सफलता नहीं मिलती। विद्यार्थी को अपनी पुस्तकों और अपने गुरुजनों और विद्या की देवी सरस्वती का सदैव आदर और सम्मान करना चाहिए।

यह भी पढ़े: देवी सरस्वती के 10 शक्तिशाली मन्त्र 

कोई भी व्यक्ति जन्म से बुद्धिमान नहीं होता जैसे जैसे व्यक्ति बड़ा होता जाता है और विद्या को ग्रहण करता रहता है तो वह बुद्धिमान होता जाता है। जब भी विद्यार्थी को पढ़ने बैठना हो तो उसे देवी सरस्वती का समरण और जाप अवश्य करना चाहिए। इससे मन शांत हो जाता है और विद्यार्थी का मन पढ़ाई में पूरी तरह लगता है जिससे वह पूरी तरह से सफलता पा सकता है।

पढ़ाई करने वाले स्थान पर कभी भी विद्यार्थी को पुस्तक या कलम को खुला नहीं छोड़ना चाहिए। यदि पुस्तक और कलम का काम पूरा हो गया हो तो उसे पूरी तरह से बंद करके रखना चाहिए। पढ़ाई करने वाले स्थान पर कभी भी अन्न या कोई खाने पिने की वस्तु को ग्रहण नहीं करना चाहिए और यदि कोई अन्य काम करना हो तो उससे पहले पुस्तकों को अच्छी तरह से बंद करके उनके स्थान पर रख देना चाहिए। पुस्तकों और किताबों पर कभी भी धूल और मिट्टी को न जमने दे उनको समय समय पर साफ करते रहना चाहिए।

विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई करने का सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त होता है यानी कि सुबह के 4:00 बजे। इस समय पढ़ाई करने से जल्दी समझ आता है और दिमाग भी अच्छी तरह काम करता है और पढाई में किसी प्रकार की कोई भी बाधा नहीं आती। जिस भी काम को आप ध्यान से करना चाहते हैं इस समय करना चाहिए इससे पूरा ध्यान आपका उस काम में लगेगा और विद्यार्थियों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पढ़ाई करते समय कभी भी जूते नहीं पहनने चाहिए यदि किसी वजह से जूते पहनने पर जाए तो बार-बार जूतों को हाथ नहीं लगाना चाहिए और यदि जूतों को हाथ लग भी जाते है तो उनको पुस्तकों पर लगाने से पहले अच्छी तरह धो लेना चाहिए।

जिन विद्यार्थियों को परीक्षा के समय में बार बार बोलने की आदत होती है। उनको चाहिए कि वह अपने साथ फिटकरी या कपूर रखें इसे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और उनको परीक्षा में ध्यान लगाने में सफलता मिलती है।

मां सरस्वती उन विद्यार्थियों की सदैव मदद करती है जो हमेशा विद्या के बारे में सोचते रहते हैं। वह जो भी काम कर रहे होते हैं और उसमें भी में कुछ न कुछ सीखने की कोशिश करते हैं तो उनको जीवन में हर मार्ग पर सफलता ही सफलता मिलती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

108-names-of-lord-ram

श्री राम अष्टोत्तर शतनामावली – भगवान राम के 108 नाम

Brahmamuhurt

ब्रह्म मुहूर्त क्या है और इसका महत्व