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क्यों रखा जाता है पापांकुशा एकादशी का व्रत

यहाँ से आप जान सकते है की क्यों क्यों रखा जाता है पापांकुशा एकादशी का व्रत और किस देवता की पूजा इस व्रत में की जाती है और इस व्रत को करने से क्या लाभ होता है।  

पापांकुशा एकादशी (Papankusha Ekadashi) सभी पापों का नाश करने वाली एकादशी का नाम पापांकुशा एकादशी है। इस एकादशी के दिन भगवान पद्‍मनाभ की पूजा होती है भगवन श्री हरी विष्णु जी की विश्राम अवस्था को पद्‍मनाभ के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी मनुष्य को मनवांछित फल देकर स्वर्ग को प्राप्त कराने वाली है। पद्म पुराण के अनुसार जो व्यक्ति सुवर्ण, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, जूते और छाते का दान करता है, उसे अंतिम समय में कभी भी यमराज के दर्शन नहीं होते।

पापांकुशा एकादशी (Papankusha Ekadashi) की तिथि और शुभ मुहूर्त

दिन  एकादशी शुरु  एकादशी समाप्त  
बुधवार 09 अक्‍टूबर शाम 05:57 10 अक्‍टूबर सुबह 8 बजे तक 

ऐसा कहा जाता है की इस संसार में एकादशी के व्रत से मिलने वाले पुण्य के बराबर कोई पुण्य नहीं है। इसके बराबर पवित्र तीनों लोकों में कुछ भी नहीं। पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य की देह में से भी पाप की समाप्ति हो जाती हैं।

पापाकुंशा एकादशी (Papankusha Ekadashi) व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है विंध्य पर्वत पर एक बहेलियां रहता था। उसने अपनी सारी जिंदगी में कोई धर्म का काम नही किया और सारी जिंदगी हिंसा, लूटपाट, मद्यपान और गलत संगति में व्यतीत कर दी। जब उसका अंतिम समय आया तब यमराज के दूत बहेलिये को लेने आए और यमदूत ने बहेलिये से कहा कि कल तुम्हारे जीवन का अंतिम दिन है हम तुम्हें कल लेने आएंगे। यह बात सुनकर बहेलिया बहुत भयभीत हो गया और महर्षि अंगिरा के आश्रम में पहुंचा।

महर्षि अंगिरा को प्रणाम कर उनके चरणों में गिर गया और अपने द्वारा किये गये बुरे कर्मो से मुक्ति के लिए उनसे प्रार्थना करने लगा। महर्षि अंगिरा ने बहेलिये से प्रसन्न होकर कहा कि कल आश्विन शुक्ल एकादशी है यदि तुम विधि पूर्वक इस एकादशी का व्रत करोगे तो तुम्हे नरक लोक नही भोगना पड़ेगा। बहेलिये ने महर्षि अंगिरा के बताए हुए विधान से विधि पूर्वक पापांकुशा एकादशी का व्रत करा और इस व्रत पूजन के प्रभाव से वह विष्णु लोक को गया। जब यमराज के यमदूत ने इस चमत्कार को देखा तो वह बहेलिया को बिना लिए ही यमलोक वापस लौट गए।

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