in

सभी पूर्व जन्म के पापों को समाप्त करने वाली पापमोचनी एकादशी की पूजा विधि एवं व्रत कथा

PAPMOCHANI EKADASHI POOJA VIDHI AND VRAT KATHA

तिथि  दिन  शुभ मुहूर्त 
1 अप्रैल 2019 सोमवार  दोपहर 1  बजकर 40 मिनट से शाम 4 बजकर 09 मिनट तक

चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को किये जाने वाले व्रत को पाप मोचनी एकादशी व्रत के नाम से जाना जाता है। पौराणिक हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार ऐसा भी माना जाता है की चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी पापों को नष्ट करने वाली होती है। इस एकादशी व्रत के फल के विस्तृत रूप को स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को बताया था।

papmochni ekadasi

पापमोचनी एकादशी पर व्रत करने वाले मनुष्य के सभी पूर्व जन्म और इस जन्म में किये गये पाप समाप्त हो जाते है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी का पूजन किया जाता है। जो भी मनुष्य इस दिन पुरे विधि-विधान से पूजा करता है और व्रत करता है उसे शुभ फलों की प्राप्ति होती है और इस लोक में उसका यश बढ़ता है।

पापमोचनी एकादशी पूजन विधि

  1. पापमोचनी एकादशी के व्रत में भगवान श्री हरी विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है।
  2. इस दिन जो भी मनुष्य व्रत करता है उसे एक ही बार सात्विक भोजन करना चाहिए।
  3. व्रत करने से पूर्व मन से भोग विलास की भावना को निकालकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करनी चाहिए।
  4. इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करके व्रत का संकल्प करना चाहिए संकल्प के उपरान्त श्री विष्णु की पूजा विधिवत करनी चाहिए।
  5. पूजा समाप्त होने पर यदि संभव हो सके तो भग्वद् कथा का पाठ करना चाहिए।
  6. एकादशी तिथि को जागरण करने से कई गुणा पुण्य मिलता है। इसलिए रात में भी निराहार रहकर भजन कीर्तन करते हुए जागरण भी करना चाहिए।
  7. इस दिन ब्रह्मणों को भोजन आदि करवा कर दक्षिणा सहित विदा करें और इसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए।

यह भी पढ़े: ध्यान (Meditation) किस प्रकार से लगाया जा सकता है 

पापमोचनी एकादशी व्रत कथा

सबसे पहले धर्मराज युधिष्‍ठिर ने पापमोचनी एकादशी के बारे में भगवान श्री कृष्ण से पूछा था। जिस पर भगवान श्री कृष्ण बोले! चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी के नाम से जाना जाता है और उसकी विधि और व्रत कथा इस प्रकार है।

vishnu mantr

भगवान श्री कृष्ण बोले हे राजन् – चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पापमोचनी एकादशी पर व्रत करने से मनुष्‍य के सभी पापों का नाश होता हैं। इस व्रत को सभी व्रतों में सबसे उत्तम व्रत मन गया है। इस पापमोचनी एकादशी की कथा पढने एवं सुनने से समस्त पापों का नाश हो जाता है। एक समय देवर्षि नारद जी ने भी जगत् पिता ब्रह्माजी से चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के विधान के बारे में पूछा था।

ब्रह्माजी ने नारद जी को जो कथा बताई वही में तुमको बताने जा रहा हूँ। इस दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता हैं। प्राचीन समय में चित्ररथ नामक एक रमणिक वन था। इस वन में देवराज इन्द्र गंधर्व कन्याओं तथा देवताओं सहित स्वच्छंद विहार करते थे।

एक बार मेधावी नामक ऋषि भी वहाँ पर तपस्या कर रहे थे। वे ऋषि शिव उपासक तथा अप्सराएँ शिव द्रोहिणी अनंग दासी (अनुचरी) थी। एक बार कामदेव ने मुनि का तप भंग करने के लिए उनके पास मंजुघोषा नामक अप्सरा को भेजा। युवावस्था वाले मुनि अप्सरा के हाव भाव, नृत्य, गीत तथा कटाक्षों पर काम मोहित हो गए। रति-क्रीडा करते हुए 57 वर्ष व्यतीत हो गए।

lord vishnu

एक दिन मंजुघोषा ने देवलोक जाने की आज्ञा माँगी। उसके द्वारा आज्ञा माँगने पर मुनि को भान आया और उन्हें आत्मज्ञान हुआ कि मुझे रसातल में पहुँचाने का एकमात्र कारण अप्सरा मंजुघोषा ही हैं। क्रोधित होकर उन्होंने मंजुघोषा को पिशाचनी होने का श्राप दे दिया।

श्राप सुनकर मंजुघोषा ने काँपते हुए ऋषि से मुक्ति का उपाय पूछा। तब मुनिश्री ने पापमोचनी एकादशी का व्रत रखने को कहा। और अप्सरा को मुक्ति का उपाय बताकर पिता च्यवन के आश्रम में चले गए। पुत्र के मुख से श्राप देने की बात सुनकर च्यवन ऋषि ने पुत्र की घोर निन्दा की तथा उन्हें पापमोचनी चैत्र कृष्ण एकादशी का व्रत करने की आज्ञा दी। व्रत के प्रभाव से मंजुघोष अप्सरा पिशाचनी देह से मुक्त होकर देवलोक चली गई।

अत: हे नारद! जो कोई मनुष्य विधिपूर्वक इस व्रत को करेगा, उसके सारों पापों की मुक्ति होना निश्चित है। और जो कोई इस व्रत के महात्म्य को पढ़ता और सुनता है उसे सारे संकटों से मुक्ति मिल जाती है।

यह भी पढ़े: रुद्राक्ष के अनसुने रहस्य और रुद्राक्ष कब धारण करना चाहिए 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Lord-Hanuman

जानिए इस पृथ्वी पर ऐसा कोन सा स्थान है जहाँ आज भी हनुमान जी रहने के लिए आते है

Vastu-Dosh-Nivaran-Mantr

सकारात्मक ऊर्जा के लिए वास्तु मंत्र – वास्तु दोष निवारण मंत्र