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जानिये कौन सा श्राद्ध किस तिथि पर आएगा और कैसे करें श्राद्ध पूजा

pitru paksha
Dainik Bhaskar

प्राचीन हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार श्राद्ध करने की विधि होती है और यदि पूरे विधि-विधान के साथ श्राद्ध का काम ना किया जाए तो श्राद्ध कर्म निष्फल माना जाता है और जिनके लिए यह कर्म किया जाता है उनकी आत्मा अतृप्त ही रहती है। जब भी श्राद्ध कर्म किया जाए तो उसको विद्वान ब्राह्मण के जरिए ही श्राद्ध कर्म, पिंडदान, तर्पण आदि करवाना चाहिए और श्राद्ध कर्म पूरे होने के पश्चात ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देनी चाहिए। साथ ही किसी जरूरतमंद और गरीब लोगो की सहायता करनी चाहिए इससे बहुत पुण्य मिलता है। इसके साथ साथ श्राद्ध के दिनों में गाएँ, कुत्ते और कोवों के लिए भोजन का एक अंश निकालना चाहिए।

श्राद्ध कर्म करने के लिए सबसे पहले जिसके लिए श्राद्ध करना है उसकी तिथि का ज्ञान होना आवश्यक है जिस तिथि को उनकी मृत्यु हुई हो उसी तिथि को श्राद्ध करना चाहिए। यदि किसी मनुष्य को अपने पितरो की मृत्यु की तिथि नहीं पता हो तो उसे अमावस्या के दिन श्राद्ध कर्म करना चाहिए। क्योंकि यह दिन सर्व पितृ श्राद्ध योग माना जाता है। श्राद्ध कर्म वैसे तो गंगा नदी के किनारे करना चाहिए परंतु यदि संभावना हो तो इसे घर पर भी किया जा सकता है।

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श्राद्ध पूजा के दिन ब्राह्मणों द्वारा मंत्र उच्चारण करवाना चाहिए और पूजा के पश्चात जल से तर्पण करवाना चाहिए। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन करवाना चाहिए और बाद में गाय, कुत्ते और कव्वे आदि का हिस्सा भी निकालना चाहिए और इन सभी को खाना डालते समय अपने पितरों को याद करना चाहिए और उनसे अपने द्वारा बनाए गए भोजन को ग्रहण करने का आवेदन करना चाहिए।

पूर्णिमा से अमावस्या तक 15 दिन पितरों के माने जाते हैं। इन 15 दिनों में सभी लोग अपने-अपने पितरों को याद करते है और उनका तर्पण करते है। श्राद्ध को पितृ पक्ष और महालय के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2018 में श्राद्ध 24 सितम्बर से 8 अक्टूबर तक रहेगा। घरों में खुशहाली बनाएं रखने के लिए पितरों को याद किया जाता है। इसलिए पितृपक्ष में पृथ्वी लोक में आए हुए पितरों का तर्पण किया जाता है।

जिस तिथि को पितरों का देहांत होता है उसी दिन पितरों का श्राद्ध किया जाता है।

जानिए किस तिथि को कौन सा श्राद्ध आएगा (Shradh Dates2018)

पूर्णिमा श्राद्ध – 24 सितंबर 2018

प्रतिपदा श्राद्ध – 25 सितंबर 2018

द्वितीय श्राद्ध – 26 सितंबर 2018

तृतिया श्राद्ध – 27 सितंबर 2018

चतुर्थी श्राद्ध – 28 सितंबर 2018

पंचमी श्राद्ध – 29 सितंबर 2018

षष्ठी श्राद्ध – 30 सितंबर 2018

सप्तमी श्राद्ध – 1 अक्टूबर 2018

अष्टमी श्राद्ध – 2 अक्टूबर 2018

नवमी श्राद्ध – 3 अक्टूबर 2018

दशमी श्राद्ध – 4 अक्टूबर 2018

एकादशी श्राद्ध – 5 अक्टूबर 2018

द्वादशी श्राद्ध – 6 अक्टूबर 2018

त्रयोदशी श्राद्ध और चतुर्दशी श्राद्ध – 7 अक्टूबर 2018

सर्वपितृ अमावस्या – 8 अक्टूबर 2018

श्राद्ध के कर्म के दौरान मुंह दक्षिण दिशा की ओर करना बहुत अच्छा होता है क्योंकि पितर-लोक को दक्षिण दिशा में माना गया है। श्राद्ध को सच्चे मन और श्रद्धा के साथ करना चाहिए क्योकि पुरे संकल्प के साथ करने से ही पितरों को आत्मिक शांति मिलती है और वे हमे अपना आशीर्वाद दे कर जाते है।

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