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श्राद्ध तिथियाँ 2019 – जाने किस दिन है आपके पित्रों का श्राद्ध

PITRU PAKSHA SHRADH 2019 – जाने पितृ पक्ष श्राद्ध के नियम के बारे में और पितरों के नाराज होने का क्या कारण होता है

पितृ पक्ष श्राद्ध आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से आरंभ होते है। वर्ष 2019 में पितृ पक्ष श्राद्ध 14 सितंबर से आरंभ होकर 28 सितंबर को समाप्त होंगे। इस वर्ष श्राद्ध पक्ष में एकादशी और द्वादशी का श्राद्ध एक ही दिन होगा। द्वादशी तिथि का क्षय है। श्राद्ध में पितरों अर्थात अपने पूर्वजों को याद किया जाता है और उनके नाम से हवन, पूजा, दान आदि करवाया जाता है। हिन्दू धर्म ग्रंथों में 2 प्रकार के पितर बताये गये हैं पहले दिव्य पितर और दूसरे पूर्वज पितर। दिव्य पितर ब्रह्मा के पुत्र मनु से उत्पन्न हुए ऋषि हैं। पितरों में सबसे प्रमुख अर्यमा हैं जिनके बारे में गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि पितरों में प्रधान अर्यमा वे स्वयं हैं।

shradh 2019

पितृ पक्ष श्राद्ध के नियम

Contents

पितृ पक्ष श्राद्ध में जिन तिथियों में पूर्वज यानी पिता,  दादा,  पुत्र या अन्य परिवार के किसी भी व्यक्ति मृत्यु हुई होती है उस तिथि को उनका श्राद्ध किया जाता है। श्राद्ध वाले दिन दोपहर के समय पितरों के नाम से पूजा आदि करवानी चाहिए और ब्राह्मण को भोजन आदि करवाना चाहिए।

पितृपक्ष श्राद्ध तिथि 2019

पहला श्राद्ध (14 सितंबर 2019 दिन शनिवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई हो।

दूसरा श्राद्ध (15 सितंबर 2019  दिन रविवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु प्रतिपदा तिथि को हुई हो। इस तिथि को नानी-नाना का श्राद्ध भी किया जा सकता है।

तीसरा श्राद्ध (16 सितंबर 2019 दिन सोमवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु द्वितीय तिथि को हुई हो।

चौथा श्राद्ध (17 सितंबर 2019  दिन मंगलवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु तृतीया तिथि को हुई हो।

पांचवा श्राद्ध (18 सितंबर 2019  दिन बुधवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु चतुर्थी तिथि को हुई हो।

छठा श्राद्ध (19 सितंबर 2019  दिन गुरुवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें जिनकी मृत्यु पंचमी तिथि को हुई हो। इसी तिथि को अविवाहित मृतक पित्रों के निमित्त श्राद्ध किया जाता है।

सातवां श्राद्ध (20 सितंबर 2019  दिन शुक्रवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु षष्ठी तिथि को हुई हो।

आठवां श्राद्ध (21 सितंबर 2019  दिन शनिवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु सप्तमी तिथि को हुई हो।

नौवां श्राद्ध (22 सितंबर 2019  दिन रविवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु अष्टमी तिथि को हुई हो।

दसवां श्राद्ध (23 सितंबर 2019  दिन सोमवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु नवमी तिथि को हुई हो। इस तिथि को विशेष रूप से माताओं एवं परिवार की सभी स्त्रियों का श्राद्ध किया जा सकता है। इसलिए इसे मातृनवमी भी कहते हैं।

ग्यारहवां श्राद्ध (24 सितंबर 2019  दिन मंगलवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु दशमी तिथि को हुई हो।

बारहवां श्राद्ध (25 सितंबर 2019  दिन बुधवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु एकादशी तिथि को हुई हो।

तेरहवां श्राद्ध (26 सितंबर 2019  दिन गुरुवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु द्वादशी तिथि को हुई हो। इस तिथि को उन लोगों का श्राद्ध भी किया जाता है जिन्होंने मृत्यु से पूर्व सन्यास ले लिया हो।

चौदहवां श्राद्ध (27 सितंबर 2019  दिन शुक्रवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु त्रयोदशी तिथि को हुई हो। यदि घर में किसी बच्चे की मृतु हो जाती है तो मृत बच्चों का श्राद्ध भी इसी दिन किया जाता है।

पद्रहवां श्राद्ध (27 सितंबर 2019 दिन शुक्रवार)

चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध केवल उन मृतजनों के लिए करना चाहिए जिनकी मृत्यु किसी हथियार से हुई हो, उनका क़त्ल हुआ हो, जिन्होंने आत्महत्या की हो या जिनकी मृत्यु किसी हादसे में हुई हो।

सोलहवां श्राद्ध (28 सितंबर 2019  दिन शनिवार)

इस दिन उन पित्रों का श्राद्ध करें, जिनकी मृत्यु अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि और चतुर्दशी तिथि को हुई हो। इसके अलावा इस तिथि को वह लोग भी श्राद्ध करें, जिन्हें अपने मृत पित्रों की तिथि याद नहीं हो। क्योंकि इस अमावस्या तिथि को सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या भी कहते हैं।

पितृपक्ष में पितर नाराज क्यों हो जाते हैं

पितृपक्ष में अपने पूर्वजों को ही लोग याद करते हैं और इनके नाम से पिंडदान, श्राद्ध और ब्राह्मण भोजन करवाते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार पितर अपन परिजनों के पास पितृपक्ष श्राद्ध के समय आते हैं और अन्न, जल एवं आदर की अपेक्षा करते हैं। जिन परिवार के लोग पितृ पक्ष के दौरान पितरों के नाम से अन्न जल दान नहीं करते। श्राद्ध कर्म नहीं करते हैं उनके पितर भूखे-प्यासे धरती से लौट जाते हैं इससे परिवार के लोगों को पितृ दोष लगता है। इसे पितृ शाप भी कहते हैं। इससे संतान प्राप्ति में बाधा आती है। परिवार में रोग और कष्ट बढ जाता है।

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